लोकसभा चुनाव 2019: राजसमंद लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान के राजसमंद लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के हरिओम सिंह राठौड़ हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता गोपाल सिंह शेखावत को 39, 57, 05 मतों से पराजित करके ये सीट अपने नाम की थी। मेवाड़ और मारवाड़ के चार जिलों में फैली राजसमंद लोकसभा सीट साल 2008 में परीसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी, जहां साल 2009 में पहला आम चुनाव हुआ था, जिसे कि कांग्रेस नेता गोपाल सिंह शेखावत ने जीता था, जबकि साल 2014 के चुनाव में ये सीट बीजेपी के खाते में चली गई और यहां से हरिओम सिंह राठौड़ जीतकर लोकसभा पहुंचे। इससे पहले हरिओम सिंह राठौड़ पाली जिला प्रमुख भी रह चुके हैं। उनकी स्वच्छ छवि, मोदी लहर, स्थानीय लोगों के प्रति गोपाल सिंह शेखावत की बेरूखी और इलाके के प्रति उनके नीरस रवैये ने हरिओम सिंह राठौड़ की जीत का आसान कर दिया और वो 64, 47, 94 मतों के साथ राजसमंद लोकसभा सीट पर विजयी हुए।

profile of Rajsamand lok sabha constituency

राजसमंद लोकसभा सीट का इतिहास

आठ विधानसभा सीटों को अपने आंचल में संजोए राजसमंद जिला अरावली पर्वतमाला के बीच में स्थित है। इस जिले का नाम मेवाड़ के राणा राज सिंह द्वारा 17 वीं सदी में राजसमंद झील के नाम पर रखा गया है। 10 अप्रैल 1991 को उदयपुर जिले के राजनगर और कांकरोली को मिलाकर राजसमंद जिले का गठन किया गया था। कुम्लगढ दुर्ग और हल्दीघाटी राजसमंद जिले का प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जिसे देखने के लिए लाखों की संख्या में सैलानी यहां हर साल आते हैं। यहां की जनसंख्या 25,17,685 है, जिसमें से 81 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में और 18 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। राजसमंद की 95 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म में और 2 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में यकीन करते हैं।

हरिओम सिंह राठौड़ का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक सांसद हरिओम सिंह राठौड़ की उपस्थिति 82 प्रतिशत रही है तो वहीं इस दौरान उन्होंने 61 डिबेट में हिस्सा लिया है और 240 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस और नंबर 3 पर बसपा थी। उस साल यहां कुल मतदाताओं की संख्या 16 लाख 99 हजार 401 थी, जिसमें से मात्र 9,82,119 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 5,08,738 और महिलाओं की संख्या 4,73,381 थी।

आपका बता दें कि राजसमंद में सबसे अधिक तीन लाख मतदाता राजपूत और सवा लाख रावत है, जो कि यहां के सांसद को चुनने में अहम रोल निभाते हैं, साल 2014 के चुनावों में राजपूतों का कांग्रेस पर गुस्सा फूटा था, जिसका फायदा बीजेपी ने उठाया था और उसने राठौड़ को यहां का उम्मीदवार बनाकर ये सीट अपने नाम कर ली थी लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। राजपूतों का एक वर्ग वसुंधरा राजे की सरकार से काफी खफा था, जिसके चलते हाल ही में हुए राज्य के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है, जिसकी वजह से बीजेपी खेमे में जबरदस्त खलबली है, ऐसे में इस सीट पर दोबारा से जीतना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा तो वहीं सूबे में सरकार चला रही कांग्रेस इस वक्त आत्मविश्वास से भरी हुई है, उसकी पूरी कोशिश विधानसभा चुनाव की जीत को लोकसभा चुनाव में भूनाने की है, ऐसे में उसका पूरा प्रयास राजसमंद की सीट को जीतने का होगा, देखते हैं इस जंग में विजश्री किसे हासिल होती है।

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