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लोकसभा चुनाव 2019: राजकोट लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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नई दिल्ली: गुजरात की राजकोट लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के मोहन कुंदरिया है। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार कुंवरजी बावलिया को 246, 228 वोटों से हराया था। मोहन कुंदरिया को इस चुनाव में जहां 621,524 वोट मिले थे, वहीं कुंवरजी बावलिया को 375, 096 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। गौरतलब है कि साल 2014 में इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर लड़ने वाले कुंवरजी बावलिया ने जुलाई 2018 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता हासिल कर ली है।

profile of Rajkot lok sabha constituency

राजकोट लोकसभा सीट का इतिहास

राजकोट लोकसभा सीट पर साल 1962 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी ने जीत दर्ज की थी और उसका लगातार दो बार इस सीट पर राज रहा था। साल 1971 का चुनाव यहां पर कांग्रेस ने जीता तो वहीं 1977 के चुनाव में यहां भारतीय लोकदल ने जीत का परचम लहराया। साल 1980 और 1984 में यह सीट कांग्रेस के ही पास रही तो वहीं 1989 का चुनाव यहां पहली बार भाजपा ने जीता और तब से लेकर साल 2004 तक यहां पर उसी का राज रहा और वल्लभभाई कठारिया यहां से लगातार चार बार सांसद चुने गए, हालांकि साल 2009 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई और कुंवरजी बावलिया यहां से एमपी चुने गए लेकिन साल 2014 के चुनाव में उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी और मोहन कुंदरिया यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे।

मोहन कुंदरिया का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में मोहन कुंदरिया की उपस्थिति 95 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 16 डिबेट में हिस्सा लिया है और 216 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 16,55,717 थी, जिसमें से मात्र 10,57,069 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,93,333 और महिलाओं की संख्या 4,63,736 थी।

राजकोट, एक परिचय-प्रमुख बातें-

गुजरात प्रान्त के प्रमुख शहरों में से एक राजकोट कभी सौराष्ट्र की राजधानी हुआ करता था। इसी शहर में महात्मा गांधी का बचपन गुजरा है इसलिए इस शहर में बापू के जीवन से जुड़े बहुत सारे दर्शनीय स्थल और वस्तुएं हैं जिन्हें देखने के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेश से भी सैलानी आते हैं। महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह का प्रयोग सबसे पहले यहीं किया था। राजकोट में मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय पतंग मेला बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। राजकोट से भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास की बहुत सी यादें जुड़ी हुईं हैं। सन 1612 ई. में राजकोट शहर की स्थापना जडेजा वंश के ठाकुर विभाजी जडेजा ने की थी। राजकोट अपने सोने के व्यापर और सिल्क की साड़ी के लिए भी पूरे भारत में मशहूर है। यहां की आबादी 27,21,136 है, जिसमें से 35 प्रतिशत लोग गांवों में और 64 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं। इसके अलावा यहां 7 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति और 0.70 प्रतिशत लोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के हैं।

राजकोट सीट पर लंबे वक्त के बाद साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी , जो कि साल 2014 के चुनाव में मोदी लहर की वजह से हार में तब्दील हो गई थी, इसलिए इस बार कांग्रेस इस सीट पर वापसी करने के लिए जहां एड़ी-चोटी का दम लगाएगी तो वहीं भाजपा की पूरी कोशिश इस सीट पर अपना प्रभुत्व बचाए रखने की होगी, देखते हैं शह और मात के इस खेल के बीच जीत किसकी होती है, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि राजकोट सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी।

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English summary
profile of Rajkot lok sabha constituency
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