लोकसभा चुनाव 2019: रायगढ़ लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की चर्चित रायगढ़ लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद शिवसेना के अनंत गीते हैं। साल 2014 के चुनाव में अनंत गीते ने इस सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता व पूर्व जल संसाधन मंत्री सुनील तटकरे को मात्र 2,110 वोटों से हराया था,अनंत गीते को 396,178 वोट मिले थे तो वहीं सुनील तटकरे 394,068 वोट प्राप्त हुए थे, आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस सीट पर किस तरह से कांटे की टक्कर हुई थी।

रायगढ़ लोकसभा का इतिहास
रायगढ़ 7 हजार 152 हेक्टेयर में फैला हुआ है। रायगढ़ का मुख्यालय अलीबाग है। यह अपने ऐतिहासिक दुर्ग के लिए पूरे भारत में मशहूर है, जिसे देखने के लिए लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं, रायगड किले का प्राचीन नाम रायरी था, पहले रायगढ़ परिसर कोलाबा लोकसभा में आता था। नए परिसीमन में रत्नागिरि जिले के दो और रायगढ़ जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर रायगढ़ संसदीय सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई। इस संसदीय क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं, पेण, अलीबाग,श्रीवर्धन, महाड,, दापोली और गुहागर, यह एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है।
यहां की कुल आबादी 19,34,900 है, जिसमें से 84 प्रतिशत लोग गांवों में निवास करते हैं और 15 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं, इसके अलावा यहां 3 प्रतिशत SC और 9 प्रतिशत ST वर्ग के लोग हैं। चावल और नारियल यहां की प्रमुख फ़सलें हैं। यहां कि अधिकांश आबादी मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर है। जल परिवहन, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, मछुआरे की समस्याएं, सिंचाई, पेयजल की समस्या, रोजगार, किसानों की जमीन, शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं यहां के प्रमुख मुद्दे हैं। संसदीय सीट बनने के बाद यहां पहली बार आम चुनाव साल 2009 में हुआ था, जिसे कि शिवसेना नेता अनंत गीते ने जीता था और तब से ही उनका इस सीट पर राज है।
अनंत गीते केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यमिता मंत्री का पद भी संभाला है। शिवसेना में रहते हुए उन्होंने अनेक पदों पर काम किया है वह अब तक भारतीय संसद में छह बार निर्वाचित हो चुके हैं, इससे पहले वो 1996, 1998, 1999 और 2004 में रत्नागिरी संसदीय क्षेत्र से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर NCP, नंबर 3 पर PWPI और नंबर 4 पर बसपा थी। उस साल यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 15,32,781 थी, जिसमें से मात्र 9,87,766 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 4,85,586 और महिलाओं की संख्या 5,02,180 थी।
कोकण की छह संसदीय सीटों में से एक रायगढ़ छत्रपति शिवाजी महाराज के विरासत की राजधानी कही जाती है। शिवाजी महाराज को आदर्श मानने वाली शिवसेना के सामने इस बार अपना गढ़ बचाने की कड़ी चुनौती है तो वहीं राकांपा और उसके सहयोगियों की पूरी कोशिश इस सीट पर जीत दर्ज करने की है, वैसे भी साल 2014 का चुनाव एनसीपी बहुत कम वोट के अंतर से हारी थी इसलिए वो और उसके सहयोगी दल यहां पर इस बार कोई गलती नहीं करना चाहेंगे, आपको बता दें कि इस बार का लोकसभा चुनाव कांग्रेस और एनसीपी दोनों साथ मिलकर लड़ रहे हैं, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यहां मुकाबला जबरदस्त होगा, देखते हैं रायगड की जनता इस बार किसको अपनी सत्ता सौंपती है और कौन यहां का सरताज बनेगा।
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