लोकसभा चुनाव 2019: पोरबंदर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: गुजरात की पोरबंदर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के विट्ठल रादडिया हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर एनसीपी प्रत्याशी कांधल जडेजा को 267,971 वोटों से पराजित किया था। विट्ठल रादडिया को इस चुनाव में 508,437 वोट मिले थे जबकि कांधल जडेजा को 240,466 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। वहीं 121,80 वोटों के साथ इस सीट पर बसपा के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे थे।

पोरबंदर लोकसभा सीट का इतिहास
पोरबंदर संसदीय क्षेत्र में साल 1977 में पहला आम चुनाव हुआ था, जिसे भारतीय लोकदल ने जीता था। साल 1980 और 1984 में यहां पर कांग्रेस का राज रहा था तो वहीं 1989 का चुनाव यहां पर जनता दल ने जीता। साल 1991 के चुनाव में यहां पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की और उसके बाद साल 2004 तक यहां पर बीजेपी का ही राज रहा और गोर्धन भाई जाविया यहां से लगातार तीन बार सांसद चुने गए, साल 2009 के चुनाव में यहां से विट्ठल रादडिया कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए, साल 2013 में यहां उपचुनाव हुआ, जिसे भी विट्ठल रादडिया ने ही जीता लेकिन इस बार वो भाजपा के टिकट पर यहां से विजयी हुए थे और उनके जीत का क्रम साल 2014 के चुनाव में भी बरकरार रहा।
विट्ठल रादडिया का लोकसभा में प्रदर्शन
पोरबंदर सीट पर विट्ठल रादडिया का भारी दबदबा है, वो लगातार तीन बार यहां से विजयी हुए हैं। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक विट्ठल रादडिया की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति मात्र 15 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने ना तो ससंद में एक भी डिबेट में हिस्सा लिया है और ना ही एक भी प्रश्न पूछा। रादडिया का ये रिकार्ड किसी भी लिहाज से अच्छा नहीं है। साल 2014 के चुनाव में यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 15,39,223 थी, जिसमें से मात्र 8,09,433 ने अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया था, जिसमें पुरूषों की संख्या 4,71,495 और महिलाओं की संख्या 3,37,938 थी।
पोरबंदर, एक परिचय-प्रमुख बातें-
पोरबंदर गुजरात का बंदरगाह वाला एक प्राचीन शहर है, कटिहार के तट पर स्थित यह शहर आमतौर पर गांधी जी के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। पोरबंदर का निर्माण जूनागढ़ से हुआ था। पोरबंदर में बापू के जीवन से जुड़े कई स्थान हैं जो आज दर्शनीय स्थलों में बदल चुके हैं। 10वीं शताब्दी में पोरबंदर को 'पौरावेलाकुल' कहा जाता था और बाद में इसे 'सुदामापुरी' भी कहा जाने लगा क्योंकि भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह स्थान कृष्ण के मित्र सुदामा का जन्म स्थान है। 16 वीं सदी में पोरबंदर मुगलों के अधीन था, बाद में, यह ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया। भारत की आजादी के दौरान, काठियावाड़ के संयुक्त राज्य' के एक भाग के रूप में, पोरबंदर गुजरात के राज्य के रूप में भारत में शामिल हो गया।बहुत सारी ऐतिहासिक इमारतों और गौरवशाली इतिहास को संजोए इस शहर की आबादी 21,12,269 है, जिसमें से 60 प्रतिशत आबादी गांवों में और 39 प्रतिशत शहरों में रहती है। यहां की जनसंख्या में 10 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 1.71 प्रतिशत लोग अनुसूचित वर्ग के हैं।
पोरबंदर में सबसे ज्यादा निर्णायक भूमिका में मेहर जाति के वोटर हैं, इसके अलावा मछुआरे और लोहाना समुदाय के लोग भी निर्णायक वोटों की श्रेणी में आते हैं। यहां पर सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के ही बीच में हैं, इस बार के चुनाव में जहां कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टी की पूरी कोशिश इस सीट को जीतने की होगी, वहीं दूसरी ओर भाजपा का पूरा प्रयास इस सीट पर अपने प्रभुत्व को बचाए रखने का होगा लेकिन शह और मात के इस खेल में जीतेगा वो ही जिसे यहां की जनता का साथ मिलेगा और वो किसके साथ है, इसका खुलासा तो चुनावी नतीजे करेंगे।
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