लोकसभा चुनाव 2019: पश्चिमी दिल्‍ली लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: दिल्ली की पश्चिमी दिल्‍ली लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद परवेश साहेब सिंह वर्मा हैं। पश्चिमी दिल्‍ली हरियाणा के झज्जर जिले से लगा हुआ है, और यहां पंजाबियों की संख्‍या बहुत अधिक है। घनी आबादी वाले इस संसदीय क्षेत्र के पोलिंग रजिस्‍टर के अनुसार 2014 में यहां से 2,039,410 लोगों का नाम दर्ज था, जिनमें 1,108,886 पुरुष और 930,524 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से कुल 66 फीसदी लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया और परवेश वर्मा को बतौर सांसद चुना। भाजपा के साहेब सिंह ने आम आदमी पार्टी के जरनैल सिंह को 268,586 वोटों से हराया।

profile of West Delhi lok sabha constituency

पश्चिमी दिल्‍ली लोकसभा सीट का इतिहास
पश्चिमी दिल्‍ली लोकसभा सीट का इतिहास बहुत बड़ा नहीं है। यह सीट 2008 में हुए परिसीमन के दौरान अस्तित्व में आयी। इस सीट पर पहली बार 2009 में लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस के महाबल मिश्रा यहां के सांसद ब ने। उस दौरान महाबल मिश्रा का वोट प्रतिशत 54.32 फीसदी था, जबकि भाजपा को 39.7 फीसदी वोट मिले थे। 2014 में आम आदमी पार्टी ने आकर दोनों पार्टियों का खेल बिगाड़ दिया। भाजपा जिसे पचास प्रतिशत से अधिक वोटों की आशा थी, उसका वोट प्रतिशत 48.3 रहा। वहीं कांग्रेस का वोट प्रशित गिर कर 14.33 हो गया। और आम आदमी पार्टी ने दोनों पार्टियों के वोटों पर सेंध मारते हुए 28 फीसदी वोट जुटा लिये। दिल्ली से अगर आपको फर्नीचर या रूम डेकोर से जुड़े आइटम खरीदने हैं तो पश्चिमी दिल्ली के कीर्ति नगर जाइये। पौश इलाकों की सैर करनी हो तो पीतमपुरा, रोहिणी, पटेल नगर और राजौरी गार्डन हैं और तो और एक से एक फाइव स्‍टार होटलों से लेकर तमाम इंटरनेशनल ब्रांड के रेस्‍तरां, व कपड़ों के शोरूम आपके दिल को छू जायेंगे।
परवेश वर्मा का लोकसभा प्रदर्शन
पहली बार संसद पहुंचे परवेश वर्मा ने 2014 से लेकर दिसंबर 2018 तक 176 सवाल पूछे। जबकि राज्‍य का औसत 290 और राष्‍ट्रीय औसत 273 था। उन्‍होंने तीन प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्‍तुत किये और कुल 18 डिबेट्स में भाग लिया। डिबेट के मामले में राज्‍य का औसत 61.7 और राष्‍ट्रीय औसत 63.8 रहा। वैसे साल 2019 के चुनाव में इस बार भी मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। दिल्‍ली में शासन कर रही आम आदमी पार्टी पहले ही लोगों को संतुष्‍ट करने में जुटी हुई है, वहीं केंद्र में मोदी सरकार भी मीडियम क्लास परिवारों के लिये एक से एक तोहफ दे चुकी है। ऐसे में भाजपा और आप पार्टी को अपने काम के दम पर वोट मिलने की आशा है। वहीं कांग्रेस निरंतर लोगों के करीब जाने की जुगत लगा रही है।

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