Konrad Sangma: कभी विपक्ष के नेता रहे तो कभी यूथ कांग्रेस अध्यक्ष, अब लगातार दूसरी बार CM बने कोनराड संगमा
कोनराड संगमा मेघालय के लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। पिता पीेए संगमा के निधन के बाद उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी की कमान संभाली और पार्टी को नई ऊंचाईयों पर लेकर गए।

Konrad Sangma: मेघालय में नई सरकार का गठन हो गया है। कोनराड संगमा ने एक बार फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। कोनराड संगमा लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। कोनराड संगमा के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित शीर्ष नेता शामिल हुए। कोनराड संगमा को प्रदेश के राज्यपाल फागू चौहान ने शपथ दिलाई। कोनराड संगमा की बात करें तो वह नेशनल पीपुल्स पार्टी के मुखिया हैं और प्रदेश में लगातार दूसरी बार और प्रदेश के 12वें मुख्यंत्री बने हैं।
पिता पूर्व लोकसभा स्पीकर
कोनराड संगमा का जन्म 27 जनवरी 1978 को हुआ था, उनके पिता पीए संगमा लोकसभा के स्पीकर रह चुके है। कोनराड संगमा 2016 से 2018 के बीच तुरा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। कोनराड संगमा प्रदेश सरकार में वित्त, पर्यावरण, ऊर्जा मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल चुके हैं। वह मेघालय विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। इसके अलावा नेशनल यूथ कांग्रेस के वह राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।
राजनीतिक सफर
कोनराड संगमा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1990 में राजनीति में अपना कदम रखा। उन्होंने अपनी शुरुआत अपने पिता के प्रचार मैनेजर के तौर पर की थी। 2004 में कोनराड संगमा ने पहली बार चुनाव लड़ा था, जिसमे उन्हें 182 वोट से हार का मुंह देखना ड़ा था। पहली बार प्रदेश में 2008 में जीते थे। कोनराड अपने भाई जेम्स के साथ ही विधानसभा पहुंचे थे। दोनों ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। कोनराड प्रदेश में कई अहम कैबिनेट का जिम्मा संभाल चुके हैं। जिसमे फाइनेंस, पॉवर, टूरिज्म, जीएडी, आईटी शामिल हैं। इसके अलावा 2009 से 2013 के बीच वह विपक्ष के नेता रहे। पिता के निधन के बाद मार्च 2016 में वह नेशनलिस्ट पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
नई सरकार का गठन
संगमा की पार्टी एनपीपी लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है। प्रदेश की कुल 60 विधानसभा सीटों में से 26 पर एनपीपी ने जीत दर्ज की है। पिछले चुनाव की बात करें तो एनपीपी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन दूसरे दलों के साथ गठबंधन करके पार्टी ने 34 विधायकों के समर्थन से प्रदेश में सरकार का गठन किया और इसे चलाया। इस बार एनपीपी ने 26 सीटों पर जीत दर्ज की और युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के 11 विधायकों ने जीत दर्ज की। वहीं भाजपा के 3, एचएसपीडीपी ने 2, पीडीएफ ने 2 और 2 निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर नई सरकार का गठन किया गया है। नई सरकार के गठन में 46 विधायक साथ हैं।












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