लोकसभा चुनाव 2019: हिंगोली लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की हिंगोली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता राजीव शंकरराव सातव सांसद हैं। साल 2014 के चुनाव में उन्होंने इस सीट पर शिवसेना के दिग्गज नेता सुभाष वानखेड़े को मात्र 1632 वोटों से हराया था। राजीव शंकरराव सातव को यहां 46,73,97 वोट मिले थे, तो वहीं सुभाष वानखेड़े को 46,57,65 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। हार के अंतर से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस सीट पर सही में कांटे की टक्कर थी, जिसमें बाजी कांग्रेस के हाथ लगी। साल 2014 के चुनाव में नंबर 2 शिवसेना और नंबर 3 BSP थी। उस साल यहां कुल मतदाताओं की संख्या 15,86,194 थी, जिसमें से मात्र 10,51,164 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 5,76,774 और महिलाओं की संख्या 4,74,390 थी। यहां कि 73 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म में और 10 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में भरोसा रखते हैं।

हिंगोली लोकसभा सीट का इतिहास
साल 1991 के चुनाव में यहां पर शिवसेना का परचम लहराया और साल 1996 के चुनाव में भी उसी का राज रहा लेकिन 1998 के चुनाव में एक बार फिर यहां पर कांग्रेस ने वापसी की और सूर्यकांता पाटिल यहां से सांसद चुनी गईं लेकिन इसके एक साल बाद ही हुए चुनाव में शिवसेना ने इस सीट पर जोरदार वापसी की लेकिन साल 2004 के चुनाव में कांग्रेस ने उससे अपनी हार का बदला ले लिया लेकिन साल 2009 के चुनाव में एक बार फिर कामयाबी शिवसेना के हाथ लगी और सुभाष वानखेड़े यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे लेकिन साल 2014 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजीव शंकरराव सातव ने हरा दिया। मोदी लहर में शिवसेना का जीती हुई सीट पर हारना शिवसेना और भाजपा के लिए करारा झटका थी। आपको बता दें कि साल 2014 का लोकसभा चुनाव भाजपा और शिवसेना ने साथ मिलकर लड़ा था।
हिंगोली , परिचय-प्रमुख बातें-
महाराष्ट्र के प्राचिन शहरों में से एक हिंगोली जिले की आबादी 22 लाख 92 हजार 61 है, जिसमें से 87 प्रतिशत लोग गावों में और 12 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं। यहां पर 15 प्रतिशत आबादी sc वर्ग की और 13 प्रतिशत लोग ST समुदाय के भी हैं। इस संसदीय क्षेत्र के अंतरगत 6 विधानसभा सीटें आती हैं। साल 1977 में पहली बार ये लोकसभा सीट अस्तित्व में आयी और 1977 में यहां पहली बार आम चुनाव हुए थे, जिसे कि चंद्रकांत पाटिल ने जनता पार्टी के टिकट पर जीता था। साल 1980 के चुनाव में पहली बार यहां कांग्रेस जीती और उसके बाद 1984, 1989 और 1989 तक यहां पर कांग्रेस का शासन रहा और उत्तम राठौड़ यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे।
राजीव शंकरराव सातव पूर्व मंत्री रजनी सातव के पुत्र हैं। सांसद बनने से पहले उन्होंने जिला परिषद सदस्य से लेकर कलमनुरी के विधायक तक का सफर तय किया है, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में सातव की उपस्थिति 81 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 201 डिबेट में हिस्सा लिया है और 1018 प्रश्न पूछे हैं। हिंगोली लोकसभा सीट पर शुरू से ही कांग्रेस और शिवसेना के बीच में जंग होती आई है, हालांकि साल 2014 के चुनाव में शिवसेना जीतते-जीतते हार गई थी और इस वजह से वो इस बार इस सीट को जीतने के लिए हर संभव प्रयास करेगी तो वहीं कांग्रेस की पूरी कोशिश इस सीट को अपने पास बचाकर रखने की होगी, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि शिवसेना और कांग्रेस के ही बीच हर बार की तरह इस बार भी यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।












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