2017 के न्यूजमेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार, राजनीतिक दांव से चौंकाया
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पटना। 2017 की शुरुआत ही ऐसी घटना से हुई जिसमें नीतीश कुमार के इस साल के न्यूजमेकर बनने का राज छिपा था। पटना में आयोजित प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक दूसरे से गुफ्तगू करते दिखे। इसके बाद मकर संक्रांति पर नीतीश ने भाजपा के नेताओं को भोज पर बुलाया। इन सब घटनाओं से कयासबाजी शुरू हुई कि क्या संघ मुक्त भारत का नारा देने वाले नीतीश कुमार अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही भाजपा के करीब आने में लगे हैं जिनके खिलाफ वे चुनाव लड़े और जीते थे। आपको याद होगा कि 2013 में नरेंद्र मोदी के 2014 लोकसभा चुनाव के पीएम उम्मीवार घोषित होने के साथ ही नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे।

2017 में नीतीश के नए राजनीतिक तेवर
2017 के मार्च में उत्तर प्रदेश में भाजपा की भारी जीत के बाद बिहार की राजनीति भी करवट लेने लगी और लालू-नीतीश के बीच बढ़ती दूरियों से महागठबंधन की दीवारें दरकने लगी। इसको लेकर कयासबाजी तो थी कि लालू-नीतीश का महागठबंधन टूट जाएगा लेकिन इतनी जल्दी टूटेगा ये किसी को अंदाजा नहीं था।

नीतीश बने न्यूजमेकर
महागठबंधन से अलग होकर एनडीए का दामन फिर थामने का नीतीश कुमार का राजनीतिक दांव चौंकाने वाला था क्योंकि भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलकर वे चुनाव लड़े थे। यू टर्न लेने के राजनीतिक दांवपेच से सीएम की कुर्सी पर फिर काबिज हुए नीतीश कुमार 2017 के न्यूजमेकर बने।

महागठबंधन में नीतीश की मुश्किलें
2015 के आखिरी महीनों में हुए बिहार चुनाव में भाजपा नीत एनडीए के खिलाफ लालू के राष्ट्रीय जनता दल के साथ महागठबंधन बनाकर नीतीश ने 243 सीटों में 178 सीटें झटककर सरकार बना ली। राजद को 80 सीटें मिली थीं जबकि जेडीयू के खाते में 71 सीटें आईं। महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार तो सीएम बने लेकिन उप मुख्यमंत्री का पद लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को देना पड़ा। लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव स्वास्थ्य मंत्री बने। साथ ही बड़ी पार्टी होने की वजह से राजद का इस सरकार में दबदबा ऐसा रहा कि सीएम नीतीश कुमार को समस्या होने लगी।

भाजपा भी एक कदम बढ़ी आगे
इसी बीच, मई 2017 में चारा घोटाले मामले में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट ने झटका देते हुए कहा कि उनके खिलाफ केस चलेगा। इसके ठीक बाद बिहार में भाजपा नेता सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को समर्थन का ऑफर दिया। फिर, सुशील मोदी लगातार लालू कुनबे के घोटालों को उजागर करने में लग गए। उधर नीतीश कुमार ने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को सपोर्ट दिया। बेनामी संपत्ति मामले में लालू का परिवार फंसा तो उप मुख्यमंत्री तेजस्वी के इस्तीफे की मांग उठने लगी। तेजस्वी ने इस्तीफा नहीं दिया तो तनातनी बढ़ी और नीतीश कुमार ने गठबंधन तोड़कर एनडीए के साथ सरकार बना ली जिसमें सुशील मोदी उप-मुख्यमंत्री बने। राजद के साथ चुनाव लड़कर बिहार में विजयी होने और फिर मौका मिलने पर राजद का साथ छोड़ एनडीए के साथ जाने की चतुर राजनीतिक चाल की वजह से नीतीश कुमार 2017 के न्यूजमेकर बन गए।

बगावती बने शरद को भी 'निपटाया'
एनडीए के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के कदम से जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव, पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से खफा हो गए तो उनके बगावती तेवर को देख पहले उनको संसदीय दल के नेता पद से हटाया गया। इसके बाद पार्टी में दो फाड़ हो गया। शरद यादव और उनका साथ दे रहे अली अनवर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म कर दी गई। इस तरह नीतीश कुमार ने बागी हुए दिग्गज शरद यादव से भी निपटने में कामयाब होकर 2017 में पार्टी पर अपनी पकड़ बनाई और राजनीतिक स्थिति मजबूत कर अपना कद बढ़ाया।












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