लोकसभा चुनाव 2019: कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भारतीय जनता पार्टी के नेता राज कुमार सैनी हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में आईएनएलडी के बलबीर सिंह सैनी को 129,736 वोटों के अंतर से हराया। हालांकि इस जीत को लोगों ने मोदी लहर का भी नाम दिया। क्योंकि दो बार से कांग्रेस इस सीट पर जीतती आ रही थी। 2014 के आम चुनाव में यहां कुल 1,498,459 लोगों का नाम मतदाता सूची में था, जिनमें से 1,135,892 लोगों ने वोट दिया। यहां कुल वोट प्रतिशत 76 फीसदी रहा। जिनमें 618,607 पुरुष और 517,285 महिलाएं शामिल थीं। कुरुक्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक परिदृश्य को देखें तो यहां के अधिकांश लोगों का जीवन कृषि पर निर्भर है। यहां की 75 फीसदी जनता गांवों में रहती है, जबकि बाकी के 25 प्रतिशत लोग शहरी इलाकों में। कुल मिलाकर यहां की जनता का जीवन सरकार की किसानों पर बनायी जाने वाली नीतियों और मौसम पर निर्भर करता है।

कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट का इतिहास
पिछले लोकसभा चुनावों पर नज़र डालें तो 1989 से अब तक इस सीट पर पांच पार्टियां शासन कर चुकी हैं। 1989 में जनता दल, 1991 में कांग्रेस पार्टी, 1996 में हरियाणा विकास पार्टी और 1998 में आईएनएलडी ने इस सीट पर दर्ज की। आईएनएलडी की कैलाशो देवी ने ओपी जिंदल को हराकर दो बार लगातार जीत दर्ज की, लेकिन 2004 में ओपी जिंदल के बेटे नवीन जिंदल ने कैलाशो देवी को सीट से बेदखल कर दिया। 2009 में भी नवीन जिंदल ने कुरुक्षेत्र से शानदार जीत दर्ज की, लेकिन 2014 में वे इस सीट को बचाने में कामयाब नहीं हो पाये। उनके वोटबैंक का करीब 36 प्रतिशत हिस्सा भाजपा की ओर खिसक गया और वे हार गये। जिंदल के राजनीतिक करियर की दृष्टि से ये परिणाम काफी खराब रहे। दो बार सांसद रहने के बाद वे 2014 में तीसरे स्थान पर रहे।
राज कुमार सैनी का लोकसभा में प्रदर्शन
राज कुमार सैनी ने सांसद के तौर पर दिसम्बर 2018 तक कुल 23 डिबेट में हिस्सा लिया। जबकि राज्य का औसत 58.5 और राष्ट्रीय औसत 63.8 का रहा। वहीं इस दौरान उन्होंने सदन में मात्र 53 प्रश्न पूछे। जबकि हरियाणा के ही अन्य सांसदों का औसत 250 प्रश्नों का रहा और राष्ट्रीय औसत 273 प्रश्नों का। सैनी ने लोकसभा में कुल 84 प्रशितत अटेंडेंस दर्ज करायी।
वहीं 2019 की बात करें तो कुरुक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 9 विधानसभा सीटों में से 5 सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि दो पर निर्दलीय विधायकों का कब्जा है। और एक-एक सीट कांग्रेस और आईएनएलडी के पास है। अब अगर इनका वोट-बैंक उन्हीं की पार्टी के 2019 में खड़े होने वाले प्रत्याशी की ओर झुकाव रखता है, तो कुरुक्षेत्र सीट पर कांटे की टक्कर दिख सकती है। क्योंकि सैनी की जीत केवल उनकी परफॉरमेंस पर निर्भर नहीं करेगी, उनके वोटबैंक पर खट्टर सरकार का भी असर हो सकता है। यह असर पॉजिटिव होगा या निगेटिव यह जल्द पता चल जायेगा।












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