लोकसभा चुनाव 2019: चूरू लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान की चूरू लोकसभा सीट से वर्तमान सांसद भाजपा के राहुल कास्वां हैं। राहुल कास्वां ने 2014 के चुनाव में बसपा के अभिनेश महर्षि को 29,47,39 वोटों से हराकर बड़ी जीत हासिल की थी। राजस्थान के प्राचिन जिलों में से एक चुरू को 'थार मरुस्थल' का द्वार कहा जाता है। चूरू की स्थापना 1620 ई. में चूहरू जाट ने की थी, यहां कई ऐतिहासिक किले हैं, जो कि राजस्थान के राजपूतों की गौरव गाथा को बखूबी बयां करते हैं, यह राजस्थान के दर्शनीय स्थलों में से एक है, यहां की कुल आबादी 27 लाख 49 हजार 150 है, जिसमें से 73 प्रतिशत लोग गांवों में और 26 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

profile of Churu lok sabha constituency

चुरू लोकसभा सीट का इतिहास

चुरू जिला शेखावटी रीजन में आता है और इस संसदीय सीट का स्वंतंत्र रूप से गठन 1977 में हुआ था, तब यहां पर जनता पार्टी की जीत हुई थी और दौलतराम सारण यहां से सांसद चुने गए थे। साल 1980 के चुनाव में भी दौलतराम यहां से एमपी चुने गए लेकिन इस बार वो जनता पार्टी सेकूलर के उम्मीदवार थे। साल 1984 और 85 के चुनाव में यहां कांग्रेस का राज हुआ लेकिन 1989 के चुनाव में यहां जनता दल के टिकट पर एक बार फिर से दौलतराम सारण ही सांसद की कुर्सी पर बैठे। साल 1991 के चुनाव में पहली बार यहां पर भारतीय जनता पार्टी जीती और राम सिंह कास्वां सांसद चुने गए लेकिन साल 1996 के चुनाव में यहां कांग्रेस जीत गई और 1998 में भी यहां पंजे का ही शासन रहा। लेकिन 1999 के चुनाव में एक बार फिर से यहां कमल खिला और राम सिंह कास्वां सांसद की सीट पर विराजमान हुए और वो साल 2004 और साल 2009 मे भी यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे। साल 2014 के चुनाव में भी यहां भाजपा जीती और राम सिंह कास्वां के बेटे राहुल कास्वां यहां से सांसद चुने गए।

राहुल कास्वां का लोकसभा में प्रदर्शन

राहुल कास्वां राजस्थान के सबसे कम उम्र के एमपी हैं, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल कास्वां की 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 95 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने 120 डिबेट में हिस्सा लिया और 425 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर बसपा, नंबर 3 पर कांग्रेस और नंबर 4 पर आप थी। उस साल यहां कुल वोटरों की संख्या 17 लाख 18 हजार 421 थी, जिसमें से मात्र 12 लाख 56 हजार 806 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया, जिनमें पुरुषों की संख्या 6 लाख 81 हजार 63 और महिलाओं की संख्या 5 लाख 75 हजार 743 थी।

चारू लोकसभा सीट पर हमेशा से से ही जाटों का दबदबा रहा है, दल चाहे जो भी हो, हर बार जीत यहां जाट नेता की हुई है, इसके पीछे कारण जाट वोटरों की जागरूकता है, जो कि वोटों का ध्रुवीकरण होने से रोकते हैं। इसलिए बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों की कोशिश यहां जाट वोटरों को ही आकर्षित करने की होती है। फिलहाल इस वक्त यहां लंबे वक्त से भाजपा की सत्ता है लेकिन क्या ये राज इस बार भी यहां कायम रहेगा, ये एक बड़ा सवाल है क्योंकि इस वक्त राज्य में भाजपा विरोधी लहर है, जिसके चलते भाजपा सूबे की सत्ता से बाहर हो गई है तो वहीं कांग्रेस आत्मविश्वास से भरी हुई है और वो इस सीट को जीतने के लिए हर संभव प्रयास करेगी, देखते हैं कि वर्चस्व की इस लड़ाई में चूरू की लोकसभा सीट पर किसका कब्जा होता है।

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