लोकसभा चुनाव 2019: छोटा उदयपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: गुजरात की छोटा उदयपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के राम सिंह राठवा हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के नरेनभाई राठवा को 179, 729 वोटों से पराजित किया था। राम सिंह राठवा को इस सीट पर 607, 916 वोट मिले थे, तो वहीं नरेनभाई राठवा को मात्र 428, 187 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। जबकि इस सीट पर नंबर तीन की पोजिशन पर आप प्रत्याशी थे जिनको 231, 16 वोट हासिल हुए थे। आपको बता दें कि छोटा उदयपुर लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित है।

profile of Chhota Udaipur lok sabha constituency

छोटा उदयपुर लोकसभा सीट का इतिहास

छोटा उदयपुर लोकसभा सीट पर पहला आम चुनाव साल 1977 में हुआ, जिसे कांग्रेस ने जीता और तब से लेकर लगातार 7 बार इस सीट पर कांग्रेस का ही राज रहा और अमर सिंह राठवा लगातार 3 बार और उसके बाद नरेनभाई राठवा यहां से चार बार जीतकर लोकसभा पहुंचे। अमर सिंह राठवा 1977, 1980 और 1984 में यहां से सांसद बने और 1989, 1991, 1996 और 1998 में यहां से नरेनभाई राठवा यहां के सांसद पद पर रहे हैं। कांग्रेस की विजय यात्रा पर ब्रेक लगाया भारतीय जनता पार्टी ने 1999 में, जब उसने यहां पर बंपर जीत दर्ज की और राम सिंह राठवा यहां से सांसद चुने गए। हालांकि साल 2004 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई और नरेनभाई राठवा यहां के सांसद की कुर्सी पर फिर से बैठे लेकिन साल 2009 के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से अपनी हार का बदला ले लिया और एक बार फिर से यहां से राम सिंह राठवा विजयी हुए और उनका राज साल 2014 में भी बरकरार रहा।

राम सिंह राठवा का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक सांसद राम सिंह राठवा की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 89 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 28 डिबेट में हिस्सा लिया है और 482 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 15,36,305 थी, जिसमें से मात्र 11,00,542 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,93,192 और महिलाओं की संख्या 5,07,350 थी।

छोटा उदयपुर , एक परिचय-प्रमुख बातें-

गुजरात प्रांत का छोटा उदयपुर जिला अपने अंदर बहुत सारी सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है, आजादी के पहले छोटा उदयपुर एक देसी रियासत हुआ करती थी, उदयसिंह रावल ने सन् 1743 में इसकी नींव रखी थी, उदयसिंह रावल चंपानेर के पटवाई रावल के वंशज थे, 10 मार्च, 1948 को ये आजाद भारत का हिस्सा बन गया, यहां के खूबसूरत घर यहां की पहचान है, मिट्टी के कच्चे घरों पर यहां लोग पिथौड़ा पेंटिंग बनवाते हैं, जो कि यहां की खासियत है। छोटे लेकिन बेहद शांत और सुंदर जिले वाले इस जिले कि आबादी 22,90,199 है, जिसमें 86 प्रतिशत लोग गांवों में और 13 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं, यहां 3 प्रतिशत आबादी एससी वर्ग की और 56 प्रतिशत आबादी एसटी वर्ग की है।

छोटा उदयपुर पर कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था लेकिन पिछले दस सालों से यहां पर कांग्रेस जीत के लिए तरस गई है लेकिन गुजरात विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन की वजह से उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ा है और इसी वजह से उसकी पुरजोर कोशिश यही होगी कि इस बार के चुनाव में वो इस सीट पर कब्जा करे तो वहीं भारतीय जनता पार्टी के ऊपर दवाब अपनी सीट को अपने पास बचाकर रखने का होगा। लेकिन शह और मात के इस जंग में जीतेगा वो ही जिसे यहां की जनता चुनेगी और उसका फैसला क्या है इसके लिए हमें चुनावी नतीजों का इंतजार करना होगा।

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