लोकसभा चुनाव 2019: औरंगाबाद लोकसभा सीट के बारे में जानिए
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नई दिल्ली: बिहार की औरंगाबाद लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के सुशील कुमार सिंह हैं। उन्होंने साल 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता निखिल कुमार को 66347 वोटों से हराया था। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 पर जेडीयू और नंबर 4 पर बीएसपी थी। अपने सूर्य मंदिर के लिए पूरे भारत में मशहूर औरंगाबाद में लोकसभा चुनाव का दंगल हमेशा रोचक होता है। मिनी चितौड़गढ़ के नाम से प्रख्यात इस सीट पर देश के नेताओं की निगाहें टिकी होती है, यहां राजपूतों की संख्या काफी है इसी कारण इस सीट पर राजपूतों का कब्जा बरकरार रहा।

औरंगाबाद लोकसभा सीट का इतिहास
मगध का ये जिला नक्सलियों के लिए भी काफी बदनाम रहा है। 6 विधानसभा सीटों को समेटे इस लोकसभा क्षेत्र में 1957 के आम चुनाव में कांग्रेस ने जीत का झंडा गाड़ा था और सत्येंद्र नारायण सिंह यानी छोटे साहब यहां से सांसद बने थे। साल 1961 के चुनाव में यहां से स्वतंत्र पार्टी ने चुनाव जीता था। साल 1967 और 1961 के चुनाव में फिर से यहां कांग्रेस की जीत हुई तो वहीं 1977 के चुनाव में फिर से सत्येंद्र नारायण सिंह यहां से सासंद चुने गए लेकिन इस बार वो कांग्रेस से नहीं बल्कि जनता पार्टी से के टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। साल 1980 और 1984 के चुनावों में भी उनका ही राज रहा लेकिन साल 1984 का चुनाव उन्होंने वापस कांग्रेस के टिकट पर ही लड़ा था। 1989 के चुनाव में यहां जनता दल ने जीत के साथ खाता खोला और उसकी बादशाहत 1991 और 1996 तक यहां कायम रही लेकिन 1998 के चुनाव में इस सीट पर समता पार्टी जीत गई तो 1999 और 2004 में यहां कांग्रेस का राज रहा और निखिल कुमार यहां से सांसद चुने गए लेकिन साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस से ये सीट जेडीयू ने छीन ली। वहीं साल 2014 के चुनावों में यहां कमल खिला और भाजपा के सुशील कुमार सिंह यहां से सांसद चुने गए। खास बात ये है कि सुशील कुमार सिंह इससे पहले जेडीयू में थे लेकिन मोदी लहर के दौरान ये भाजपा में चले गए और बीजेपी के टिकट पर औरंगाबाद में जीत दर्ज की।
सुशील कुमार सिंह का लोकसभा में प्रदर्शन
दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 90 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने 79 डिबेट में हिस्सा लिया और 435 प्रश्न पूछे। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां वोटरों की संख्या 15 लाख 89 हजार 393 थी, जिसमें से केवल 9 लाख 82 हजार 933 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था। इसमें वोट डालने वालें पुरुषों की संख्या 5,54,669 और महिलाओं की संख्या 4,28,264 थी। औरंगाबाद की कुल जनसंख्या 26,08,260 है जिसमें से 93 प्रतिशत आबादी गांवों में और 6 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।
वैसे परिसीमन के बाद औरंगाबाद का जातीय समीकरण कुछ बदला है और आज यहां गैरराजपूत भी मजबूत चुनौती खड़ी कर रहे हैं। इस इलाके में कुशवाहा जाति बड़े पैमाने पर है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में यादव, कुशवाहा और राजपूत की आबादी लगभग बराबर हो गयी है और मुस्लिम लोगों की स्थिति भी मजबूत है, ऐसे में यहां इस बार पासा पलट भी सकता है। वैसे वर्ष 2014 के चुनाव में राजद और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े थे और जदयू और भाजपा अलग-अलग लेकिन इस बार दोनों साथ हैं, ऐसे में इस बार कांग्रेस के लिए फिर से इस सीट पर मु्श्किलें बढ़ सकती हैं तो वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दलों की जीत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सुशील कुमार सिंह ने अपने क्षेत्र में कितना विकास कार्य किया है और जनता उनसे कितनी संतुष्ट है क्योंकि भाजपा ने यहां विकास के ही नाम पर वोट मांगे थे।












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