'खुद को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कई बार प्रियंका गांधी से सचिन पायलट ने की थी मांग'
नई दिल्ली। राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी का सचिन पायलट को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। प्रियंका गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को प्रियंका गांधी ने कहा कि सचिन पायलट ने एक वर्ष के भीतर खुद को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कई बार कहा और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी से मिलने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि जबतक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया जाता है वह उनसे नहीं मिलना चाहेंगे। दरअसल सचिन पायलट के खेमे से एक बयान सामने आया था जिसमे कहा गया था कि सचिन पायलट ने मंगलवार को प्रियंका गांधी से फोन पर बात की थी और वह उन्हें इस बात के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे थे कि वह इस विद्रोह में उनका साथ दें, जिसके तीन घंटे बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया। सचिन पायलट के कैंप से आए इस बयान के बाद प्रियंका गांधी के करीबी सूत्रों की ओर से कहा गया है कि सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनना चाहते थे।

फोन पर नहीं बनी बात
सूत्रों की मानें तो सचिन पायलट यह चाहते थे कि प्रियंका गांधी वाड्रा सार्वजनिक तौर पर इस बात की घोषणा करें कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, यही वजह है कि वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी से तबतक नहीं मिलना चाहते थे, जबतक कि उन्हें इस बात का भरोसा दिया जाए कि उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। यही वजह है कि इसके बाद इस पूरी डील की जानकारी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दी गई और सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया, साथ ही उन्हें प्रदेश यूनिट के मुखिया पद से भी हटा दिया गया।
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कोर्ट पहुंचा मामला
बता दें कि सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पायलट और 18 बागी विधायकों को अयोग्यता का नोटिस थमा दिया। साथ ही उनसे तीन दिन के अंदर जवाब देने को कहा गया था। जिस पर पायलट खेमे ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस मामले की शुक्रवार को सुनवाई हुई। लेकिन समय की कमी होने के कारण इस मामले की सुनवाई अब सोमवार को होगी।

विधानसभा अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश
सुनवाई के दौरान दौरान कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को साफ तौर पर आदेश दिया है कि मंगलवार शाम 5.30 बजे तक वो विधायकों की योग्यता रद्द करने संबंधित मामले पर कोई फैसला न लें। कांग्रेस का आरोप है कि उनके अपने ही विधायक जनता द्वारा चुनी गई सरकार को गिराना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी के व्हिप को भी मानने से इनकार कर दिया।












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