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प्रियंका गांधी लखनऊ में, मिशन यूपी के 84 घंटे में क्या कुछ करेंगी

प्रियंका गांधी
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प्रियंका गांधी

उत्तर प्रदेश का कमान संभालने के बाद पहली बार प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश पहुंच रही हैं. इसको लेकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह दिख रहा है.

प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और वेस्ट यूपी के प्रभारी बनाए गए कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे.

लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय तक प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ रोड शो करेंगी.

करीब 12 किलोमीटर की इस दूरी को तय करने का रुट चार्ट यूपी कांग्रेस ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नौ फरवरी को तय कर लिया था.

प्रियंका गांधी एयरपोर्ट से पुराने मोड के माध्यम से कानपुर रोड होते हुए आलमबाग चौराहा से लालबाग चर्च होते हुए हजरतगंज होते हुए राजभवन के सामने से, वीवीआईपी गेस्ट हाउस होते हुए लाल बहादुर शास्त्री मार्ग होते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पहुंचेंगी.

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने बताया, "इस रोड शो के लिए कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है. करीब 12 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन ओपन रथ और रास्ते में कार्यकर्ताओं से मिलने के चलते इसे पूरा करने में कम से कम छह घंटे तो लगेंगे ही."

प्रियंका गांधी के सुरक्षा में तैनात एसपीजी के लोगों ने इस रूट में बने करीब चार दर्जन मंच की सुरक्षा को अपने कब्जे में लिया है. माना जा रहा है कि अपनी यात्रा के दौरान प्रियंका गांधी कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए ओपन रथ से उतरकर मंचों पर जा सकती हैं.

कांग्रेस के राज्य पदाधिकारियों का दावा है कि रोड शो के दौरान 50 हज़ार के करीब कार्यकर्ता काफिले के पीछे पैदल ही चलेंगे. इनमें इंदिरा गांधी की वानर सेना की तर्ज पर प्रियंका सेना के सदस्य भी शामिल होंगे.

वानर सेना बाल कार्यकर्ताओं की सेना थी लेकिन प्रियंका सेना में कांग्रेस के बड़े बुर्जुग कई कार्यकर्ता शामिल हैं. प्रियंका सेना में शामिल एक सदस्य ने बताया कि 500 लोग सेना में शामिल हुए हैं. ख़ास बात ये है कि इस सेना के सदस्यों ने पिंक ड्रेस पहनी है, इसे वे महिला सम्मान से जोड़ने वाला रंग बता रहे हैं.

कांग्रेस कार्यालय पहुंचने के बाद प्रियंका गांधी देर शाम तक राज्य स्तर के पदाधिकारियों से भेंट करेंगी.

मिशन यूपी के 72 घंटे

लेकिन वे अपना मिशन यूपी 12 जनवरी से शुरू करेंगी. तीन दिनों तक वे 2019 के आम चुनावों की तैयारी के लिए करीब 42 लोकसभा सीटों पर पार्टी की ताक़त का आकलन करेंगी.

12, 13 और 14 जनवरी को प्रियंका गांधी साढ़े नौ बजे सुबह से लेकर रात के साढ़े ग्यारह बजे पार्टी कार्यालय में अलग अलग लोकसभा सीटों के विभिन्न पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगी.

प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए प्रियंका गांधी ने एक-एक घंटे का वक्त दिया है. इस मुलाकात में उनसे हर लोकसभा सीट के अधीन आने वाले नेता-पदाधिकारी शामिल रहेंगे. मोटे तौर पर माना जा रहा है कि जिला अध्यक्ष और पार्टी के दूसरी यूनिटों के अध्यक्ष और नामचीन नेताओं का चयन किया गया है.

हर एक लोकसभा सीट से करीब 15-20 उन नेताओं का चयन किया गया है जो पार्टी और संगठन के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.

प्रियंका गांधी की निजी टीम जिनमें फिलहाल चार लोगों के होने की जानकारी मिल रही है, वो भी इस मुलाकात के दौरान मौजूद रहेंगी ताकि नोट्स लेने में आसानी रहे.

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प्रियंका गांधी जब ये सब कर रही होंगी उसी वक्त ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राज्य की 38 सीटों के लिए यही प्रक्रिया किसी दूसरे कमरे में दोहरा रहे होंगे.

कांग्रेस पार्टी के मुताबिक प्रियंका गांधी के मिशन यूपी के इन 84 घंटे के लिए तैयारियां बीते एक सप्ताह से चल रही थीं, जिसमें मुलाकात करने वाले लोगों के नाम और उनकी समय सारिणी उन्हें मुहैया कराई गई है.

बाद में प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीम अपने अपने नोट्स के साथ राहुल गांधी और उनकी कोर टीम के साथ बैठेगी, जिसमें कांग्रेसी उम्मीदवारों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

ऐसे में कई जगहों पर पदाधिकारियों को बदला जाना भी तय माना जा रहा है. लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधानमंडल के नेता अजय कुमार लल्लू कहते हैं कि लखनऊ में जिस तरह से पूरे प्रदेश से कार्यकर्ता आएं, उसे देखते हुए समझना मुश्किल नहीं है कि कांग्रेस अपने दम पर भी यूपी में ताक़त बन सकती है.

कितना असर पड़ेगा

अजय कुमार लल्लू ये भी कहते हैं कि अब उन लोगों को मौका मिलेगा जो रिजल्ट देना चाहते हैं और उन स्थानीय नेताओं को किसी के सामने खुद को साबित करने की चुनौती नहीं होगी क्योंकि पार्टी आलाकमान सीधे उनपर नजर रख रहा होगा.

इस पूरी प्रक्रिया से राज्य में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है.

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हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता अभिषेक मिश्रा मानते हैं कि यूपी का कांग्रेस का संगठन वैसा है नहीं जहां से वह बीजेपी-महागठबंधन के सामने तीसरे विकल्प के तौर पर उभर सके.

वहीं भारतीय जनता पार्टी के यूपी चुनाव सह प्रभारी बनाए गए दुष्यंत गौतम कहते हैं कि कांग्रेस की स्थिति आईसीयू में पड़े मरीज जैसी है, जिसमें अब प्रियंका हो या फिर कोई और नेता, जान नहीं फूंक सकता.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का ये उत्साह वोट बैंक में तब्दील हो पाएगा. इस सवाल का भरोसे से जवाब कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता नहीं दे रहा है लेकिन ये भी सच है कि यूपी कांग्रेस में एक नया उत्साह दिख रहा है.

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