'दम है तो महिला आरक्षण अभी लागू करो, परिसीमन के हम खिलाफ', प्रियंका गांधी का BJP पर सीधा प्रहार

संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक गिरने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। अब 'INDIA' गठबंधन के दलों ने केंद्र सरकार को घेरने के लिए साझा रणनीति तैयार की है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार राजनीतिक पैंतरेबाजी छोड़कर पुराने महिला आरक्षण बिल को तुरंत प्रभाव से लागू करे। इस बीच अब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के रुख पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है।

विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी घटक दल एकजुट होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र भेजने की तैयारी में हैं। इस पत्र के जरिए पुराने महिला आरक्षण बिल को बिना किसी शर्त के लागू करने की मांग की जाएगी।

priyanka gandhi

जनता तक अपनी बात पहुंचाएगा विपक्ष

इसके साथ ही विपक्षी दल देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेंगे ताकि जनता को यह समझाया जा सके कि वे आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि सरकार की उस मंशा के खिलाफ हैं जिसके तहत आरक्षण की आड़ में देश के राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश की जा रही है। गठबंधन की बैठक में सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर सहयोगियों के समर्थन के लिए आभार भी जताया है।

प्रियंका गांधी की सीधी चुनौती

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के रुख पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह सोमवार को ही संसद में वह पुराना महिला आरक्षण विधेयक पेश करे, जिस पर पहले ही व्यापक राजनीतिक सहमति बन चुकी थी।

प्रियंका गांधी का कहना है कि विपक्ष उस बिल का तुरंत समर्थन करने के लिए तैयार है। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष संविधान की रक्षा करने और परिसीमन के जरिए रची गई साजिश को नाकाम करने में सफल रहा है। उन्होंने सरकार को ललकारते हुए कहा कि अगर मंशा साफ है, तो सोमवार को बिल लाएं और देख लें कि कौन वास्तव में महिला विरोधी है।

आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज का दिन सरकार के लिए एक 'काला दिन' है क्योंकि उन्हें पहली बार वह झटका लगा है जिसके वे हकदार थे। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि आज महिलाओं की समस्याएं और संघर्ष लगातार बढ़ रहे हैं और महिलाएं मूर्ख नहीं हैं, वे सब देख रही हैं।

प्रियंका ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब पीआर (PR) और मीडिया का शोर काम नहीं आएगा; अगर सरकार वाकई कुछ ठोस करना चाहती है, तो साल 2023 में सर्वसम्मति से पारित किए गए उस पुराने बिल को वापस लाए जिसे सभी दलों का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने मांग की कि अगर जरूरत हो तो उसमें छोटे संशोधन करके उसे इसी वक्त लागू किया जाए और महिलाओं को उनके अधिकार तुरंत दिए जाएं। प्रियंका ने सरकार को आगाह किया कि आरक्षण को अन्य मुद्दों के साथ उलझाकर महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश न की जाए, विपक्ष इस पर हर सहयोग के लिए तैयार है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि, 'हम बहुत साफ़ तौर पर कह रहे हैं, और हम यह हर मंच से कहेंगे, हम यह हर राज्य में कहेंगे-सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन की हर पार्टी यह बहुत साफ़ तौर पर कहेगी। वह 2023 का कानून वापस लाओ जो पास हुआ था; उसमें जो भी बदलाव करना चाहते हो, करो, ताकि 2029 तक उसे लागू किया जा सके- हम उसका पूरा समर्थन करेंगे।

सरकार पर बहुत ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव
उन्होंने कहा कि, 'इस सरकार के लिए हालात बदल गए हैं। उनके कामों से यह साफ़ दिखाई देता है। पहली बात तो यह कि उन पर बहुत ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव है। वे जो भी कदम उठा रहे हैं- जैसा कि मेरे भाई ने कई बार कहा है- मुझे नहीं लगता कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ की गई डील की शर्तें स्वीकार करता, जब तक कि उस पर बहुत ज़्यादा दबाव न होता। जनता कई तरह की समस्याओं से जूझ रही है; गैस, फल, सब्ज़ियों-हर चीज़ के दाम बढ़ गए हैं। इसका बोझ महिलाओं के कंधों पर है। वे अपने महिला मोर्चा को जिसके भी घर के सामने ले जाना चाहें, ले जा सकते हैं। वे जितना चाहें, उतना तमाशा कर सकते हैं। इस देश की जनता अब जाग चुकी है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा कहती हैं, 'जिस तरह से वे यह बिल लाए हैं, जिन चीज़ों को उन्होंने इसके साथ जोड़ा है- जैसे परिसीमन और 2011 की जनगणना-उससे यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि उन्हें पहले से ही पता था कि यह बिल पास नहीं हो पाएगा। वे तो बस इसका राजनीतिक श्रेय लेना चाहते थे।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि, 'हमारा रुख़ बहुत साफ़ है। पूरे INDIA गठबंधन ने अपना रुख़ बहुत साफ़ कर दिया है, और इस वोट से यह बात और भी ज़्यादा साफ़ हो गई है कि-हमारी समझ के अनुसार- यह जो बिल पेश किया गया था और जिस पर तीन दिनों तक चर्चा हुई, वह महिलाओं के आरक्षण के बारे में नहीं था; वह पूरी तरह से परिसीमन के बारे में था, और हम सभी ने इस विषय पर अपने विचार बहुत साफ़ तौर पर व्यक्त कर दिए हैं।'

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लोकसभा में क्यों फेल हुआ संविधान संशोधन विधेयक?

शुक्रवार को सदन में हुई वोटिंग के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही, जिसके कारण संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका। मैराथन बहस के बाद हुए मतदान में बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक सीमा तक वोट न मिलने के कारण यह बिल गिर गया है। इस विधेयक की सबसे बड़ी बाधा इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना था, जिसे विपक्ष ने चुनावी ढांचे के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करार दिया।

परिसीमन के पेंच पर अड़ा विपक्ष और सरकार का रुख
विपक्षी खेमे से शशि थरूर जैसे नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे महिलाओं को अधिकार देने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन के साथ उलझाना तर्कसंगत नहीं है। थरूर का कहना है कि परिसीमन एक बेहद गंभीर और अलग विषय है जिस पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है, इसलिए आरक्षण को इससे अलग कर तुरंत लागू किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर इस महत्वपूर्ण सुधार को रोकने का आरोप लगाया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संकेत दिया है कि सरकार फिलहाल इससे जुड़े अन्य सहायक विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।

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