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प्रेस रिव्यू : 'असली पत्रकार का काम सरकार के विकास कार्यों को छापना'

Kashmir stone pelters
ROUF BHAT/AFP/GETTY IMAGES
Kashmir stone pelters

'असली पत्रकार का काम सरकार के विकास कार्यों को छापना'

इंडियन एक्सप्रेस में खबर है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पत्रकार कामरान यूसुफ़ के ख़िलाफ़ सबूतों के तौर पर उल्लेख किया है कि उन्होंने कभी सरकार के विकास कार्यों को कवर नहीं किया था और इसलिए वो असली पत्रकार नहीं हैं.

ये बातें हिस्सा हैं एक चार्जशीट का जो एनआईए ने 18 जनवरी को यूसुफ़ और 12 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ दायर की हैं.

फ्रीलांस फ़ोटोजर्नलिस्ट के तौर पर काम करने वाले यूसूफ को 5 सितंबर को पत्थरबाज़ी में शामिल होने के जुर्म में गिरफ़्तार किया गया था.

चार्जशीट में एनआईए ने लिखा है कि 'अगर वो असली पत्रकार होते तो उन्होंने कम से कम आसपास होने वाली गतिविधियों को दिखाने का एक पत्रकार का नैतिक फर्ज़ निभाया होता. उन्होंने कभी सरकार के विकास कार्यों को कवर नहीं किया, किसी अस्पताल, स्कूल, रोड का उद्घाटन, सत्ताधारी राजनीतिक दल का बयान या राज्य और केंद्र सरकार की सामाजिक या विकास कार्यों को कवर नहीं किया.'

Bride
Getty Images
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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक एक 25 साल की महिला ने पुरूषों के कपड़े पहनकर दो महिलाओं से शादी कर डाली और उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर की स्वीटी सेन शुरू से ही 'टॉमब्वाय' थी और 2013 से उसने खुद को पुरूषों की तरह ही दिखाना शुरू कर दिया.

उत्तराखंड में उसे धोखाधड़ी के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया. नैनीताल के एसपी ने बताया कि उसने अपना वेश लड़कों जैसा बना लिया था और लड़कियों को फेसबुक पर शादी के जाल में फंसाती थी.

पीड़ित महिला ने बताया, "वो पुरूषों जैसा ही बर्ताव करती थी. शराब पीती थी, सीग्रेट पीती थी और गालियां देती थी. जब उसने दूसरी शादी कर ली तो मुझे जान से मारने की धमकी भी देती थी"

आरोप है कि स्वीटी सेन ने महिला के परिवार से साढ़े आठ लाख रूपए भी लिए थे.

supreme court
Getty Images
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धार्मिक पहचान हत्या का लाइसेंस नहीं देती

अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलग धार्मिक पहचान किसी व्यक्ति पर हमला करने या उसकी हत्या करने का 'लाइसेंस' नहीं देती है.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों से कहा है कि वे ऐसा कोई आदेश पारित ना करें जिसमें किसी समुदाय के समर्थन या विरोध का स्वर दिखता हो.

अदालत ने ये टिप्पणी बाम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश पर की है जिसमें एक व्यक्ति की नृशंस हत्या के मामले में हिंदू राष्ट्र सेना के तीन लोगों को ज़मानत देते हुए तर्क दिया था कि पीड़ित का दोष उसके दूसरे धर्म का होना था.

हाईकोर्ट के इस तर्क पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शीर्ष अदालत ने तीनों अभियुक्तों की ज़मानत रद्द कर दी है.

Jawaharlal Nehru University
Getty Images
Jawaharlal Nehru University

जेएनयू छात्रों ने प्रशासन के लोगों को बंदी बनाया

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक जेएनयू के छात्रों ने कक्षाओं में अनिवार्य हाजिरी के मसले पर प्रशासनिक ब्लॉक का घेरे रखा जिसकी वजह से अधिकारी दफ़्तर में ही बंद रहे.

हालांकि छात्र यूनियन के सदस्यों ने इस बात से इनकार किया और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से दफ़्तर के बाहर कुलपति से मिलने का इंतज़ार कर रहे थे.

जेएनयू के रजिस्ट्रार ने लिखित बयान जारी किया कि छात्रों ने दो कर्मचारियों का रास्ता रोके रखा जब वो लंच के लिए बाहर निकले.

Prasar Bharti
BBC
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प्रसार भारती ने मंत्रालय के निर्देशों को मानने से किया इनकार

द हिंदू ने खबर छापी है कि सरकारी टीवी चैनल प्रसार भारती ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कई निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया है. प्रसार भारती का कहना है कि ये प्रसार भारती क़ानून के ख़िलाफ़ है.

प्रसार भारती ने मंत्रालय के उस निर्देश पर आपत्ति जताई है जिसमें सभी कांट्रेक्ट कर्मचारियों को हटाने की बात कही गई थी.

मंत्रालय ने दो वरिष्ठ पत्रकारों सिद्धार्थ ज़राबी और अभिजीत मजूमदार को नौकरी दिए जाने की सिफ़ारिश की थी. लेकिन मंत्रालय को ये फ़ैसला वापस लेना पड़ा क्योंकि सिद्धार्थ ज़राबी को दिए जाने वाले 1 करोड़ के सालाना मुआवज़े को लेकर प्रसार भारती को आपत्ति थी.

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