नेहरू मेमोरियल संग्रहालय अब आधिकारिक रूप से हुआ प्रधानमंत्री संग्रहालय, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) का नाम अब आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री संग्रहालय हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोदी सरकार के फैसले को मंजूरी दे दी है। साथ ही राष्ट्रपति सचिवालय ने इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी।
हालांकि इस फैसले से विपक्षी दल खासकर कांग्रेस बहुत ज्यादा नाराज है। उसकी ओर से लगातार मोदी सरकार पर हमला किया जा रहा। हाल ही में कांग्रेस ने कहा था कि नाम बदलने से बीजेपी इतिहास नहीं बदल सकती है।

जून में दिया गया था सुझाव
जून 2023 में रक्षामंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। जिसमें नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम बदलकर प्राइम मिनिस्टर म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सोसाइटी करने का सुझाव दिया गया। जिसको मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी।
वहीं इतिहास की बात करें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तीन मूर्ति भवन में रहते थे। उनके जाने के बाद इसी भवन को संग्रहालय में बदल दिया गया। साथ ही उसका नाम भी नेहरू के नाम पर पड़ा। अब पीएम मोदी ने इसको प्रधानमंत्री संग्रहालय में बदल दिया। जिसमें सभी प्रधानमंत्रियों से जुड़ी जानकारी है।
राहुल ने भी कसा था तंज
अभी कुछ दिनों पहले राहुल गांधी लद्दाख की यात्रा पर गए थे। उनके जाने से पहले जब एयरपोर्ट पर मीडिया ने उनसे संग्रहालय के नाम पर सवाल किया तो उन्होंने इशारों ही इशारों में मोदी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि नेहरू जी की पहचान उनके कर्म हैं, उनका नाम नहीं।
खड़गे ने क्या कहा था?
इस फैसले के बाद कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर लिखा था कि जिनका कोई इतिहास ही नहीं है, वो दूसरों के इतिहास को मिटाने चले हैं। नेहरू संग्रहालय का नाम बदलने के कुत्सित प्रयास से, आधुनिक भारत के शिल्पकार व लोकतंत्र के निर्भीक प्रहरी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की शख़्सियत को कम नहीं किया जा सकता। इससे केवल BJP-RSS की ओछी मानसिकता और तानाशाही रवैये का परिचय मिलता है।
नड्डा ने किया था पलटवार
वहीं खड़गे के ट्वीट पर बीजेपी चीफ नड्डा ने पलटवार किया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि एक साधारण तथ्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं कि एक वंश से परे ऐसे नेता हैं जिन्होंने हमारे देश की सेवा और इसका निर्माण किया है। पीएम संग्रहालय राजनीति से परे एक प्रयास है और कांग्रेस के पास इसे महसूस करने के लिए दृष्टि की कमी है।












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