प्रतापगढ़ आग: और भयावह होता मंजर अगर नहीं चल रहा होता रमजान-योग

[अंकुर शर्मा] प्रतापगढ़ के होटल गोयल रेजीडेंसी में आग लगी, जिसमें 13 लोगों की झुलस कर मौत हो गई। मौत ऐसी, कि लाश पहचानना भी आसान नहीं होगा, लेकिन यह मंजर और भी भयावह हो सकता था अगर रमजान पाक का महीना और आरएसएस का योग नहीं चल रहा होता। आप सुनकर चौंक जरूर गये होंगे कि विश्व योग दिवस को आग से जोड़ने की क्या जरूरत थी? लेकिन सच पूछिए तो जिस तरह आग के दौरान बचाव कार्य को अंजाम दिया गया, वह हमारे उत्तर प्रदेश की गंगा-जमुनी संस्कृति का एक बड़ा प्रमाण है।

अब आप पूछेंगे कि कैसे तो सुनिए, शुक्रवार सुबह के तीन बजे थे और उस समय आम तौर पर सड़कों पर सन्नाटा होता है लेकिन आज बात कुछ और थी क्योंकि रमजान का महीना शुरू होने के कारण मुस्लिम परिवार के लोग सुबह सहरी करने उठते हैं जिसके कारण सड़कों पर काफी हलचल थी।

रमजान का महीना आज से शुरू

यहां मैं आपको एक और खास बात बताना चाहूंगी कि यही वक्त सुबह आरएसएस शाखा वालों का भी होता है योग करने का, जिसके लिए सुबह तीन बजे के आस-पास सड़कों पर शाखा वाले और सहरी वाले काफी लोग मौजूद थे।

शाखा के योग का समय था

सहरी की वजह से गोयल रेजीडेंसी होटल के आस-पास पान-तंबाकू की भी दुकानें खुली थीं जहां पर लोग खड़े होकर बातें कर रहे थे कि अचानक होटल से आवाजें आने लगीं, किसी को भी अंदाजा नहीं था कि होटल में आग लगी हुई है लेकिन आवाजें सुनकर लोग उस दिशा में दौड़ें और उन्हें समझने में जरा भी देर नहीं लगी कि होटल में आग लग गई है।

ना किसी को सहरी की फिक्र थी और ना ही योग की चिंता

बिना किसी की परवाह किये लोग होटल के अंदर जा पहुंचे और लोगों को बाहर निकालने में जुट गये। लोगों की मदद करने वालों के लिए ना तो उस वक्त यह मायने रख रहा था कि वो हिंदू हैं या फिर मुसलमान। किसी को ना तो उस समय अपने योग की फिक्र थी और ना ही सहरी की चिंता।

आपातकालीन स्थिति से निपटने वाला स्टॉफ थका हुआ

बचाव करने वालों ने पल भर में ही होटल के खिड़की-दरवाजे तोड़ दिये और लोगों को बाहर निकाला जिसमें होटल में रूकने वाले लोग और होटल का स्टॉफ भी शामिल है। हालांकि होटल में फायर ब्रिगेड या आपातकालीन स्थिति के लिए जो स्टॉफ रखा गया था उन सब की उम्र 50 से ज्यादा है जिसके कारण वो भागने-दौड़ने में उतने प्रवीण नहीं थे।

और भयावह होता मंजर अगर नहीं चल रहा होता रमजान-योग

पुलिस तो घटना स्थल पर काफी देर के बाद पहुंची थी लेकिन तब तक स्थानीय लोगों की मदद से काफी लोगों को होटल से बाहर निकाल कर अस्पताल ले जाया जा चुका था, होटल में फायर ब्रिगेड या आपातकालीन स्थिति के लिए जो स्टॉफ रखा गया था उन सब की उम्र 50 से ज्यादा है जिसके कारण वो भागने-दौड़ने में उतने प्रवीण नहीं थे, अगर उनके भरोसे लोग रहते तो शायद आज मरने वालों की संख्या 13 नहीं बल्कि उससे भी ज्यादा होती।

बचाव करने वाले केवल इंसान को बचा रहे थे ना वहां हिंदू था ना कोई मुसलमान

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में शुक्रवार तड़के होटल गोयल रेजीडेंसी में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई, जिसमें झुलसकर 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 गंभीर रूप से झुलस गए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर जिलाधिकारी ने हादसे में मरने वालों के परिजनों को दो लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

सीएम ने की मुआवजे की घोषणा

पुलिस प्रतापगढ़ में होटल मालिक सुनील गोयल और उसके भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। गंभीर रूप से घायलों को इलाहाबाद भेजा गया है। मृतकों में मुंशी गंज स्थित इंदिरा गांधी नेत्र चिकित्सालय के तीन डाक्टर भी बताए जा रहे हैं।

इसांनियत से बड़ा कोई धर्म नहीं और सेवा से बड़ा कोई मजहब नहीं

इस हादसे के शिकार लोगों को ना तो वापस लाया जा सकता है और ना ही उनके घरवालों के दुखों को कम किया जा सकता है लेकिन जिस तरह से स्थानीय लोगों ने अपनी हिम्मत दिखायी और लोगों को बचाने में जुट गये उसने यह बात तो साबित कर दी इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं और सेवा से बड़ा कोई मजहब नहीं।

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