'हिंदू आतंकवाद के जन्मदाता कांग्रेस का मुंह हुआ काला', साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने फिर साधा निशाना
Pragya Singh Thakur: पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने 2008 के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में कोर्ट द्वारा बरी किए जाने को "सनातन धर्म और सभी देशभक्तों की जीत" बताया है। मुंबई की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने 31 जुलाई को इस बहुचर्चित केस में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया था, जिनमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी शामिल थीं।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने 2 अगस्त को एक्स (ट्विटर का बदला हुआ नाम) पोस्ट में लिखा, ''भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद के जन्मदाता कांग्रेस सहित सभी विधर्मियों का मुंह हुआ काला। भगवा ,हिंदुत्व और सनातन की विजय पर समस्त सनातनियों और देशभक्तों का हुआ बोलबाला बहुत-बहुत बधाई। जय हिन्दूराष्ट्र, जय श्री राम।''

कोर्ट में फूट-फूटकर रोई थीं साध्वी प्रज्ञा, कहा था- '17 साल तक अपमान सहा'
मालेगांव बम धमाके केस में बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का कोर्ट में दिया गया भावुक बयान वायरल हुआ था। फैसला सुनाए जाने से पहले की सुनवाई के दौरान साध्वी की आंखें नम थीं और उनकी आवाज बार-बार भर आती थी।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कोर्ट में कहा था, "मुझे लगातार 13 दिनों तक टॉर्चर किया गया। मेरे सन्यासी जीवन को कलंकित किया गया। मैं एक साध्वी थी, लेकिन मुझे आतंकवादी बना दिया गया। इतना अपमान सहा है कि शब्द नहीं हैं। मैं 17 साल से इस लड़ाई को लड़ रही हूं। इतने साल सिर्फ अपमान सहा है।''
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा था, "एक साध्वी कोर्ट में खड़ी होकर रो रही है, लेकिन जिन लोगों ने कानून के दायरे में रहकर हमेशा गलत किया, उन पर कुछ बोल भी नहीं सकती।"
क्या था मालेगांव विस्फोट का मामला और कोर्ट का फैसला?
▶️ 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में भिक्कू चौक स्थित एक मस्जिद के पास मोटरसाइकिल में लगे बम से धमाका हुआ था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 लोग घायल हुए थे।
▶️ कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसलिए सभी आरोपियों को बरी किया गया, जिनमें शामिल थे -साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय रहीरकर, सुधाकर धर द्विवेदी (शंकराचार्य के नाम से भी जाने जाते हैं), समीर कुलकर्णी।
▶️कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी प्रज्ञा ठाकुर से जुड़ी मोटरसाइकिल का विस्फोट से सीधा संबंध नहीं साबित नहीं हो पाया और आरोपी कर्नल प्रसाद पुरोहित के घर पर विस्फोटक सामग्री होने का कोई सबूत नहीं मिला।
▶️इसके साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश दिया है। जिसमें मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 देने की बात है। फैसला 323 अभियोजन और 8 बचाव पक्ष के गवाहों की गवाही पर आधारित था।
कौन हैं प्रज्ञा सिंह ठाकुर? (Who Is Pragya Singh Thakur)
▶️ प्रज्ञा सिंह ठाकुर, जिन्हें साध्वी प्रज्ञा भी कहा जाता है, इस मालेगांव ब्लास्ट केस में पहली गिरफ्तारी थीं। महाराष्ट्र ATS ने आरोप लगाया था कि धमाके में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल उन्हीं की थी और उन्होंने साजिश रचने की बैठकों में हिस्सा लिया था।
▶️ NIA ने बाद में केस की जांच अपने हाथ में ली और 2015 में प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट दे दी, हालांकि कोर्ट ने उस समय NIA के निष्कर्ष को नहीं माना था।
▶️ करीब 9 साल जेल में बिताने के बाद प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिली। उन्होंने हमेशा कहा कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया और कांग्रेस सरकार ने उन्हें प्रताड़ित किया।
▶️ 2019 में बीजेपी में शामिल होकर उन्होंने भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को 3.65 लाख वोटों से हराया। यह चुनाव उनके लिए राजनीतिक पुनर्जन्म जैसा रहा।
▶️ मध्यप्रदेश के भिंड जिले की रहने वाली प्रज्ञा ठाकुर RSS की छात्र इकाई ABVP से कॉलेज के दिनों में जुड़ीं। बाद में उन्होंने साध्वी जीवन अपना लिया और स्वामी पूर्ण चेतनानंद गिरी नाम धारण किया। 2008 की गिरफ्तारी से पहले भी वे हिंदूवादी और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थीं और बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार करती थीं।












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