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Prachand Helicopter: राष्‍ट्रपति मुर्मू 'प्रचंड' से भरेगी उड़ान, जानें मिसाइलों से लैस हेलीकॉप्टर की खासियत

Prachand combat helicopter: भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक बार फिर भारतीय सैन्य ताकत के सबसे अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के साथ इतिहास रचने जा रही हैं। शुक्रवार को वे जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन से भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' में उड़ान भरेंगी और इसके बाद पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायु सेना के भव्य युद्धाभ्यास 'वायु शक्ति' की साक्षी बनेंगी। यह दौरा न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' की उड़ान का भी प्रतीक है।

स्वदेशी है LCH 'प्रचंड'

भारत में निर्मित हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH) 'प्रचंड' को Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने डिजाइन और विकसित किया है। यह भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित अटैक हेलीकॉप्टर है, जिसे रेगिस्तान से लेकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक हर प्रकार के भूभाग में प्रभावी संचालन के लिए तैयार किया गया है।

Prachand Indigenous Combat Helicopter

LCH 'प्रचंड' की खासियत क्‍या है?

  • 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उड़ान की क्षमता
  • अत्याधुनिक एवियोनिक्स और स्टील्थ फीचर्स
  • रात में सटीक हमला करने की क्षमता
  • हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें
  • रॉकेट पॉड और 20 मिमी गन से लैस
Prachand Indigenous Combat Helicopter

क्यों नाम रखा गया प्रचंड?

Hindustan Aeronautics Limited द्वारा विकसित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' भारत की स्वदेशी सैन्य शक्ति का अहम प्रतीक है। इसे विशेष रूप से ऊंचे पहाड़ी इलाकों में प्रभावी कार्रवाई के लिए तैयार किया गया है।'प्रचंड' नाम इसकी आक्रामक और घातक क्षमता के कारण रखा गया है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में राजनाथ सिंह ने भी जोधपुर में इसकी उड़ान भरी थी।

'प्रचंड' हेलिकॉप्टर की सेना को क्‍यों पड़ी जरूर

साल 1999 के Kargil War के दौरान भारतीय सेना को ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में दुश्मन पर सटीक हमला करने में सक्षम अटैक हेलीकॉप्टर की कमी महसूस हुई। इसी अनुभव ने एक स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर के विकास की नींव रखी।

'प्रचंड' हेलिकॉप्टर 2022 में भारतीय सेना में हुआ शामिल

2006 में इस परियोजना पर औपचारिक काम शुरू हुआ और 29 मार्च 2010 को 'प्रचंड' ने अपनी पहली उड़ान भरी। वर्षों तक कठोर परीक्षणों से गुजरने के बाद 2022 में इसे भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।

पोखरण 'वायु शक्ति' में युद्धाभ्यास का दमदार प्रदर्शन

राष्ट्रपति भारत-पाकिस्तान सीमा के पास पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायु सेना के भव्य 'वायु शक्ति' युद्धाभ्यास में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम से पूर्व, 24 फरवरी को एक पूर्ण रिहर्सल आयोजित की गई थी, जिसमें वास्तविक युद्ध जैसे परिदृश्य में दिन-शाम-रात के समन्वित अभियानों का प्रदर्शन किया गया।

  • इस अभ्यास के दौरान, अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों ने निर्धारित लक्ष्यों पर नकली हमले किए।
  • सुखोई-30 MKI विमानों ने दुश्मन के रनवे और ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि मिग-29 जेट्स ने टैंकों के एक नकली काफिले पर हमला किया।
  • आकाश मिसाइल प्रणाली ने हवाई लक्ष्यों को भेदने का अभ्यास किया।
  • C-130 विमान ने रात में लैंडिंग की, और एक C-295 परिवहन विमान ने लैंडिंग अभियान चलाया।
  • प्रचंड और अपाचे हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ जगुआर विमानों ने भी इस पूर्वाभ्यास में अपनी क्षमताएं प्रदर्शित कीं।

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहले भी रच चुकी हैं इतिहास

राष्ट्रपति मुर्मू इससे पहले भी अग्रिम लड़ाकू विमानों में उड़ान भर चुकी हैं। अक्टूबर 2023 में उन्होंने अंबाला एयर फोर्स स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। इससे पहले अप्रैल 2023 में असम के तेजपुर एयर फोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI में लगभग 30 मिनट की उड़ान भरते हुए ब्रह्मपुत्र और हिमालय का विहंगम दृश्य देखा था। राफेल और सुखोई-30 MKI में उड़ान भरने के बाद वे IAF के दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं।

सैन्य शक्ति में भारत बना आत्‍मनिर्भर

शुक्रवार की यह उड़ान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और सैन्य आधुनिकीकरण का सशक्त प्रतीक है। 'प्रचंड' के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत अब रक्षा उत्पादन में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से खड़ा है।

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