बिहार के अखाड़े से केंद्र में फतह करने का प्रयास

बिहार राजनीतिक अखाड़ा तब बन गया, जब नीतीश ने भाजपा के साथ 17 साल पुराना अपना गठबंधन तोड़ दिया। उसके बाद बोधगया मंदिर में ब्लास्ट, मिड डे मिल खाने से हुई 22 बच्चों की मौत, इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी यासीन भटकल की गिरफ्तारी, मोदी की पटना रैली जैसी घटनाओं ने प्रदेश को चर्चा में ला दिया। इस दौरान पटना रैली में हुए ब्लास्ट, नीतीश सरकार की असफलता साबित हुई जबकि मोदी द्वारा नीतीश को देशद्रोही बताये जाने और नीतीश द्वारा मोदी पर किये गये हमलों ने माहौल में और भी सरगर्मी पैदा कर दी। बताया जाता है कि ब्लास्ट में मारे गये लोगों के परिवार से मिलने गये मोदी पटना ब्लास्ट में नीतीश सरकार की असफलता को जगजाहिर करना चाहते थे।
अब भाजपा ने राज्य में मोदी को फिर से वापस बुलाने के लिए दिसंबर और जनवरी में तीन अन्य रैलियों के प्रस्ताव की घोषणा कर दी है। जिसको देखते हुए जदयू ने भी 'संकल्प रैली' आयोजित करने की घोषणा की है, ऐसे में अगर मोदी बनाम कांग्रेस युद्ध आने वाले कुछ महीनों में मोदी बनाम नीतीश हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
नीतीश और मोदी ने किया व्यक्तित्व परिवर्तन
इस दौरान यह भी देखने में आ रहा है कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी दोनों ही नेताओं का कद उनकी पार्टी से बड़ा है और दोनों ने वोट बैंक की खातिर खुद की छवि बदलने का प्रयास किया है। मोदी ने जहां 'पहले शौचालय और फिर देवालय' जैसी बात कहकर अपनी हिंदुत्ववादी छवि को पीछे छोड़ने की कोशिश की वहीं नीतीश ने भी चुनावी लाभ के लिए सबसे बड़ा राम मंदिर बनवाने का निर्णय लिया, जबकि उनकी छवि एक धर्मनिरपेक्ष नेता की है। नीतीश के इस कदम से अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह राजग से अलग होने के बाद अगड़ी जातियों का वोट बैंक बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
मोदी ने तोड़ा क्षेत्रीय नेताओं का सपना
यह एक सच है कि राष्ट्रीय पटल पर मोदी के उदय होने के साथ ही मायावती, मुलायम सिंह जैसे नेता बैकफुट पर आ गये हैं। जिनका उद्देश्य कांग्रेस के कमजोर होते ही केंद्र की सत्ता में प्रमुख स्थान हासिल करना था लेकिन अब मोदी की मजबूत दावेदारी से इन्हें अपने सपने टूटते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा मुजफ्फरनगर में हुए दंगों और खराब कानून व्यवस्था ने भी जनता को इन पर सवाल उठाने को मजबूर कर दिया है।
जबकि पिछले दस साल में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन ने भी जनता के बीच मोदी की स्वीकार्यता को बढ़ाया है। इन हालातों में नीतीश ही मोदी के साथ लड़ाई में नजर आ रहे हैं। अब उन्होने बिहार में सबसे बड़ा राम मंदिर बनवाने की घोषणा कर भाजपा का परंपरागत वोट बैंक हथियाने का प्रयास किया है।












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