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किसानों के प्रदर्शन में जा रहे BKU नेता राकेश टिकैत को पुलिस ने हिरासत में लिया, अलीगढ़ से ले गई टप्पल थाने

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को बुधवार को अलीगढ़ पुलिस ने यमुना एक्सप्रेसवे पर हिरासत में ले लिया। टिकैत और उनके सहयोगियों को ग्रेटर नोएडा में किसान नेताओं की बैठक में जाने से रोका गया। अलीगढ़ पुलिस प्रवक्ता ने पुष्टि की कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। बल्कि टप्पल पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

राकेश टिकैत की प्रतिक्रिया

पुलिस की कार्रवाई पर निराशा व्यक्त करते हुए टिकैत ने कहा कि पुलिस किसानों को उनके घरों में सीमित करने का प्रयास कर रही है और उन्हें नोएडा जाने से रोका जा रहा है। यह रवैया किसान आंदोलन को और भड़का सकता है। उन्होंने अधिकारियों के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए किसानों की मांगों को पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

rakesh tikait

बीकेयू की रणनीति और विरोध प्रदर्शन

इससे पहले मंगलवार को मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में बीकेयू ने आपातकालीन बैठक की। बैठक का नेतृत्व नरेश टिकैत ने किया। जिसमें यूनियन ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसानों का समर्थन करने का संकल्प लिया। बीकेयू के युवा विंग के अध्यक्ष अनुज सिंह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को ग्रेटर नोएडा के जीरो पॉइंट पर इकट्ठा होने का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहीत भूमि के लिए उचित मुआवजे और लाभों की मांग की।

ग्रेटर नोएडा में विरोध प्रदर्शन

ग्रेटर नोएडा के जीरो पॉइंट पर बुधवार को सैकड़ों किसान इकट्ठा हुए। ग्रामीणों ने स्थानीय अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मुआवजे और अधिग्रहीत भूमि के लाभों की मांग करते हुए नाराजगी जाहिर की।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया। जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने पुष्टि की कि उन्हें उसी दिन रिहा कर दिया गया।

हालांकि पुलिस और किसानों के बीच तनाव बरकरार है। जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। टिकैत ने इस मुद्दे पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की मांगें पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

राकेश टिकैत की हिरासत और नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसानों के विरोध प्रदर्शन ने कृषि समुदाय और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को उजागर किया है। उचित मुआवजा और भूमि अधिकारों को लेकर किसान एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह घटनाक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन को एक नई दिशा दे सकता है।

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