PM Vishwakarma Scheme: भव्य लॉन्चिंग की तैयारी, 70 मंत्रियों को मिली क्या जिम्मेदारी? जानिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को विश्वकर्मा दिवस के मौके पर पीएम विश्वकर्मा योजना लॉन्च करने वाले हैं। इसकी की घोषणा उन्होंने 15 अगस्त को ही लाल किले से राष्ट्र को किए गए संबोधन के दौरान की थी। पीएम मोदी इस योजना को दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से लॉन्च करने वाले हैं।
मोदी सरकार के 70 मंत्रियों को इस दौरान देश भर के 70 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में मौजूद रहना है। पीएम मोदी की ओर से इस योजना की घोषणा होने के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने भी इसकी मंजूरी दे दी है।

अलग-अलग जगहों पर मौजूद रहेंगे केंद्रीय मंत्री
जब पीएम मोदी विश्वकर्मा योजना की शुरुआत करेंगे तो उस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ में मौजूद रहेंगे। जबकि, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी नागपुर में रहेंगे, वहीं कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश की झांसी में रहेंगी। जबकि, भूपेंद्र यादव जयपुर और विदेश मंत्री एस जयशकर तिरुवनंतपुरम से कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
13,000 करोड़ रुपए की है योजना
इसी तरह से अधिकतर केंद्रीय मंत्रियों को उनके गृह राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होना है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार आने वाले पांच वर्षों में परंपरागत कारीगरों को स्किल ट्रेनिंग और उनके हुनर के विकास पर 13,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
परंपरागत पेशे से जुड़े कामगारों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
इस योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से उन लोगों के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है, जो किसी न किसी परंपरागत या अपने पारिवारिक पेशे से जुड़े हुए हैं। जैसे कि बुनकर, सुनार, कुम्हार, लोहार, बढ़ई, कारीगर, शिल्पकार आदि। इसके अलावा जो धोबी, नाई जैसे परंपरागत श्रम आधारित कार्यों से जुड़े लोग हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलने जा रहा है।
आर्थिक तौर पर ताकतवर बनाना है
यह योजना का उद्देश्य इन परंपरागत पेशेवरों के कार्यों की गुणवत्ता में सुधार और उनके उत्पादों और सेवाओं को बेहतर करना है, ताकि वह घरेलू और वैश्विक वैल्यू चेन के साथ खुद की तालमेल बिठा सकें। इस योजना के माध्यम से ऐसे लोगों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक कौशल से जोड़कर इन्हें आर्थिक तौर पर सशक्त बनाना है।
समाज के बहुत बड़े वर्ग को मिलने जा रहा है लाभ
इस योजना का लाभ सबसे अधिक समाज के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, अति-पिछड़े, महिलाओं और समाज के अन्य कमजोर तबके के लोगों को मिलने की संभावना है। अगर चुनावी राजनीति के नजरिए से देखें तो यह बहुत बड़ा वोट बैंक साबित हो सकता है।
चुनावी लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण योजना
ऐसे समय में जब विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की ओर से ऐसे वर्ग को लुभाने के लिए जातिगत जनगणना की मांग उठाई जा रही है, तो केंद्र सरकार इस योजना के माध्यम से समाज के बहुत वर्ग को साधने की कोशिश में लग रही है।
खास बात ये है कि पीएम मोदी का जन्मदिन भी 17 सितंबर को ही है और इसके लिए बीजेपी ने बड़ी तैयारियां की हैं। इस तारीख से 2 अक्टूबर तक पार्टी केंद्र सरकार के कल्याणकारी योजनाओं को लेकर लाभार्थियों तक पहुंचने और स्वच्छता अभियान जैसे कार्यक्रम चलाने की तैयारी में है।












Click it and Unblock the Notifications