प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिणी छोर से उत्तरी छोर तक किया 'अटल टनल' का मुआयना, देखिए Video
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश में 9.02 किलोमीटर लंबी सुरंग 'अटल टनल', रोहतांग का उद्घाटन किया है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मौजूद रहे। बता दें ये दुनिया का सबसे लंबा हाईवे टनल है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने अटल टनल के दक्षिणी छोर से उत्तरी छोर की लगभग 9.02 कि.मी. की यात्रा कर टनल का मुआयना भी लिया। जिसका वीडियो समाचार एजेंसी एएनआई ने शेयर किया है।
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टनल के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज सिर्फ अटल जी का ही सपना नहीं पूरा हुआ है, आज हिमाचल के करोड़ों लोगों का भी दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है। इस टनल से मनाली और केलांग के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो जाएगी। पहाड़ के मेरे भाई-बहन समझ सकते हैं कि पहाड़ पर 3-4 घंटे की दूरी कम होने का मतलब क्या होता है। साल 2002 में अटल जी ने इस टनल के लिए अप्रोच रोड का शिलान्यास किया था। अटल जी की सरकार जाने के बाद, जैसे इस काम को भी भुला दिया गया। हालात ये थे कि साल 2013-14 तक टनल का सिर्फ 1300 मीटर का काम ही हो पाया था।'
उन्होंने कहा कि 'अटल जी के साथ ही एक और पुल का नाम जुड़ा है- कोसी महासेतु का। बिहार में कोसी महासेतु का शिलान्यास भी अटल जी ने ही किया था। 2014 में सरकार में आने के बाद कोसी महासेतु का काम भी हमने तेज करवाया। कुछ दिन पहले ही कोसी महासेतु का भी लोकार्पण किया जा चुका है। देश में ही आधुनिक अस्त्र-शस्त्र बनें, मेक इन इंडिया हथियार बनें, इसके लिए बड़े रिफॉर्म्स किए गए हैं। लंबे इंतजार के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अब हमारे सिस्टम का हिस्सा है। देश की सेनाओं की आवश्यकता अनुसार प्रोक्योरमेंट और प्रोडक्शन दोनों में बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।'
वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'सामरिक दृष्टि से यह टनल बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा पर तैनात हमारे सेना के जवानों के लिए राशन, हथियार पहुंचाने और तैनाती करने में काफी आसानी होगी। टनल जहां देश की जनता को समर्पित है, वहीं हमारे सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों और सीमा पर रहने वाले लोगों को भी समर्पित है।' हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, 'एक बहुत बड़ी बाधा लाहौल के लोगों के लिए रहती, 4 महीनों के लिए आना-जाना बंद। कोई बीमार होता तो हेलिकॉप्टर भेजा जाता। कई बार परिस्थितियां ऐसी होतीं कि रोहतांग दर्रे से ही वापस मुड़ना पड़ता। हमने टनल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक वृहत कार्यक्रम बनाया है।'
बीआरओ डीजी ने कहा, 'अटल टनल के निर्माण से आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत हिमालय क्षेत्र में अन्य टनल निर्माण कार्य को बल मिलेगा। अब बीआरओ का फोकस शिंकुला टनल पर है। मैं आश्वासन देना चाहता हूं कि बीआरओ इस टनल को आने वाले 3 सालों में पूरा कर लेगा जिससे लेह के लिए हर मौसम में कनेक्टिविटी संभव हो जाएगी।'












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