PM मोदी का प्रयागराज में महाकुंभ पर लोकसभा में संबोधन, भव्य आयोजन के लिए सभी को दिया धन्यवाद
PM Modi in Lok Sabha: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लोकसभा में अपना संबोधन दें रहे हैं। पीएम ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रयागराज में महाकुंभ के भव्य आयोजन के लिए सभी को धन्यवाद दिया। यह भाषण ऐसे समय में हो रहा है जब उनके दो घंटे से अधिक लंबे पॉडकास्ट को लेकर विवाद जारी है।
पीएम मोदी हाल ही में एआई रिसर्चर लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में शामिल हुए थे, जिसकी विपक्ष ने आलोचना की। संसद का सत्र 4 अप्रैल को स्थगित होगा, लेकिन उससे पहले लोकसभा और राज्यसभा में तीखी बहस होने की संभावना है। होली ब्रेक से पहले मणिपुर के बजट और नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को लेकर संसद में जोरदार चर्चा हुई थी।

'करोड़ों देशवासियों को बधाई'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं प्रयागराज के महाकुंभ पर बोलने के लिए यहां खड़ा हूं। मैं करोड़ों देशवासियों को बधाई देता हूं जिनकी वजह से महाकुंभ का सफल आयोजन हो सका। महाकुंभ की सफलता में कई लोगों का योगदान रहा... मैं भारत, यूपी और प्रयागराज के लोगों को धन्यवाद देता हूं..."
#WATCH | Delhi | Prime Minister Narendra Modi says, "I stand here to speak on Prayagraj's Maha Kumbh. I congratulate crores of countrymen because of whom the Maha Kumbh could be organised successfully. Many people contributed to the success of the Maha Kumbh... I thank the people… pic.twitter.com/ZY7wGkiJYX
— ANI (@ANI) March 18, 2025
'सबका साथ सबका विकास'
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, "...मैंने लाल किले से 'सबका साथ सबका विकास' के महत्व पर जोर दिया। महाकुंभ के रूप में पूरी दुनिया ने भारत की भव्यता को देखा... हम महाकुंभ में एक राष्ट्रीय जागृति देख रहे हैं, जो नई उपलब्धियों की प्रेरणा देगी...इससे हमारी ताकत पर संदेह करने वालों को भी करारा जवाब मिला है।"
'देश अगले 1000 वर्षों के लिए खुद को तैयार कर रहा'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "...पिछले वर्ष राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हमने देखा कि कैसे देश अगले 1000 वर्षों के लिए खुद को तैयार कर रहा है। महाकुंभ के दौरान ये सोच और मजबूत हुई...देश के सामूहिक जागरण ने सामूहिक शक्ति को बढ़ाया..."
विपक्ष का विरोध जारी
विपक्ष ने मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) में कथित गड़बड़ी को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन किया और इस पर चर्चा की मांग की। इसके अलावा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भाषण के बाद भी विवाद हुआ, जहां डीएमके ने उन पर तमिलनाडु में हिंदी थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया।












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