PM मोदी ने COP26 को किया संबोधित, भारत की इस पहल से जुड़ने का किया सभी देशों से अनुरोध
ग्लासगो, 01 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 'वर्ल्ड लीडर समिट ऑफ कोप-26' को संबोधित किया। ग्लासगो में सीओपी26 की अध्यक्षता ब्रिटेन कर रहा है, जिसका समापन 12 नवंबर को होगा। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में नल से जल, स्वच्छ भारत मिशन और उज्जवला जैसी परियोजनाओं से हमारे जरूरतमंद नागरिकों को अनुकूलन लाभ तो मिला ही हैं, साथ ही उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमें अनुकूलन को अपनी विकास नीतियों और योजनाओं का मुख्य भाग बनाना है। भारत में 'नल से जल', स्वच्छ भारत मिशन और उज्ज्वला जैसी योजनाओं ने न केवल हमारे नागरिकों को लाभ दिया है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार किया है। वहीं अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कई पारंपरिक समुदाय में प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का ज्ञान है। हमारी अनुकूलन नीतियों में इन्हें उचित महत्व मिलना चाहिए। स्कूल के पाठ्यक्रम में भी इसे जोड़ा जाना चाहिए।
साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि अडपटेशन के तरीके चाहे लोकल हों पिछड़े देशों को इसके लिए ग्लोबल सहयोग मिलना चाहिए। लोकल अडपटेशन के लिए ग्लोबल सहयोग के लिए भारत ने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिस्टेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पहल की शुरूआत की थी। मैं सभी देशों को इस पहल से जुड़ने का अनुरोध करता हूं।
वहीं पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु पर वैश्विक बहस में अडपटेशन को उतना महत्व नहीं मिला है जितना मिटिगेशन को। ये उन विकासशील देशों के साथ अन्याय है, जो जलवायु परिवर्तन से ज्यादा प्रभावित हैं। भारत समेत अधिकतर विकासशील देशों के किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। देश में बारिश, बाढ़ और लगातार आ रहे तूफानों से फसल नष्ट हो रही है। पेयजल के स्रोत से लेकर किफायती आवास तक सभी को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लचकदार बनाने की जरूरत है।












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