विधायकों के अभियोजन के दावे पर आया SC का जजमेंट, PM मोदी ने की फैसले की तारीफ, देखें क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ ने अभियोजन से छूट के दावे को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आज, 'क्या सांसदों और विधायकों को विधायिका में भाषण देने या वोट देने के लिए रिश्वत लेने पर अभियोजन से छूट प्राप्त है' पर अपना फैसला सुनाया।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई सांसद या विधायक संसद/विधानसभा में वोट/भाषण के संबंध में रिश्वतखोरी के आरोप में अभियोजन से छूट का दावा नहीं कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि इससे स्वक्छ राजनीति को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने एक्स पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट का एक महान निर्णय जो स्वच्छ राजनीति सुनिश्चित करेगा और सिस्टम में लोगों का विश्वास गहरा करेगा।"
सुप्रीम कोर्ट की सात-न्यायाधीशों की पीठ ने अपने सर्वसम्मत विचार से 1998 के पीवी नरसिम्हा रोआ फैसले मामले को खारिज कर दिया, जिसमें सांसदों/विधायकों को संसद में मतदान के लिए रिश्वतखोरी के खिलाफ मुकदमा चलाने से छूट दी गई थी।
पीठ ने कहा कि वे पीवी नरसिम्हा मामले में फैसले से असहमत हैं और पीवी नरसिम्हा मामले में फैसला, जो विधायकों को वोट देने या भाषण देने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने से छूट देता है, के व्यापक प्रभाव हैं और इसे खारिज कर दिया गया है।
शीर्ष अदालत ने 5 अक्टूबर, 2023 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बहस के दौरान, केंद्र ने कहा था कि रिश्वतखोरी कभी भी छूट का विषय नहीं हो सकती है और संसदीय विशेषाधिकार का मतलब किसी विधायक को कानून से ऊपर रखना नहीं है।
अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और एमिकस क्यूरी पीएस पटवालिया, जो इस मामले में अदालत की सहायता कर रहे थे, सहित कई वकीलों ने अदालत द्वारा आदेश सुरक्षित रखने से पहले दो दिनों तक मामले पर बहस की।
सात न्यायाधीशों की पीठ जेएमएम रिश्वत मामले में 1998 में शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर पुनर्विचार कर रही है, जिसके द्वारा सांसदों और विधायकों को विधायिका में भाषण देने या वोट देने के लिए रिश्वत लेने के लिए अभियोजन से छूट दी गई थी।












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