श्रीलंका के राष्ट्रपति के साथ बोले PM मोदी, कहा-'रामेश्वरम और तलाईमन्नार के बीच भी नौका सेवा शुरू होगी'

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा के लिए भारत का चुनाव किया। उनकी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा जो रविवार को शुरू हुई। दोनों पड़ोसी देशों के बीच राजनयिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति का भव्य स्वागत हुआ और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य भारतीय शीर्ष नेतृत्व से व्यापक चर्चाएं कीं।

श्रीलंका के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस बयान में बोले पीएम मोदी

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के साथ संयुक्त प्रेस बयान में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब पाली भाषा को भारत में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया तो श्रीलंका में भी इसका जश्न मनाया गया। फेरी सेवा और चेन्नई-जाफना उड़ान कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है। पर्यटन और हमारे सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया। हमने तय किया है कि नागपट्टिनम और कांकेसंथुराई नौका सेवाओं की सफल शुरुआत के बाद अब भारत में रामेश्वरम और तलाईमन्नार के बीच भी नौका सेवा शुरू की जाएगी।

Anura Kumar Dissanayake

उन्होंने कहा कि श्रीलंका के बौद्ध सर्किट और रामायण ट्रेल के माध्यम से पर्यटन की संभावना। हमने मछुआरों की आजीविका से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की। हम इस बात पर सहमत हुए कि हमें इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। राष्ट्रपति डिसनायके ने मुझे अपने समावेशी दृष्टिकोण के बारे में बताया। हमें उम्मीद है कि श्रीलंकाई सरकार तमिलों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी और श्रीलंका के संविधान के पूर्ण कार्यान्वयन और प्रांतीय परिषद चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करेगी। मैंने राष्ट्रपति डिसनायके को आश्वासन दिया है कि भारत कई मायनों में श्रीलंका को विकसित करने के उनके प्रयासों में एक विश्वसनीय और विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा।

मछुआरों के मुद्दे का एक टिकाऊ और स्थायी समाधान हो

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि हम मछुआरों के मुद्दे का एक टिकाऊ और स्थायी समाधान ढूंढना चाहते हैं। जो हमारे दोनों देशों के लिए एक समस्या बन गया है। नीचे की ओर मछली पकड़ने की प्रणाली अपनाई जा रही है। उस क्षेत्र में मछुआरों द्वारा और इसे समाप्त करने की आवश्यकता है। क्योंकि यह इस उद्योग के लिए विनाश का कारण बनेगा।

व्यापक वार्ता में व्यापार, सुरक्षा और निवेश पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति दिसानायके की चर्चाओं का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश और रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करना रहा। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राष्ट्रपति दिसानायके से मुलाकात की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन बैठकों को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-श्रीलंका के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और गति देने के लिए है। दोनों देशों ने आपसी हितों और साझा लक्ष्यों पर ठोस चर्चा की।

शीर्ष भारतीय अधिकारियों से महत्वपूर्ण मुलाकातें

राष्ट्रपति दिसानायके ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी महत्वपूर्ण बातचीत की। इन बैठकों के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और साझा विकास के उद्देश्यों पर चर्चा की। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर अपनी चर्चाओं का सार साझा करते हुए लिखा कि आज शाम दिल्ली में अपने स्वागत के बाद विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ आपसी हितों पर सार्थक चर्चा हुई।

पड़ोसी पहले नीति के तहत श्रीलंका को विशेष महत्व

श्रीलंका भारत की पड़ोसी पहले नीति का एक अभिन्न हिस्सा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि श्रीलंका भारत की सागर आउटलुक (क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा) में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके के बीच बातचीत से द्विपक्षीय विश्वास और सहयोग और मजबूत होगा।

जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति से उनकी पहली राजकीय यात्रा के दौरान मिलना खुशी की बात है। मुझे विश्वास है कि भारत-श्रीलंका साझेदारी के नए आयाम खुलेंगे।

राजनयिक संबंधों में मील का पत्थर

राष्ट्रपति दिसानायके की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाने का प्रतीक है। भारत और श्रीलंका के बीच बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों के साथ-साथ सुरक्षा क्षेत्र में भी आपसी सहयोग का विस्तार हुआ है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति के लिए आयोजित इस राजकीय यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि भारत-श्रीलंका संबंध केवल पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं। बल्कि यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक प्रगति और साझा समृद्धि का आधार है।

गर्मजोशी से किया गया स्वागत

राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा राष्ट्रपति दिसानायके का भव्य स्वागत किया गया। भारत-श्रीलंका संबंधों को नई दिशा देने और साझा हितों को बढ़ावा देने के इस प्रयास को द्विपक्षीय संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके की यह यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों की पुष्टि करती है। व्यापार, सुरक्षा और निवेश के क्षेत्र में हुई गहन चर्चा ने यह साबित किया कि भारत और श्रीलंका न केवल एक दूसरे के घनिष्ठ साझेदार हैं। बल्कि अपने क्षेत्रीय और वैश्विक लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध भी हैं।

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