PM Modi Speech: Bofors Scandal क्या है? PM मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए किया जिक्र
PM Modi Speech Bofors Scandal: राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और लेफ्ट जैसी पार्टियां दशकों से सत्ता में रहीं, लेकिन उनकी पहचान भ्रष्टाचार से जुड़ी रही।
पीएम ने तंज कसा, 'जब भी किसी डील की बात होती थी, तो लोग बोफोर्स का जिक्र करते थे। आज डील की चर्चा गौरव से होती है।' यह बयान कांग्रेस पर पुराने घोटालों का आरोप लगाने का था, जो 1980 के दशक के बोफोर्स स्कैंडल से जुड़ा है। स्पीच के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और वॉकआउट कर दिया। आइए, इस घटना और बोफोर्स स्कैंडल को समझते हैं - क्या कहा पीएम ने, बोफोर्स क्या है, और इसका राजनीतिक मायने क्या?

PM Modi Rajya Sabha Speech: राज्यसभा में क्या हुआ-पीएम की स्पीच और विपक्ष का हंगामा
बजट सेशन के दौरान पीएम मोदी शाम करीब 5 बजे राज्यसभा पहुंचे। जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की - 'तानाशाही नहीं चलेगी, राहुल गांधी को बोलने दो।' पीएम ने व्यंग्य किया, 'खड़गे जी की उम्र (83 साल) देखते हुए उन्हें बैठकर नारे लगाने की इजाजत है।' इससे नाराज विपक्ष ने कुछ मिनट नारे लगाए और फिर सदन से वॉकआउट कर दिया। पीएम ने कहा, 'वे थक गए और चले गए।' स्पीच 1 घंटा 27 मिनट चली, जिसमें उन्होंने अपनी सरकार के रिफॉर्म्स का जिक्र किया।
एक दिन पहले लोकसभा में भी पीएम की स्पीच हंगामे से रद्द हो गई थी। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि विपक्षी सदस्य पीएम की कुर्सी घेरकर 'अप्रत्याशित घटना' कर सकते थे। 2004 के बाद पहली बार धन्यवाद प्रस्ताव पीएम के भाषण बिना पास हुआ।
PM Attack On Congress Bofors Scam: पीएम का मुख्य हमला- कांग्रेस पर बोफोर्स का तंज
पीएम ने कांग्रेस और सहयोगी पार्टियों को निशाना बनाते हुए कहा कि ये सत्ता में रहीं, लेकिन उनकी छवि भ्रष्टाचार वाली बनी। उन्होंने कहा, 'आज डील की चर्चा होती है तो गौरव से, लेकिन उनके समय डील का नाम लेते ही बोफोर्स याद आता था।' यह 1980 के दशक के बोफोर्स घोटाले का संदर्भ था, जहां कांग्रेस सरकार पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था। पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने 2014 में 'गड़बड़ी' छोड़ी, जिसे ठीक करने में समय लगा। उन्होंने यूरोपीय संघ और अमेरिका से हालिया ट्रेड डील्स का जिक्र कर अपनी सरकार की पारदर्शिता की तारीफ की। पीएम ने कांग्रेस को 'कल्पना करने वाली' पार्टी बताया, जो कार्यान्वयन नहीं करती।
What Is Bofors Scandal: क्या है बोफोर्स स्कैंडल? पूरी कहानी समझें...
बोफोर्स स्कैंडल 1980-90 के दशक का भारत का सबसे बड़ा हथियार खरीद घोटाला था, जिसमें कांग्रेस सरकार और तत्कालीन पीएम राजीव गांधी पर रिश्वत लेने के आरोप लगे। आइए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं:-
- डील की शुरुआत (Bofors Deal 1986): भारत को आर्मी के लिए 155mm हॉवित्जर गन (155mm Howitzer Gun) चाहिए थीं। पाकिस्तान (Pakistan) के F-16 लड़ाकू विमानों का जवाब देने के लिए भारत ने स्वीडन की कंपनी बोफोर्स AB से 410 गन खरीदने का सौदा किया। डील की कीमत 1.4 बिलियन डॉलर (उस समय करीब ₹1,437 करोड़) थी। यह स्वीडन का सबसे बड़ा आर्म्स डील था। फ्रांस की सोफमा कंपनी भी रेस में थी, लेकिन बोफोर्स जीती।
- खुलासा (1987): Sveriges Radio ने 16 अप्रैल 1987 को खबर दी कि बोफोर्स ने सौदा जीतने के लिए रिश्वत दी। आरोप लगा कि ₹640 मिलियन (उस समय) की रिश्वत भारतीय राजनेताओं, कांग्रेस सदस्यों और अधिकारियों को दी गई। कंपनी के पूर्व कर्मचारी इंग्वार ब्राट जैसे व्हिसलब्लोअर्स ने दावा किया कि मिडलमैन के जरिए पैसे दिए गए। मुख्य मिडलमैन: इटली के ओटावियो क्वाट्रोची (राजीव गांधी के करीबी), विं चड्ढा और हिंदुजा ब्रदर्स।
- राजनीतिक असर: घोटाले ने राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की छवि खराब की। विपक्ष ने इसे 'क्वाट्रोची डील' कहा। 1989 के चुनाव में कांग्रेस हार गई, वीपी सिंह की सरकार बनी। जांच:- CBI ने 1990 में FIR दर्ज की, लेकिन कोई बड़ा दोषी साबित नहीं हुआ। कई जांच समितियां बनीं, लेकिन सबूतों की कमी से केस बंद हो गए। 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोप हटाए, लेकिन विवाद आज भी है।
- क्यों आज भी याद: बोफोर्स कांग्रेस के लिए 'काला धब्बा' है। पीएम मोदी ने इसे विपक्ष पर हमले के लिए इस्तेमाल किया, कहते हुए कि उनकी सरकार में डील्स पारदर्शी हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के अमेरिका-ईयू डील्स में किसानों के हित प्रभावित हो रहे, लेकिन सरकार ने इनकार किया।
राजनीतिक मायने: कांग्रेस vs मोदी की जंग
पीएम का बयान कांग्रेस पर पुराने घोटालों का आरोप लगाने का हिस्सा है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी डिबेट से भाग रहे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार तानाशाही कर रही। यह विवाद बजट सेशन को प्रभावित कर रहा, जहां विपक्ष ट्रेड डील्स पर सवाल उठा रहा। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने 'स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स' किए, जिससे भारत ग्लोबल कॉम्पिटिशन के लिए तैयार है।
यह घटना दिखाती है कि पुराने स्कैंडल्स आज भी राजनीति में जिंदा हैं। क्या बोफोर्स जैसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं? कमेंट्स में बताएं!
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