Pope Francis last rites: 'दुनिया पोप फ्रांसिस को कभी नहीं भूलेगी', पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि
Pope Francis last rites: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 26 अप्रैल को पोप फ्रांसिस को अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए कहा की समाज के प्रति उनकी सेवा को दुनिया हमेशा याद रखेगी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "राष्ट्रपति जी ने भारत की जनता की ओर से महामहिम पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि अर्पित की। दुनिया उनकी समाज सेवा को हमेशा याद रखेगी।"
विदेश मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वेटिकन सिटी स्थित सेंट पीटर्स बेसिलिका में पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू तथा केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन भी उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में इटली के अपुलिया में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान पोप फ्रांसिस से भेंट की थी। इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने वर्ष 2021 में वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस से मुलाकात की थी, जहां दोनों नेताओं ने कोविड-19 महामारी समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की थी।
Pope Francis last rites: पोप फ्रांसिस का अंतिम संस्कार
पोप फ्रांसिस का 21 अप्रैल को वेटिकन स्थित अपने आवास 'कासा सांता मार्टा' में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वेटिकन के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वे स्ट्रोक के कारण दुनिया को अलविदा कह गए। निधन से एक दिन पहले, ईस्टर संडे के अवसर पर उन्होंने हजारों अनुयायियों को आशीर्वाद दिया था, जबकि चिकित्सकों ने उन्हें सार्वजनिक उपस्थिति से मना किया था। व्हीलचेयर पर बैठे कमजोर पोप फ्रांसिस ने भीड़ को देखकर हाथ हिलाया था, जिसने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।
पोप फ्रांसिस, जो लैटिन अमेरिका से चुने जाने वाले पहले पोप थे और जेसुइट संप्रदाय से आने वाले पहले परमपावन थे, ने एक साधारण अंतिम संस्कार की इच्छा जताई थी। उनकी अंतिम यात्रा के लिए पारंपरिक त्रिस्तरीय (साइप्रस, सीसा और ओक की) ताबूत प्रणाली को छोड़ते हुए, केवल एक साधारण लकड़ी के ताबूत का उपयोग किया गया।
अंतिम संस्कार की रस्में कैमरलेंगो कार्डिनल केविन फैरेल द्वारा संपन्न कराई गईं। कार्डिनल फैरेल, जो आयरलैंड में जन्मे और अमेरिका में नागरिकता प्राप्त कर चुके हैं, पूर्व में डलास के बिशप के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। पोप फ्रांसिस का अंतिम विश्राम स्थल रोम के बाहरी इलाके में स्थित बासीलीका दी सांता मारिया माज्जोरे होगा।
उनका मकबरा लिगूरियन संगमरमर से बनाया गया है, जो उनके परदादा की जड़ों को सम्मानित करता है। मकबरे पर केवल उनके इस्तेमाल किए गए क्रॉस का चिन्ह और 'फ्रांसिस्कुस' (Franciscus) नाम लैटिन में अंकित किया गया है।
Pope Francis last rites में वैश्विक नेताओं की उपस्थिति
पोप फ्रांसिस के अंतिम दर्शन के लिए बीते तीन दिनों में 2.5 लाख से अधिक श्रद्धालु वेटिकन पहुंचे। शुक्रवार को सार्वजनिक दर्शन के समय का समापन हुआ और उनका ताबूत सील कर दिया गया। शनिवार को होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में विश्वभर से प्रमुख नेताओं और राजपरिवारों के सदस्य शामिल हो रहे हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, ब्रिटेन के प्रिंस विलियम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, स्पेन के राजा फेलिप षष्ठम और रानी लेतीजिया तथा ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा समेत 54 राष्ट्राध्यक्ष और 12 शाही परिवारों के सदस्य पोप फ्रांसिस को अंतिम विदाई देंगे।
पोप फ्रांसिस का अंतिम संस्कार स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे) शुरू हुआ और करीब 11:45 बजे (भारतीय समयानुसार लगभग 3:15 बजे) संपन्न हो गया।
Pope Francis को परंपरा से हटकर अंतिम विदाई
पिछले कई दशकों की परंपरा से हटते हुए, पोप फ्रांसिस को वेटिकन की सीमा के बाहर, बासीलीका दी सांता मारिया माज्जोरे में दफनाया जा रहा है। बता दें कि इससे पहले सभी पोप को सेंट पीटर्स बेसिलिका के नीचे दफनाया जाता था। लेकिन पोप फ्रांसिस ने अपने जीवनकाल में एक "सरल" समाधि की इच्छा जताई थी।
पोप फ्रांंसिस ने विशेष आग्रह किया था कि उन्हें वेटिकन से कुछ किलोमीटर दूर स्थित सांता मारिया माज्जोरे में दफनाया जाए, जो उनकी गहन मरियम भक्ति का प्रतीक माना जा रहा है। पोप की इस विनम्र इच्छा का सम्मान करते हुए, वेटिकन ने यह अभूतपूर्व निर्णय लिया।












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