कोरोना योद्धा बनेंगे MBBS अंतिम वर्ष के छात्र, 100 दिन ड्यूटी करने वालों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता
नई दिल्ली, मई 3: देश में कोरोना महामारी का कहर जारी है, जहां रोजाना साढ़े तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इसका सीधा असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है। एक ओर ज्यादातर अस्पतालों में बेड, दवाइयां, ऑक्सीजन की कमी है, तो वहीं दूसरी ओर वायरस की चपेट में आने की वजह से डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ भी कम हो गए हैं। जिसको देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। जिसके तहत एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र भी अब कोविड केस को हैंडल करेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों को फैकल्टी की देखरेख में टेलीकंस्लटेशन और हल्के कोविड मामलों की निगरानी के लिए काम करना पड़ेगा। बीएससी/जीएनएम के योग्य नर्सों का भी पूर्णाकालिक उपयोग किया जाएगा, हालांकि ये सब सीनियर डॉक्टर या फिर नर्सों की देखरेख में होगा। वहीं जिन स्वास्थ्यकर्मियों ने कोविड ड्यूटी में 100 दिन पूरे कर लिए हैं, उन्हें कोविड राष्ट्रीय सेवा सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। बाद में उन्हें सरकारी भर्तियों में प्राथमिकता दी जाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कार्डियक सर्जन डॉक्टर देवी शेट्ठी ने कुछ ट्रेनी डॉक्टरों और नर्सों का काम पर लगाया था, जो अपनी फाइनल परीक्षा या फिर नेशनल लेवल एंट्रेंस टेस्ट का इंतजार कर रहे थे। इसे देखते हुए सरकार ने अब ये कदम उठाया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी कोरोना की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं, उनको भी सरकार बीमा योजना के अंतर्गत कवर करेगी। बताया जा रहा है कि 20 हजार के करीब छात्रों ने पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग पूरी कर ली है, लेकिन परीक्षा में नहीं शामिल हो पाए। ऐसे छात्र परीक्षा छोड़ सकते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें एक साल तक कोविड आईसीयू में ड्यूटी करनी होगी।












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