क्या पीएम मोदी का यूक्रेन जाना कांग्रेस को ना पसंद है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यूक्रेन जा सकते हैं। इस तरह की खबरें आते ही विदेशी मीडिया हैरान है। क्योंकि, इसी महीने पीएम मोदी रूस की सफल यात्रा करके लौटे हैं, जिसके साथ यूक्रेन की जंग चल रही है। देश में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा को लेकर हैरान है।
24 अगस्त को यूक्रेन का नेशनल डे है और संभावना है कि प्रधानमंत्री मोदी 23 अगस्त को इस युद्धग्रस्त देश का दौरा कर सकते हैं। इस खबर के आने के बाद दुनिया भर में यही चर्चा है कि पीएम मोदी ही ऐसे विश्वनेता हैं, जो दो महीने के अंदर ही जंग लड़ रहे दोनों ही देशों की मित्रवत यात्रा का साहस दिखा सकते हैं।

पीएम मोदी के संभावित यूक्रेन दौरे पर कांग्रेस ने कसा तंज
लेकिन, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी इस वैश्विक राजनीति के लिए अहम विषय पर भी चुटकियां लेने में पीछे नहीं है। पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट डालकर इसकी मणिपुर से तुलना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करने की कोशिश की है।
यूक्रेन से पहले या बाद में मणिपुर आने का निमंत्रण मिला?-कांग्रेस
अपने पोस्ट में जयराम रमेश ने लिखा है, 'मणिपुर के मुख्यमंत्री नई दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए, जिसकी अध्यक्षता स्वयंभू 'नॉन-बायलॉजिकल' पीएम ने की। इसके बाद मणिपुर के सीएम ने बीजेपी के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की एक बैठक में भाग लिया, जिसकी अध्यक्षता भी उसी 'देवता' ने की.....'
कांग्रेस महासचिव ने आगे लिखा है, 'मणिपुर के लोग जो सीधा सा सवाल पूछ रहे हैं, वह है- क्या एन बीरेन सिंह नरेंद्र मोदी से अलग से अकेले में मिले और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की, जो कि 3 मई, 2023 की रात से जलना शुरू हुआ था? क्या एन बीरेन सिंह ने नरेंद्र मोदी को मणिपुर यात्रा का निमंत्रण दिया, चाहे उनकी यूक्रेन यात्रा से पहले या बाद।'
मणिपर मुद्दे पर दो-दो बार संसद में स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं पीएम मोदी
मणिपुर में पिछले साल से मेतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस पार्टी लगातार वहां नहीं पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना कर रही है। जबकि, पीएम मोदी कम से कम दो बार मणिपुर की स्थिति पर संसद में विस्तृत बयान देकर वहां जातीय संघर्ष खत्म करने में सबके सहयोग की अपील कर चुके हैं। उन्होंने सबसे गुजारिश की है कि वहां धीरे-धीरे स्थापित हो रही शांति को भड़काने की कोशिश न करें।
जून में ही जी7 के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति से मिल चुके हैं पीएम मोदी
दूसरी तरफ अगर पीएम यूक्रेन की यात्रा पर गए तो यह इस यूरोपीय देश की उनकी यह पहली यात्रा होगी। इसपर रूस ने फरवरी 2022 में ही हमला किया था और तब से लड़ाई चल रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की उन विश्व नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर पीएम मोदी को शुभकामनाएं दी थी।
जून में दोनों नेताओं की इटली में जी7 समिट के दौरान भी मुलाकात हुई थी और दोनों ने द्विपक्षीय मुद्दे पर चर्चा की थी। फिर भी,पीएम मोदी की यह संभावित यूक्रेन यात्रा इसलिए भी वैश्विक राजनीति के नजरिए से अहम मानी जा रही है, क्योंकि जब प्रधानमंत्री रूस गए थे तो जेलेंस्की ने उनकी यात्रा को 'शांति प्रयासों के लिए विनाशकारी झटका' बताया था।
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की रणनीति पर हैरान है दुनिया
पहले तो युद्ध छिड़ने के बाद भारत ने यूक्रेन से जिस तरह से अपने छात्रों और नागरिकों को सुरक्षित निकाला, उसके लिए पूरी दुनिया में पीएम मोदी की वाहवाही हो चुकी है। उसके बाद भारत ने जिस तरह से पश्चिम की आलोचनाओं को दरकिनार करके भी भारत के लिए रूस से तेल आयात जारी रखा, उसने भी ग्लोबल लीडरों को माथा ठनका रखा है।
यही नहीं जब भी संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ किसी प्रस्ताव पर वोटिंग की बारी आई है, भारत ने उससे अनुपस्थित रहकर हमेशा अपने देश के हित को ध्यान में रखने की रणनीति अपनाई है। भारत की यह वैश्विक रणनीति का अब दुनिया भी लोहा मान रही है।
The Chief Minister of Manipur attends the NITI Aayog meeting in New Delhi presided over by the self-anointed non-biological PM.
Then the Manipur CM attends a meeting of BJP CMs and Deputy CMs presided over by the same deity.
The simple question that the people of Manipur are…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 28, 2024












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