PM Modi News: माता-पिता को मुखाग्नि देने के बाद नरेंद्र मोदी ने किया था ये काम, विपक्ष ने भी किया सलाम
PM Modi Mother News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-एक ऐसा नाम, जो सिर्फ भारत की सियासत का चेहरा नहीं, बल्कि कर्तव्य और समर्पण की जीती-जागती मिसाल है। हाल ही में बिहार की एक रैली में उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस पर अपनी दिवंगत मां हीराबेन के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'मां हमारा गौरव है, हमारी ताकत है। लेकिन बिहार में राजद-कांग्रेस के मंच से मेरी मां को गालियां दी गईं। ये सिर्फ मेरी मां का नहीं, बल्कि देश की हर मां का अपमान है।'
इस बयान ने जहां विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया, वहीं एक बार फिर पीएम मोदी की निजी जिंदगी और उनके कर्तव्यनिष्ठा की कहानी सुर्खियों में आ गई। मां-पिता को मुखाग्नि देने के बाद भी उन्होंने जो किया, उसने न सिर्फ देशवासियों का दिल जीता, बल्कि विपक्ष को भी उनके सामने सिर झुकाने पर मजबूर कर दिया। आइए, जानते हैं इस प्रेरक कहानी को, जो हर भारतीय के लिए गर्व का सबब है...

मां के निधन के बाद PM का कर्तव्य पथ
30 दिसंबर 2022 को पीएम मोदी की मां हीराबेन मोदी का 100 साल की उम्र में अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में निधन हो गया। इस दुखद खबर के बाद भी पीएम मोदी ने अपने कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ा। सुबह 3:30 बजे निधन की खबर मिलते ही वो तड़के दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचे। गांधीनगर में अपने छोटे भाई पंकज मोदी के घर जाकर उन्होंने मां के पार्थिव शरीर को प्रणाम किया, अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं और खुद कंधा देकर मां को विदाई दी। गांधीनगर के सेक्टर-30 श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने ट्वीट किया:- 'शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम... मां में तपस्विनी, कर्मयोगी और मूल्यों की प्रतीक थीं।'
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उसी दिन पीएम मोदी को वेस्ट बंगाल में कई विकास परियोजनाओं का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन करना था। निजी शोक को किनारे रखते हुए उन्होंने तय कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कहा, 'मां ने मुझे हमेशा कर्तव्य सिखाया। आज मैं उनके दिखाए रास्ते पर चलूंगा।'इस समर्पण ने हर किसी को हैरान कर दिया। जहां कोई और शायद टूट जाता, वहां पीएम मोदी ने अपने दुख को देशसेवा के सामने छोटा साबित किया।
पिता के निधन में भी दिखा था यही जज्बा
1989 में जब पिता दामोदरदास मूलचंद मोदी का निधन हुआ, तब वो (नरेंद्र मोदी) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक कामों में सक्रिय थे। उस समय उनकी कोई बड़ी राजनीतिक भूमिका नहीं थी, लेकिन उनका कर्तव्यबोध तब भी अटल था। विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन महासचिव दिलीप त्रिवेदी ने एक किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि पिता के निधन की खबर के बाद नरेंद्र मोदी वडनगर गए, अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं, और उसी दिन दोपहर तक अहमदाबाद में BJP की एक अहम मीटिंग में शामिल हो गए।
जब त्रिवेदी ने उनसे पूछा कि इतने बड़े दुख में भी वो मीटिंग में कैसे आए, तो मोदी का जवाब था, 'पिता को विदाई देने के बाद मुझे पार्टी की जिम्मेदारियां भी निभानी थीं।'ये सुनकर सभी कार्यकर्ता हैरान रह गए। ये वो दौर था जब मोदी के पास कोई संवैधानिक पद नहीं था, फिर भी उन्होंने निजी दुख को कभी कर्तव्य पर हावी नहीं होने दिया।
विपक्ष भी हुआ कायल
मां के निधन के बाद पीएम मोदी के इस समर्पण ने विपक्षी नेताओं को भी उनकी तारीफ करने पर मजबूर कर दिया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट किया, 'मां के निधन का दुख असहनीय होता है। पीएम मोदी और उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।'कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी लिखा, 'दुख की इस घड़ी में हमारी प्रार्थनाएं पीएम मोदी और उनके परिवार के साथ हैं।'विपक्ष का ये रुख दिखाता है कि पीएम मोदी का कर्तव्यनिष्ठा भरा रवैया हर किसी को प्रभावित करता है।
क्या बनाता है PM मोदी को खास?
पीएम मोदी अक्सर कहते हैं कि उनकी मां हीराबेन ने उन्हें सादगी, मेहनत और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। चाहे मां का निधन हो या पिता का, उन्होंने कभी अपने निजी दुख को देशसेवा के आड़े नहीं आने दिया। 2014 से लेकर 2025 तक, तीन बार के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मंत्र को जिया। चाहे स्वच्छ भारत मिशन हो, आयुष्मान भारत हो, या जन धन योजना, उनकी योजनाओं ने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदली। उनकी ये कर्तव्यनिष्ठा ही उन्हें न सिर्फ भारत, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक प्रेरक नेता बनाती है।
नरेंद्र मोदी की जिंदगी एक ऐसी किताब है, जिसमें हर पन्ना कर्तव्य, समर्पण और देशप्रेम की कहानी कहता है। मां-पिता को मुखाग्नि देने के बाद भी जिस तरह उन्होंने अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता दी, वो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। और हां, इस जज्बे को देखकर विपक्ष को भी कहना पड़ा-'मोदी है तो मुमकिन है!'
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