राम मंदिर भूमि पूजन में पीएम मोदी ने मुस्लिम बहुल देशों का क्यों लिया नाम

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में भूमि पूजन और शिलान्यास के अवसर पर कहा कि भगवान राम आज भी भारत के बाहर भी दर्जनों देशों की भाषा और संस्कृति में रचे-बसे हैं, लोग उनकी प्रार्थना करते हैं, उनकी पूजा करते हैं। इस दौरान उन्होंने कई मुस्लिम बहुल देशों का भी नाम लिया और उदाहरणों के जरिए बताया कि वहां अभी भी भगवान राम की पूजा होती है। उन्होंने महाकाव्य रामायण के ऐसे कई विभिन्न स्वरूपों को गिनाया, जो वहां की संस्कृति में लोकप्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने भारत में भगवान राम के जरिए रामराज्य का महत्त्व भी समझाने की कोशिश की और कुछ पड़ोसी मुल्कों को राम के नाम पर चलते हुए भी राम की शिक्षा के मुताबिक ही उन्हें इशारों-इशारों में सचेत करने की भी कोशिश की।

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    'मुस्लिम बहुत देशों में भी होती है राम की पूजा'

    'मुस्लिम बहुत देशों में भी होती है राम की पूजा'

    अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन और आधारशिला कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने इस बात की विस्तार से चर्चा की कि दुनिया के वो कौन देश हैं, जहां आज भी भगवान राम पूजनीय हैं। उन्होंने एक लंबा विवरण भी दिया कि महाकाव्य रामायण की तर्ज पर उन देशों में कितने तरह के रामायण प्रचलन में हैं। पीएम मोदी ने कहा, "दुनिया में कितने ही देश राम के नाम का वंदन करते हैं, वहां के नागरिक, खुद को श्रीराम से जुड़ा हुआ मानते हैं। विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या जिस देश में है, वो है इंडोनेशिया। वहां हमारे देश की ही तरह 'काकाविन' रामायण, स्वर्णद्वीप रामायण, योगेश्वर रामायण जैसी कई अनूठी रामायणें हैं। राम आज भी वहां पूजनीय हैं। कंबोडिया में 'रमकेर' रामायण है, लाओ में 'फ्रा लाक फ्रा लाम' रामायण है, मलेशिया में 'हिकायत सेरी राम' तो थाईलैंड में 'रामाकेन'है.... आपको ईरान और चीन में भी राम के प्रसंग तथा राम कथाओं का विवरण मिलेगा।"

    'आखिर राम सबके हैं, सब में हैं'

    'आखिर राम सबके हैं, सब में हैं'

    कुछ मुस्लिम बहुल देशों में भगवान राम की वर्तमान प्रासंगिकता का जिक्र करने के साथ ही पीएम मोदी ने भारत के उन पड़ोसी मुल्कों का भी जिक्र किया, जिसके बिना पूरी रामायण ही अधूरी है। पीएम मोदी बोले कि "श्रीलंका में रामायण की कथा जानकी हरण के नाम सुनाई जाती है और नेपाल का तो राम से आत्मीय संबंध, माता जानकी से जुड़ा है। ऐसे ही दुनिया के और न जाने कितने देश हैं, कितने छोर हैं, जहां की आस्था में या अतीत में, राम किसी न किसी रूप में रचे बसे हैं.... आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं जहां, वहां की भाषा में रामकथा, आज भी प्रचलित है। मुझे विश्वास है कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही होगी। आखिर राम सबके हैं, सब में हैं।"

    रामनगरी से पड़ोसियों को संदेश

    रामनगरी से पड़ोसियों को संदेश

    इस दौरान पीएम मोदी ने बिना किसी पड़ोसी मुल्क का नाम लिए यह भी संदेश दे दिया कि शांति के लिए देश को ताकतवर बने रहना भी जरूरी है। उनके मुताबिक "राम की यही नीति और रीति सदियों से भारत का मार्गदर्शन करती रही है।" उन्होंने बिना कुछ ज्यादा कहे भारत की कूटनीति को एकबार फिर से स्पष्ट करने की कोशिश की है। उनके शब्दों में, " श्रीराम का आह्वान है- 'जौंसभीत आवासरनाई।रखिहंउताहि प्रानकीनाई'। जो शरण में आए,उसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। श्रीराम का सूत्र है- 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी'। अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है।.....ये भी श्रीराम की ही नीति है- 'भयबिनुहोइन प्रीति'। इसलिए, हमारा देश जितना ताकतवर होगा, उतनी ही प्रीति और शांति भी बनी रहेगी।" पीएम मोदी का कहना है कि इन्हीं मंत्रों और सूत्रों की बदौलत महात्मा गांधी ने भी भारत में रामराज्य का सपना देखा था।

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