'पुराने संसद भवन को छोड़ना भावुक पल', लोकसभा को पीएम मोदी ने किया संबोधित, जानें उनके भाषण की अहम बातें
Big points of PM Modi speech: संसद का विशेष सत्र सोमवार से शुरू हुआ। इसका पहला दिन पुराने संसद भवन में आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे। उन्होंने लोकसभा को संबोधित भी किया, साथ ही पुराने भवन की उपलब्धियां गिनाईं। आइए जानते हैं पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें-

- पीएम मोदी ने कहा कि देश की 75 वर्षों की संसदीय यात्रा इसका एक बार पुनः स्मरण करने के लिए और नए सदन में जाने से पहले उन प्रेरक पलों को, इतिहास की महत्वपूर्ण घड़ी को स्मरण करते हुए आगे बढ़ने का अवसर है। हम सब इस ऐतिहासिक भवन से विदा ले रहे हैं।
- इस इमारत (पुराने संसद भवन) के निर्माण करने का निर्णय विदेश शासकों का था लेकिन ये बात हम ना कभी भूल सकते हैं और हम गर्व से कह सकते हैं, इस भवन के निर्माण में पसीना मेरे देशवासियों का लगा था, परिश्रम मेरे देशवासियों का लगा था और पैसे भी मेरे देश के लोगों के थे। आजादी के पहले ये सदन इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल का स्थान हुआ करता था। आजादी के बाद इसे संसद भवन के रूप में पहचान मिली।
- पीएम ने कहा कि हम सभी सदन को छोड़कर जा रहे हैं, ये हमारे लिए भावुक पल। परिवार भी अगर पुराना घर छोड़कर नए घर जाता है तो बहुत सारी यादें उसे कुछ पल के लिए झकझोर देती हैं और हम यह सदन को छोड़कर जा रहे हैं तो हमारा मन मस्तिष्क भी उन भावनाओं से भरा हुआ है और अनेक यादों से भरा हुआ है।
- पीएम मोदी ने G20 की सफलता को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। G-20 की सफलता देश के 140 करोड़ नागरिकों की सफलता है। ये भारत की सफलता है, किसी व्यक्ति या पार्टी की नहीं...ये हम सभी के लिए जश्न मनाने का विषय है।
- मैं पहली बार जब संसद का सदस्य बना और पहली बार एक सांसद के रूप में इस भवन में जब मैंने प्रवेश किया तो सहज रूप से इस सदन के द्वार पर अपना शीश झुकाकर अपना पहला कदम रखा था, वो पल मेरे लिए भावनाओं से भरा हुआ था।
- पीएम ने भारतीय लोकतंत्र की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ये लोकतंत्र की ही ताकत है कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजारा करने वाला एक गरीब बच्चा संसद पहुंच गया। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे इतना प्यार और सम्मान मिलेगा। वहीं 2001 में संसद भवन पर हमला हुआ था। उस पर पीएम मोदी ने कहा कि मैं उस हमले से सदन को बचाने वाले जवानों को नमन करता हूं।
- अटलजी और पंडित नेहरू के आवाज की गूंज आज भी सदन में जिंदा है। पंडित नेहरू की गूंज आज भी हमें दिशा देती है। इसी सदन ने इमरजेंसी भी देखी। सभी स्पीकर्स को भी मैं नमन करता हूं।
- हम सदन के कर्मचारियों के योगदान को भी नहीं भुला सकते हैं। पत्रकारों के कलम में दर्पण का भाव रहा है।
- इसी भवन में दो साल 11 महीने तक संविधान सभा की बैठकें हुईं और देश के लिए एक मार्ग दर्शक जो आज भी हमें चलाते हैं, उन्होंने हमें संविधान दिया। हमारा संविधान लागू हुआ, इन 75 वर्षों में सबसे बड़ी उपलब्धि देश के सामान्य मानवीय का इस संसद पर विश्वास बढ़ना रहा है।












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