PM-eBus Sewa Scheme: गुजरात को मिला इलेक्ट्रिक तोहफा, भावनगर को पीएम ने दी 50 ई-बसों की सौगात
PM-eBus Sewa Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में ₹5,450 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन के साथ गुजरात के भावनगर को एक बड़ी सौगात दी है। पीएम-ई-बस सेवा योजना (PM-eBus Sewa) के तहत भावनगर को 50 इलेक्ट्रिक बसें सौंपी गई हैं। यह कदम न सिर्फ शहर में प्रदूषण कम करेगा बल्कि लोगों के सफर को भी आरामदायक बनाएगा।
भावनगर गुजरात का पहला ऐसा शहर बन गया है जहां इस योजना के तहत बसें चलना शुरू हुई हैं। यह भारत को स्वच्छ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है।

क्या है पीएम-ई-बस सेवा और इसका मकसद?
यह योजना केंद्र सरकार की एक शानदार पहल है जिसका लक्ष्य शहरों में पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली बसों की जगह 'क्लीन और ग्रीन' इलेक्ट्रिक बसें लाना है। इसके पहले चरण में नागपुर, चंडीगढ़ और गुवाहाटी जैसे शहरों को चुना गया है। गुजरात में इसे लागू करने की जिम्मेदारी 'गुजरात अर्बन डेवलपमेंट मिशन' को दी गई है। मकसद साफ है-शहरों में शोर और धुंआ कम करना और आम आदमी को एक ऐसी बस सेवा देना जो सस्ती भी हो और पर्यावरण के लिए सही भी।
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Electric bus service in Gujarat: भावनगर को क्यों मिली प्राथमिकता?
भावनगर के लिए कुल 100 बसों का प्लान है, जिनमें से 50 बसें अब सड़कों पर उतर चुकी हैं। इससे शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम काफी मजबूत होगा। ये बसें पूरी तरह एयर-कंडीशंड (AC) हैं, जिससे गर्मियों में सफर आसान होगा। साथ ही, सुरक्षा के लिए इनमें CCTV कैमरे लगे हैं और दिव्यांगों के लिए खास डिजाइन तैयार किया गया है ताकि उन्हें चढ़ने-उतरने में दिक्कत न हो। भावनगर इस मामले में गुजरात के बाकी शहरों के लिए एक मिसाल पेश कर रहा है।
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Narendra Modi Assam visit: गुजरात के 8 शहरों में दौड़ेगी इलेक्ट्रिक बसें
भावनगर तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में गुजरात के 8 प्रमुख शहरों में कुल 750 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। वडोदरा को सबसे ज्यादा 250 बसें मिलेंगी, जबकि राजकोट, गांधीनगर और जामनगर जैसे शहरों में भी ई-बसों का जाल बिछाया जाएगा। गांधीधाम और नवसारी जैसे छोटे शहरों को भी इस योजना से जोड़ा गया है। गुजरात सरकार इसके लिए जरूरी चार्जिंग स्टेशन और तकनीकी ढांचा (Infrastructure) तैयार करने में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी आगे चल रही है।
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पर्यावरण और भविष्य की ओर एक बड़ा कदम
यह सिर्फ बसें चलाने की बात नहीं है, बल्कि ग्लोबल वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की जंग का एक हिस्सा है। डीजल बसों की जगह बिजली से चलने वाली ये बसें कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करेंगी। राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे इन प्रयासों से न केवल शहरों की हवा साफ होगी, बल्कि नई तकनीक आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह पहल हमें एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रही है जहां हमारा सफर सुरक्षित, आधुनिक और पूरी तरह ईको-फ्रेंडली होगा।
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