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PM Modi Assam Visit 2026: PM मोदी ने पूर्वोत्तर को दिया पहला ELF नेशनल हाईवे,क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी

PM Modi Assam Visit 2026: 14 फरवरी 2026 की सुबह असम के आकाश में भारतीय वायुसेना का पराक्रम देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास (NH-37) पर बने देश के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक प्रोजेक्ट्स में से एक इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (Emergency Landing Facility Technology- ELF) का उद्घाटन किया।

यह पूर्वोत्तर भारत का पहला ऐसा हाईवे-रनवे है, जो युद्ध या आपदा की स्थिति में लड़ाकू विमानों और भारी मालवाहक जहाजों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करेगा। विस्तार से और आसान भाषा में जानिए कितना खास है ये प्रोजेक्ट...

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Northeast First Highway Airstrip पर सुखोई और राफेल का 40 मिनट के 'शक्ति प्रदर्शन'

उद्घाटन के बाद वायुसेना ने अपनी युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया। मात्र 30 मिनट के भीतर 16 लड़ाकू विमानों ने इस रनवे पर 'टच-एंड-गो' (छूकर उड़ जाना) का अभ्यास किया। फ्रांस से आए घातक राफेल (Rafale) और भारत के भरोसेमंद सुखोई Su-30MKI ने हाईवे से टेकऑफ कर उपस्थित लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। इनके अलावा डॉर्नियर और AN-32 जैसे ट्रांसपोर्ट विमानों ने भी अपनी क्षमता दिखाई। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने प्रधानमंत्री को इस फैसिलिटी के महत्व और भविष्य की रणनीतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

Moran Bypass Emergency Landing Facility: क्यों खास है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी?

भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय में तैयार की गई इस सुविधा की खासियतें हैं। रणनीतिक महत्व से देखा जाए तो यह चीन और म्यांमार सीमा (India China Border Strategic Airstrip) पर पैनी नजर रखेगा। मोरान बाईपास पर बनी यह सुविधा भारत के लिए किसी 'ब्रह्मास्त्र' से कम नहीं है। यह एयरस्ट्रिप चीन की सीमा से लगभग 300 किलोमीटर दूर और म्यांमार बॉर्डर से इसकी दूरी मात्र 200 किलोमीटर है।

यदि युद्ध की स्थिति में पास के एयरबेस (जैसे चाबुआ या डिब्रूगढ़) पर दुश्मन हमला करता है, तो वायुसेना इस हाईवे का उपयोग करके अपनी ऑपरेशन्स जारी रख सकती है। 40 टन तक के फाइटर जेट की सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता रखता है और इस पर 74 टन तक वजन वाले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का संचालन संभव हो है।

युद्ध की स्थिति में अगर दुश्मन मुख्य एयरबेस के रनवे को नुकसान पहुँचाता है, तो यह 'जीरो-पिक्स' तकनीक वाला हाईवे महज कुछ ही घंटों में एक पूर्ण कार्यात्मक युद्धक हवाई पट्टी में बदला जा सकता है।

Moran Bypass Emergency Landing Facility की कितनी है निर्माण लागत?

डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर बनी यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) केवल एक सड़क नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है। इसे भारतीय वायुसेना (IAF) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मिलकर तैयार किया है।

1. निर्माण की लागत और ढांचा

इस विशेष एयरस्ट्रिप को तैयार करने में लगभग 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया गया है। यह उस बड़े हाईवे प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिस पर कुल ₹765 करोड़ से अधिक खर्च हुए हैं। इसकी मुख्य एयरस्ट्रिप 4.2 किलोमीटर लंबी और लगभग 33 मीटर चौड़ी है। इसे 'रिइन्फोर्स्ड कंक्रीट' (Reinforced Concrete) तकनीक से बनाया गया है। सामान्य हाईवे के मुकाबले इसकी परतें काफी मोटी और सघन हैं ताकि 74 टन वजनी विमानों के लैंडिंग प्रेशर को झेल सके।

2. विशेष तकनीकी विशेषताएं

नो डिवाइडर ज़ोन रखा गया है। इस 4.2 किमी के हिस्से में कोई स्थायी सेंट्रल डिवाइडर (बीच की पट्टी) नहीं है। विमानों की आवाजाही के लिए इसे पूरी तरह समतल रखा गया है। स्ट्रिप के दोनों सिरों पर 40x180 मीटर के दो बड़े पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जहाँ लैंडिंग के बाद विमानों को खड़ा किया जा सकता है।

एयरस्ट्रिप के दोनों तरफ समानांतर सर्विस रोड बनाई गई हैं, ताकि विमानों के ऑपरेशन के दौरान नागरिक यातायात बाधित न हो और उसे डायवर्ट किया जा सके। यहां एक पोर्टेबल एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) केबिन की व्यवस्था है। साथ ही, जानवरों या अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए दोनों तरफ विशेष फेंसिंग (बाड़) लगाई गई है।

3. भार क्षमता (Load Bearing Capacity)

यह एयरस्ट्रिप 'ड्यूल-यूज़' (Dual-use) इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो निम्नलिखित क्षमता रखता है:

फाइटर जेट्स: सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे 40 टन तक के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए सक्षम।

ट्रांसपोर्ट विमान: C-130J सुपर हरक्यूलिस और C-17 ग्लोबमास्टर जैसे 74 टन वजनी विशाल विमानों को संभालने की शक्ति।

4. सामरिक महत्व की तकनीक

चूंकि यह इलाका सीस्मिक ज़ोन (भूकंप प्रभावित क्षेत्र) में आता है, इसलिए इसके निर्माण में ऐसी सामग्री का उपयोग किया गया है जो झटकों को सोख सके। इसे बनाने में उसी 'एक्सप्रेसवे मॉडल' का पालन किया गया है, जिसका उपयोग यूपी के पूर्वांचल और राजस्थान के बाड़मेर (NH-925A) एयरस्ट्रिप में किया गया था।

पूर्वोत्तर के लिए बड़ा संदेश

मोरान इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सरकार पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा, विकास और रणनीतिक मजबूती को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यह परियोजना आने वाले समय में न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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