तस्वीरों में: दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की जीवन सफर

नयी दिल्ली। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और महाराष्ट्र बीजेपी के दिग्गज नेता गोपीनाथ मुंडे का नई दिल्ली में सड़क हादसे में निधन हो गया। 64 साल के मुंडे ने दिल्ली के एम्स के ट्रामा सेंटर में अपनी अंतिम सांस ली। महज 8 दिन पहले ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली थी। नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें

ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया था। उनके शानदार राजनीतिक करियर को देखते हुए उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय जैसा अहम विभाग सौंपा गया था। वे 40 साल से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे और 34 साल से चुनकर आ रहे थे। इसे विडंबना ही कहेंगे कि मुंडे उसी प्रमोद महाजन परिवार से थे, जो ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसों का शिकार होता रहा है। गोपीनाथ मुंडे का राजनीतिक करियर बेदाग रहा। ओबीसी तबके में उनकी मजबूत पकड़ ने संगठन के इतने करीब ला दिया था। नीचे के स्लाइट्स में तस्वीरों के जरिए हमने गोपीनाथ मुंडे काे राजनीतिक सफर को दिखाने की कोशिश की हैं।

नहीं रहे मुंडे

नहीं रहे मुंडे

गोपीनाथ मुंडे का जन्म महाराष्ट्र के परली में 12 दिसंबर 1949 को हुआ था। गरीबी और अभाव में उनका बचपन बीता, लेकिन उनकी हिम्मत हमेशा कायम रहीं। उनके इसी साहस ने उन्हें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और केन्द्र में कैबिनेट मंत्री के कुर्सी तक लेकर आई। मुंडे महाराष्ट्र राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे। जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका रिश्ता बहुत पुराना था।

अभाव में बिता बचपन

अभाव में बिता बचपन

गोपीनाथ मुंडे की पहचान एक किसान नेता के तौर पर रहीं। उनके माता-पिता पांडुरंग मुंडे और लिम्बाबी मुंडे साधारण किसान थे। उनकी यहीं पहचान बाद में उनकी ताकत बन गई। किसान परिवार से जुड़े होने के कारण महाराष्ट्र में उनकी जबरदस्त पकड़ थी।

सादा जीवन उच्च विचार

सादा जीवन उच्च विचार

मुंडे की कॉलेज में प्रमोद महाजन से मुलाकात हुई। महाजन के कहने पर ही वो बीजेपी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हो गए। बाद में मुंडे ने प्रमोद महाजन की बहन प्रादनया से शादी भी की।

आपातकाल में गए थे जेल

आपातकाल में गए थे जेल

आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से मुंडे को नासिक सेंट्रल जेल में डाल दिया गया था और इमर्जेंसी हटाए जाने तक वह जेल में ही रहे। जेल से लौटने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरु किया। जनता पार्टी के विघटन के बाद जब बीजेपी अस्तित्व में आई तो उन्हें महाराष्ट्र में पार्टी के युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया।

साहस के भरपूर थे मुंडे

साहस के भरपूर थे मुंडे

मुंडे महाराष्ट्र में पांच बार विधायक रहे। पहली बार 1980 वो विधायक बनें। 1992 से 1995 तक वह विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे और जब 1995 में बीजेपी-शिवसेना की सरकार बनी तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वह 1995-1999 तक उप मुख्यमंत्री रहे।

निम्न वर्ग के लोगों पर पकड़

निम्न वर्ग के लोगों पर पकड़

मुंडे 2009 से बीड लोकसभा संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीते और पार्टी ने उन्हें लोकसभा में उपनेता बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई। महाराष्ट३ के ओबीसी वर्ग के आने के कारण उनकी निम्न वर्ग के लोगों पर गजब की पकड़ थी।

परिवार और काम के बीच रखी दूरी

परिवार और काम के बीच रखी दूरी

मुंडे की तीन बेटियां हैं। पंकजा मुंडे, प्रीतम मुंडे और यशाशिरी मुंडे हैं। पंकजा एमएलए हैं, प्रीतम डॉक्टर हैं और यशाशिरी लॉ की स्टूडेंट हैं। उन्होंने हमेशा से अपने परिवार को अपनी राजनीति से दूर रखा है, हलांकि उनकी बड़ी बेटी पंकजा विधायक हैं।

सहज और सौम्य स्वभाव

सहज और सौम्य स्वभाव

मुंडे का सव्भाग सहज और सैौम्य था। गरीबी में जीवन बीताने के कारण उनके दिल में गरीबों के लिए बहुत प्यार था। उनके इसी स्वभाव को देखते हुए उन्हें नरेन्द्र मोदी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

राजेश खन्ना के सुपरफैन

राजेश खन्ना के सुपरफैन

गोपीनाथ मुंडे फिल्मों के बड़े शौकीन थे। राजेश खन्ना की हर फिल्म पहले दिन पहले शो में देखा करते थे।इस बारे में मुंडे ने खुद खुलासा करते हुए बताया था कि वे सुपरस्टार राजेश खन्ना की हर फिल्म देखा करते थे। उन्होंने बताया था कि अपनी युवा अवस्था में राजेश खन्ना की हर फिल्म पहले दिन पहले शो में देखी है।

नहीं रहें मुंडे

नहीं रहें मुंडे

मोदी मंत्रिमंडल में मुंडे को बेहद महत्वपूर्ण ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था। उनकी पहचान जमीन से जुड़े एक कर्मठ नेता के रूप में थी। वह एक राजनेता के साथ-साथ कृषक भी थे। महाराष्ट्र में भाजपा की ओर से एकमात्र भीड़ जुटाने वाले नेता के तौर पर विख्यात मुंडे ओबीसी से आते हैं।

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