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Periyar photo Removed: पीएम मोदी की रैली से पहले हटाई गई पेरियार की मूर्ति, तमिलनाडु चुनाव से पहले बवाल!

Periyar Photo Removed: मदुरै में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से ठीक पहले एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। तमिलनाडु की राजनीति में पेरियार की बड़ी भूमिका रही है। डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही पार्टियां उनकी विचारधारा पर चलने का दावा करती है। हालांकि, एनडीए में शामिल होने के बाद ऐसा लग रहा है कि एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है। मदुरै में पीएम की रैली से पहले पेरियार की फोटो हटा दी गई है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सम्मेलन के प्रवेश द्वार पर पेरियार ई.वी. रामास्वामी की तस्वीर को अचानक हटा दिया गया। इस पर राजनीतिक संग्राम शुरू हो गया है। विपक्षी पार्टियां इसे एआईएडीएमके का बीजेपी की विचारधारा के सामने समर्पण बता रही है। बता दें कि इससे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई भी कह चुके हैं कि बीजेपी की सरकार बनी, तो मंदिर के सामने से पेरियार की प्रतिमा हटाई जाएगी।

Periyar Photo Removed

Periyar Photo Removed: द्रविड़ विचारधारा पर होगा चुनाव?

पेरियार को द्रविड़ आंदोलन के जनक के रूप में जाना जाता है और तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रतीक हैं। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन में शामिल AIADMK पेरियार की विचारधारा को मानती है और इस वजह से पहले यह तस्वीर लगाई गई थी। बताया जा रहा है कि इसे हटाने का फैसला बीजेपी की ओर से लिया गया है। बीजेपी राज्य में द्रविड़ विचारधारा के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तमिलनाडु में कुछ ही महीने में चुनाव होने वाले हैं।

BJP पहले भी पेरियार की मूर्ति पर दिखा चुकी है सख्त रुख

बता दें कि तमिलनाडु में बीजेपी के बड़े नेताओं में शुमार अन्नामलाई ने कुछ साल पहले खुले तौर पर कहा था कि 2026 विधानसभा चुनावों में पेरियार की मूर्तियों को हटाना प्रमुख चुनावी मुद्दा होगा। खास तौर पर मंदिरों के सामने लगी मूर्तियां। अन्नामलाई का यह बयान पहले भी विवादास्पद रहा है। उन्होंने एक सभा में कहा था कि डीएमके ने 1967 में पेरियार के विचारों वाले बोर्ड मंदिरों के बाहर लगाए थे। ये विचार पूरी तरह से सनातन धर्म विरोधी थे।

Tamil Nadu Elections 2026 में पेरियार के विचार बनेंगे मुद्दा?

- बीजेपी जहां मंदिरों के सामने पेरियार की मूर्तियों को हटाने को हिंदू चेतना की रक्षा बताती है, तो डीएमके और इंडिया गठबंधन के दल इसे द्रविड़ विरासत पर हमला बताते रहे हैं।

- वर्तमान में जमीन पर कोई सरकारी मूर्ति नहीं हटाई गई है, लेकिन चुनावी रैलियों और गठबंधन बैठकों में पेरियार के प्रतीकों का इस्तेमाल या हटाना बड़ा तनाव पैदा कर सकता है।

AIADMK खुद द्रविड़ विचारधारा का असली अनुयायी बताी है, लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन की वजह से इस मामले पर फंस गई है। इस चुनाव में ऐसा लग रहा है कि पेरियार की मूर्तियां और विचार एक मुद्दा बन सकते हैं।

PM Modi की रैली पर रहेगी डीएमके और कांग्रेस की नजर

डीएमके इसे बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति बता रही है, जबकि बीजेपी इसे हिंदू सेंटिमेंट्स से जोड़ रही है।मदुरै की यह घटना मोदी की रैली को और हाईलाइट कर रही है, जहां बीजेपी तमिलनाडु में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेरियार विवाद डीएमके और AIADMK के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बीजेपी को भी इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। राज्य में द्रविड़ पहचान मजबूत है, और पेरियार को छूना जोखिम भरा है। कुल मिलाकर, यह विवाद 2026 चुनावों को और दिलचस्प बना रहा है, जहां विकास, अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक मुद्दे भी अहम होंगे।

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