हिमाचलः देवता के नाम पर 70 साल की महिला के मुंह पर कालिख पोती, पिटाई

प्रतीकात्मक तस्वीर
Reuters
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हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में 70 साल की बुज़ुर्ग महिला पर जादू-टोना करने का आरोप लगाकर बदसलूकी करने का मामला सामने आया है.

कुछ ग्रामीणों ने इन बुज़ुर्ग महिला को पीटा, जूतों की माला पहनाई और चेहरा काला करके घुमाया. सरकाघाट के समाहला गांव में हुई इस बर्बर घटना के बाद महिला सदमे में हैं.

पूरे प्रदेश में इस घटना को लेकर नाराज़गी और ग़ुस्सा देखने को मिल रहा है. पीड़ित महिला अभी अपनी बेटी के पास हमीरपुर चली गई हैं मगर अभी भी सदमे में हैं.

बेटी के मुताबिक़, उन्होंने पिछले 48 घंटों से एक शब्द भी नहीं कहा है और खाना भी बमुश्किल खाया है. बेटी भी यक़ीन नहीं कर पा रहे कि कैसे उनकी विधवा मां के साथ गांव के ही लोगों ने यह बर्बरता की.

यह घटना 6 नवंबर को हुई थी मगर जब तक इसका वीडियो फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप पर वायरल नहीं हुआ, तब तक प्रशासन और पुलिस की ओर से किसी ने पीड़ित की सुध नहीं ली.

सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए मंडी के एसपी गुरदेव चंद शर्मा को दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने को कहा.

एसपी ने गुरदेव चंद शर्मा ने बताया, "पुलिस के पास वीडियो है और मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है. हम आरोपियों की पहचान कर रहे हैं और उसके बाद क़ानूनन कार्रवाई करेंगे. ऐसा कहा जा रहा है कि यह घटना स्थानीय देवता के गूर (शामन या पुजारी) के इशारे पर हुई थी."

क्या हुआ महिला के साथ

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 21 लोगों को गिरफ़्तार किया है जिनमें से सात महिलाएं हैं. पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 452, 435, 355 और 427 के तहत नौ नवंबर को सरकाघाट थाने में एफ़आईआऱ नंबर 184/2019 में रजिस्टर की है.

स्थानीय देवता को मानने वाले लोगों की ओर से प्रतिक्रिया की आशंका को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने इलाक़े में धारा 144 लगा दी है क्योंकि घटना का मुख्य अभियुक्त देवता का केयरटेकर है.

वीडियो में महिला को अपमानित और प्रताड़ित करने के हिला देने वाले दृश्य हैं. वह गिड़गिड़ा रही थीं मगर भीड़ में से कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया.

इस घटना की दिल दहला देने वाली बात ये है कि जिस समय लोग इन्हें पीट रहे थे, थप्पड़ मार रहे थे और सड़कों पर घसीट रहे थे, तब वे ढोल-नगाडों और घंटियों की आवाज़ के बीच एक स्थानीय देवता की जय-जयकार कर रहे थे.

मंडी के डिप्टी कमिश्नर ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर ने बीबीसी हिंदी को बताया, "लोगों ने ये सब इसलिए किया ताकि इस वाहियात कृत्य को आस्था और देव संस्कृति का रंग देकर बचा जा सके. देव समाज पहले ही कह चुका है कि इस घटना का देवता या देवता के आदेश से कोई लेना देना नहीं है."

कैसे और क्यों हुई घटना

मंडी हिमाचल प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा ज़िला है और प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी यहीं से हैं.

यहां की सरकाघाट तहसील के समाहला गांव में रहने वालीं पीड़िता 25 साल की उम्र में विधवा हो गई थीं. उनके पति 10 डोगरा रेजिमेंट में थे और 1971 की लड़ाई में हिस्सा ले चुके थे. उनका सेना से रिटायर होने के कुछ ही समय बाद 37 साल की उम्र में निधन हो गया था.

70 साल की इन बुज़ुर्ग महिला की एक बेटी है जिसकी शादी हो चुकी है. धार्मिक प्रवृति की यह महिला अपने घर में अकेली रहती हैं.

सवाल उठता है कि परेशान कर देने वाले ये घटना आख़िर कैसे और क्यों हुई? दरअसल स्थानीय देवता के कुछ भक्तों ने अफ़वाहें फैलाईं की बुज़ुर्ग महिला काला जादू करती है.

महिला ने पिछले महीने स्थानीय ग्राम पंचायत में कुछ लोगों का नाम लेकर शिकायत दी थी. मगर वहां कुछ लोगों ने महिला के शिकायत पत्र को भी फाड़ दिया गया था. पंचायत में शिकायत देने से भड़के लोगों ने महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था.

मंडी के डीसी ने माना, "इस शिकायत पर कोई प्रगति नहीं हुई क्योंकि शायद महिला के रिश्तेदार भी साज़िश करने वालों से जूझना नहीं चाहते थे."

मगर ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि पुलिस को जानकारी मिल गई थी कि गांव के लोगों ने विधवा को बदनाम करने के लिए अभियान छेड़ा हुआ है मगर उसने कोई क़दम नहीं उठाया.

इससे पहले अभियुक्तों ने महिला के घर को जलाने की कोशिश भी की थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना के पीछे गांव के उन लोगों का हाथ हो सकता है जिनकी निगाहें महिला की संपत्ति पर है.

हर कोई हैरान

मंडी जिले की सबसे युवा प्रधान थरजून पंचायत की प्रधान जबना चौहान ने कहा, "सरकाघाट साक्षरता, जागरूकता के लिए पहचाना जाता है औऱ यहां के पुरुष और महिलाएं राज्य से लेकर केंद्र तक की सरकारी नौकरियों में हैं. बड़ी संख्या में लोग भारतीय सेना और पैरामिलिट्री में भी हैं. इस इलाक़े में ऐसी घटना इलाक़े में ऐसी घटना चौंकाने वाली और शर्मनाक है."

ग़ुस्से में उन्होंने कहा, "विधवा पर लगाए गए जादू-टोने के आरोप फर्जी और मूर्खतापूर्ण हैं. हैरान हूं कि क्यों पुलिस ने इस बात का संज्ञान नहीं लिया. अगर मेरी पंचायत में ऐसा होता तो इस उम्र की महिला के साथ ऐसी बर्बरता हुई होती तो ऐसा करने वालों की टांगें तोड़ देती. शिक्षा के प्रसार, आईटी क्रांति, ग्रामीण एवं महिला सशक्तीकरण के बाद हम कहां जा रहे हैं?"

सरकाघाट से आने वाले स्थानीय पत्रकार राजेश मंढोतरा ने कहा, "इस घटना पर मैं भी हैरान हूं. मेरे इलाक़े में न तो देव संस्कृति का ज़्यादा प्रभाव है और न ही जादू-टोने की घटनाओं के बारे में सुना. एक शिक्षित समाज कैसे इस तरह की घटना को अंजाम देने पर उतर आया, मेरे हिसाब से तो ये शोध का विषय है."

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देव संस्कृति और जादू-टोना

मंडी के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि इस पहलू पर अध्ययन करने के लिए एक टीम भेजी गई है कि कहीं पहले भी इस इलाक़े में ऐसी घटनाएं तो नहीं हुईं.

कुल्लू, चंबा, सिरमौर और शिमला जैसे ज़िलों में देवता संस्कृति का बहुत प्रभाव है. कुछ साल पहले तक तांत्रिक क्रियाओं और जादू-टोने की घटनाएं भी सामने आती थीं.

सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी अरविंद शारदा कहते हैं, "हाल के सालों में मैंने नहीं सुना कि इन ज़िलों में भी कहीं पुलिस के पास इस तरह का मामला सामने आया हो."

मंडी के डिप्टी कमिश्नर ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर कहते हैं, "मंडी का धार्मिक संगठन 'देव समाज' सोमवार को बैठक करने जा रहा है. देव समाज ने कहा है कि इस घटना में किसी देवता का कोई प्रभाव नहीं है. हम भी इस घटना के कारण पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं."

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