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Lok Sabha से माइनिंग सेक्टर से जुड़ा बिल पारित, प्राइवेट सेक्टर की एंट्री का रास्ता साफ

सरकार ने Lok Sabha से परमाणु खनिजों के खनन की अनुमति देने वाला विधेयक पारित कराया है। संसद के मॉनसून सेशन में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023 पारित होने के बाद निजी क्षेत्र को लिथियम खनन की अनुमति मिलेगी।

बिल के कानून की शक्ल लेने के बाद माइनिंग में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को लिथियम सहित छह परमाणु खनिजों और सोने और चांदी जैसे गहरे खनिजों के खनन की अनुमति मिल जाएगी।

Lok Sabha

बता दें कि मणिपुर मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों की लगातार नारेबाजी के बीच खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023 लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हुआ।

विधेयक में निजी क्षेत्र को 12 परमाणु खनिजों में से छह के खनन की अनुमति देने का प्रावधान है। मौजूदा अधिनियम के तहत, सभी 12 परमाणु खनिज सरकार के स्वामित्व वाली संस्थाओं द्वारा खनन और अन्वेषण के लिए आरक्षित हैं।

निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने वाले परमाणु खनिज लिथियम की माइन इसलिए भी अहम है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य ऊर्जा भंडारण उपकरणों में बैटरी के निर्माण में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।

इसके अलावा बेरिलियम, नाइओबियम, टाइटेनियम, टैंटलम और ज़िरकोनियम के खनन में भी प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को परमिशन दी गई है। बिल के मकसद के बारे में कहा गया, विधेयक भारत की शुद्ध-जीरो उत्सर्जन प्रतिबद्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

बिल के उद्देश्यों और कारणों पर सरकार ने कहा, "इन खनिजों का अंतरिक्ष उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार, ऊर्जा क्षेत्र, इलेक्ट्रिक बैटरी में विभिन्न अनुप्रयोग हैं। इन खनिजों की खोज और खनन अब निजी क्षेत्र की कंपनियां भी कर सकेंगी।

सरकार का मानना है कि प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुलने पर देश में इन खनिजों की खोज और खनन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। यह विधेयक केंद्र सरकार को कुछ महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विशेष रूप से खनन पट्टे और मिश्रित लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार भी देता है।

गौरतलब है कि धऱती की गहराई में मौजूद खनिजों में सोना, चांदी, तांबा, जस्ता, सीसा, निकल, कोबाल्ट, प्लैटिनम समूह के खनिज, हीरे आदि शामिल हैं। इनका पता लगाना और खनन करना सतही या थोक खनिजों की तुलना में कठिन और महंगा है।

विधेयक से जुड़े सरकारी बयान में कहा गया, "वर्तमान में कुल खनिज उत्पादन में गहरे खनिजों की हिस्सेदारी कम है। देश ज्यादातर इन खनिजों के आयात पर निर्भर है। प्रस्तावित अन्वेषण लाइसेंस महत्वपूर्ण और गहरे खनिज अन्वेषण के सभी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा।

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विधेयक में संशोधन 'गेम चेंजर' होगा। जोशी ने कहा, "अब तक हम केवल 2 प्रकार के लाइसेंस दे रहे थे - समग्र और खनन लाइसेंस। अब हम पारदर्शी नीलामी मार्ग के माध्यम से अन्वेषण लाइसेंस लाए हैं।"

उन्होंने कहा कि भारत इस साल 1 बिलियन टन कोयले का उत्पादन करेगा जो देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना देगा। प्रह्लाद जोशी के अनुसार, "पहले हम केवल कोयला आयात के बारे में बात कर रहे थे, अब हम सोच रहे हैं कि 2025-26 तक हम थर्मल कोयले का आयात बंद कर देंगे।"

मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि समुद्र तटीय रेत खनिजों का खनन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए आरक्षित किया जाएगा। समुद्र तट के रेत खनिजों में इल्मेनाइट, रूटाइल, ल्यूकोक्सिन, गार्नेट, मोनाजाइट, जिरकोन और सिलिमेनाइट शामिल हैं।

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