Parliament Monsoon Session Day 4: 'हमें SIR पर जवाब चाहिए', कांग्रेस सांसद ने किया Tweet, भारी हंगामे के आसार

Parliament Monsoon Session Day 4: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार यानी कि 21 जुलाई से तो हुई है लेकिन तीन दिनों से विपक्ष के हंगामे की वजह से संसद ठीक से चल नहीं पाई है। विपक्ष की नारेबाजी के कारण सदन को बार-बार स्थगित करना पड़ रहा है।

आज भी संसद में हंगामे के आसार हैं क्योंकि कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने Tweet किया है कि 'आज हम एक बार फिर लोकसभा में SIR का मसला उठाएंगे, इंडिया गठबंधन लोकतंत्र पर इस हमले पर तत्काल चर्चा की मांग करता है, बिहार में 52 लाख लोगों को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया है, संसद से पहले हम आज सुबह 10:30 बजे मक्का द्वार (संसद के बाहर) पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।'

Parliament Monsoon Session Day 4

आपको बता दें कि मंगलवार को भी इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने बिहार में वोटर्स लिस्ट की जांच, स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल हुए थे।

AAP सांसद संजय सिंह ने दिया स्थगन प्रस्ताव

केवल कांग्रेस ही नही AAP सांसद संजय सिंह ने भी नियम 267 के तहत राज्यसभा में कार्य स्थगन नोटिस दिया है, उन्होंने भी बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के संवैधानिक और चुनावी निहितार्थ पर चर्चा की मांग की है।

क्या है स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR)?

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision and Checking of Voters List) चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को सुधारना और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना लेकिन यह प्रक्रिया अब एक राजनीतिक मुद्दा बन गई है , दरअसल भारत निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों की समीक्षा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता सूची त्रुटिरहित हो।

इसके तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर काम किया जाता है (Parliament Monsoon Session)

क्यों मचा है बवाल?

कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों का आरोप है कि इस अभियान का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि विशेष समुदाय या जाति विशेष के लोगों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सही जानकारी नहीं दी जा रही जिससे लोग भ्रमित हैं। राजद, कांग्रेस, और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य निर्वाचन आयोग से इस अभियान पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

निर्वाचन आयोग ने दिया ये जवाब

निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह नियमबद्ध और निष्पक्ष है। अधिकारी डेटा का मिलान आधार और अन्य सरकारी दस्तावेजों से कर रहे हैं। इसके अलावा, किसी भी मतदाता को बिना सूचना के सूची से नहीं हटाया जाएगा, जो भी आरोप हैं वो निराधार हैं।

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