परेश रावल ने तबलीगी जमात पर की खरी बात, अगर आप दूसरों की जान खतरे में डाल रहे हैं तो...
नई दिल्ली- ऐक्टर-कॉमेडियन से नेता बने परेश रावल ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले सभी लोगों के साथ सख्ती से पेश आने की सलाह दी है। उन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से निकलकर देश भर मे कोरोना वायरस फैलाने वाले तबलीगी जमात को लेकर भी अपना नजरिया सामने रखा है। बड़ी बात ये है कि कई राज्य सरकारों की ओर से लॉकडाउन बढ़ाए जाने की सलाह का भी उन्होंने समर्थन किया है।

लॉकडाउन बढ़ाने का समर्थन करते हुए परेश रावल ने कहा है कि ,'जिस तरह से नोवल कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले बढ़ रहे हैं, यह समय की मांग है और यह सबके लिए फायदेमंद है।' इस दौरान लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के साथ पुलिस की ओर से की गई कुछ बर्बरताओं की हो रही शिकायतों को लेकर उनहोंने कहा है कि 'पुलिस को भी यह अच्छा नहीं लग रहा है, लेकिन जब लोग हालात की गंभीरता को समझने के लिए तैयार नहीं होंगे तो उन्हें कड़ी कार्रवाई करनी ही पड़ेगी।'
लोगों ने देखा है कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के धार्मिक मरकज की वजह से देश में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले कितनी तेजी से बढ़ गए हैं। वहां से निकले अधिकतर जमाती कोरोना संक्रमित पाए गए हैं और जब उन्हें अलग-अलग आइसोलेशल सेंटर में रखा गया तो वहां पर उनकी हरकतें भी सवालों के घेरे में हैं। कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि जमात का नाम उछालकर कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश में हैं। परेश रावल ने एक ही झटके में जमात को लेकर जारी सारी सभी बहस पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा है, 'यह किसी खास धर्म की बात नहीं है। मिनट-दर-मिनट खबरें आई हैं और इसके बारे में लोगों को सब कुछ पता है। थूकने और खुले में शौच करने की जानकारी सबके सामने है। कोई इनसे इनकार नहीं कर सकता।'
परेश रावल ने अपनी बात एक बेहद अहम सवाल के साथ खत्म किया है। उन्होंने पूछा है, 'मुझे लगता है कि जिसने और जहां भी उल्लंघन किया है उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए। हमारे देश में आत्महत्या भी गुनाह है, इसलिए अगर आप दूसरों की जान खतरे में डालते हैं तो क्या इसपर सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए?'












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