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पैराडाइज़ पेपर्स: जो बातें अभी तक आपको पता हैं

क्या हैं पैराडाइज़ पेपर्स?

पैराडाइज़ पेपर्स जनता ते सामने आने वाले वो वित्तीय दस्तावेज़ हैं जो दुनिया भर के अमीर और ताक़तवर लोगों के टैक्स हेवन देशों में बड़े निवेशों पर रोशनी डालते हैं. तकनीकी भाषा में इसे ऑफ़शोर फिनांस कहा जा रहा है.

इस पूरे हफ्ते सैकड़ों लोगों और कंपनियों की कर और वित्तीय जानकारियां साझा की जा रही हैं. तमाम जानकारियां इस बात पर केंद्रित हैं कि कैसे राजनेताओं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सेलेब्रिटी और हाई प्रोफ़ाइल लोगों ने ट्रस्ट, फाउंडेशन, काग़ज़ी कंपनियों के ज़रिए टैक्स अधिकारियों से अपने कैश और सौदों को छुपाए रखा.

पिछले साल के पनामा पेपर्स की ही तरह ये दस्तावेज़ जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किए थे. दस्तावेज़ों की जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने की है.

बीबीसी पैनोरमा और गार्डियन दुनिया के उन 100 मीडिया समूहों में से हैं जो इन दस्तावेज़ों की जांच कर रही हैं.

पैराडाइज़ पेपर्स नाम इसलिए चुना गया क्योंकि जिन देशों के नाम इसमें आए हैं, उन्हें दुनिया की ख़ूबसूरत जगहों में गिना जाता है. इसमें बरमूडा भी शामिल है जहां मुख्य कंपनी 'ऐपलबी' का हेडक्वॉर्टर है. इन देशों में टैक्स हेवन यानी कर चोरी का स्वर्ग कहे जाने की तमाम खूबियां हैं. इसके बाद नाम आता है 'आयल ऑफ़ मैन' जिसका भी एक बड़ा रोल रहा है.

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किनका पर्दाफ़ाश किया जा रहा है?

सैकड़ों राजनेताओं, मल्टीनेशनल्स, सिलेब्रिटीज़ और रईस लोगों के टैक्स हेवन देशों में निवेश से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक हुई है. इनमें से कुछ घरेलू लोग भी हैं. इस सेक्टर में काम कर रहे लीगल फर्म्स, वित्तीय संस्थानों और एकाउंटेंट्स के कामकाज पर ये पेपर्स रोशनी डालते हैं. अभी तक जो कहानियां सामने आई हैं.

द पैराडाइज़ पेपर्स में दावा किया गया है कि ब्रितानी महारानी के निजी धन में से क़रीब एक करोड़ पाउंड विदेश में निवेश किए गए. इन पैसों को डची ऑफ़ लेंकास्टर ने कैमन आइलैंड्स और बरमुडा के फंड में निवेश किया था. ये महारानी को आय देते हैं और उनके क़रीब 50 करोड़ पाउंड की निजी जागीर के निवेशों को संभालते हैं.

दस्तावेज़ों में ये भी दावा किया गया है कि डोनल्ड ट्रंप के क़रीबी सहयोगी रॉस ने एक जहाजरानी कंपनी में निवेश बरक़रार रखा जो रूस की एक ऊर्जा कंपनी के लिए गैस और तेल का परिवहन करके सालाना करोड़ों डॉलर कमाती है. रूस की एनर्जी फर्म में व्लादिमीर पुतिन के दामाद और अमरीका के प्रतिबंधों का सामना कर रहे दो लोगों का भी निवेश है.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रडो के क़रीबी सहयोगी ऐसी विदेशी स्कीम से जुड़े हैं, जिससे संभव है कि देश को करोड़ों डॉलर का नुक़सान पहुंचा हो. टैक्स हेवन देशों को बंद करने के लिए अभियान चलाने वाले ट्रुडो के लिए इससे हालात शर्मनाक हो सकते हैं.

कंज़र्वेटिव पार्टी के पूर्व डिप्टी चेयरमैन और बड़े दानदाता, लॉर्ड एश्क्रॉफ्ट ने अपने विदेशी निवेश के प्रबंधन में नियमों की अनदेखी की हो सकती है. अन्य दस्तावेज़ों से पता चलता है कि उन्होंने हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में अपना नॉन-डोम (ग़ैर रिहायशी) दर्ज़ा बरकरार रखा जबकि ऐसी रिपोर्टें आईं थी कि वो ब्रिटेन के स्थायी नागरिक बन गए हैं.

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पैराडाइज़ पेपर्स के स्रोत?

इनमें 1400 जीबी से भी ज़्यादा डेटा हैं और तकरीबन 1.34 करोड़ दस्तावेज़. इनमें 68 लाख दस्तावेज़ क़ानूनी सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी ऐपलबी और कॉर्पोरेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी एस्टेरा से मिले हैं. दोनों कंपनियां 2016 तक ऐपलबी के नाम से काम करती रही थीं. इसी साल एस्टेरा स्वतंत्र रूप से वजूद में आई.

अन्य साठ लाख दस्तावेज़ 19 देशों से मिले हैं. इनमें ज्यादातर कैरिबियाई इलाके हैं. दस्तावेज़ों का एक छोटा हिस्सा सिंगापुर से काम करने वाली इंटरनेशनल ट्रस्ट और कॉर्पोरेट सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी एशियासिटी ट्रस्ट है. सार्वजनिक हुए दस्तावेज़ सात दशकों के समय (1950 से 2016) को समेटे हुए हैं.

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ऐपलबी क्या है?

ज़्यादातर दस्तावेज़ ऐपलबी कंपनी के हैं. बरमुडा स्थित ये कंपनी क़ानूनी सेवाए देती है. ये अपने ग्राहकों को शून्य या बेहद कम कर वाले देशों में कंपनियां स्थापित करने में मदद करती है. इस कंपनी का इतिहास साल 1890 से शुरू होता है. अपने क्षेत्र की दुनिया की दस बड़ी कंपनियों में इसका नाम लिया जाता है.

सार्वजनिक हुई जानकारी से ये पता चलता है कि ऐपलबी की क्लाइंट लिस्ट में अमरीकियों का बोलबाला है. 31,000 अमरीकी पते इस लिस्ट में हैं. 14 हज़ार पते ब्रिटेन के हैं और 12 हज़ार बरमुडा के.

पैराडाइज़ पेपर्स किसने लीक किए?

साल 2016 के पनामा पेपर्स की ही तरह ये दस्तावेज़ जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने हासिल किए थे. दस्तावेज़ों की जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने की है. अख़बार ने अपने सूत्र सार्वजनिक नहीं किए हैं.

दस्तावेज़ों पर कौन काम कर रहा है?

दस्तावेज़ों की जांच इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने की है. बीबीसी पैनोरमा और गार्डियन 67 देशों के उन 100 मीडिया समूहों में से हैं जो इन दस्तावेज़ों की जांच कर रही हैं. आईसीआईजे दुनिया के खोजी पत्रकारों का ग्लोबल नेटवर्क है.

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इसमें जनहित क्या है?

दस्तावेज़ों की जांच करने वाले मीडिया संस्थानों का कहना है कि ये जांच जनहित में हैं, क्योंकि टैक्स हेवन देशों से लीक हुए दस्तावेज़ों से बार-बार ग़लत काम सामने आए हैं. सार्वजनिक हुए इन दस्तावेज़ों की वजह से दुनिया भर में कई देशों में सैंकड़ों जांच शुरू हुए हैं और नतीज़तन राजनेताओं, मंत्रियों और यहां तक कि प्रधानमंत्रियों का अपना पद छोड़ना पड़ा है.

पनामा लीक्स से कैसे अलग?

पिछले चार सालों में ये पांचवी बड़ी लीक है. हालांकि पनामा पेपर्स आकार के लिहाज से ज़्यादा बड़े थे लेकिन पैराडाइज पेपर्स में जानकारियों और सूचना का पैमाना कहीं बड़ा है. इन्हें पनामा पेपर्स के दस्तावेज़ों से ज़्यादा सख्त माना जा रहा है.

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टैक्स हेवन क्या है?

ऐसे संस्थानों को आम भाषा में टैक्स हेवन जहाँ आसानी से कर बचाया जा सकता है. इंडस्ट्री की भाषा में इन्हें ऑफ़शोर फ़ाइनेंसियल सेंटर्स (ओएफ़सी) कहा जाता है. ये आमतौर पर स्थिर, भरोसेमंद और गुप्त होते हैं और अक्सर छोटे द्वीप होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ़ द्वीप ही होते हैं, और इनमें ग़लत कार्यों को रोकने के लिए क्या उपाय हैं इसे लेकर भिन्नताएं हो सकती हैं.

क्या हैं पैराडाइज पेपर्स- ये बड़ी संख्या में लीक दस्तावेज़ हैं, जिनमें ज़्यादातर दस्तावेज़ आफ़शोर क़ानूनी फर्म ऐपलबी से संबंधित हैं. इनमें 19 तरह के टैक्स क्षेत्र के कारपोरेट पंजीयन के पेपर भी शामिल हैं. इन दस्तावेज़ों से राजनेताओं, सेलिब्रेटी, कारपोरेट जाइंट्स और कारोबारियों के वित्तीय लेनदेन का पता चलता है.

1.34 करोड़ दस्तावेज़ों को जर्मन अख़बार ने हासिल किया है और इसे इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) से शेयर किया है. 67 देशों के क़रीब 100 मीडिया संस्था से इसमें शामिल हैं, जिसमें गार्डियन भी शामिल है. बीबीसी की ओर से पैनोरमा की टीम इस अभियान से जुड़ी है. बीबीसी इन दस्तावेज़ों को मुहैया कराने वाले स्रोत के बारे में नहीं जानती.

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