इस पाकिस्तानी पिता ने अपने बेटे के हत्यारे 10 भारतीयों को किया माफ

दुबई में पाकिस्तान के रहने वाले रियाज का बेटा फरहान काम करता था। उसकी हत्या का आरोप भारत स्थित पंजाब के 10 लोगों पर था, जिन्हें अदालत ने फांसी की सजा सुना दी थी।

नई दिल्ली। एक ओर भारत और पाकिस्तान के बीच तमाम राजनयिक और राजनीतिक दिक्कते हैं वहीं दूसरी ओर एक पाकिस्तानी पिता ने 10 भारतीय युवकों को उनके बेटे की कत्ल के आरोप में माफ करने का फैसला किया है।

बता दें कि साल 2015 में पाकिस्तान स्थित पेशावर के मुहम्मद फरहान का कत्ल दुबई मं हो गया था। बीते साल 2016 के दिसंबर में वहां की अदालत में सभी 10 भारतीय युवकों को फांसी की सदा सुनाई। एक युवक को फांसी की सजा ना देकर अदालत में उस पर 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।

इस पाकिस्तानी पिता ने अपने बेटे के हत्यारे 10 भारतीयों को किया माफ

वहीं मृतक फरहान के पिता मुहम्मद रियाज ने अब फैसला किया है कि वो अपने बेटे के हत्यारों को माफ कर देंगे। यह फैसला वो अपने परिवार और रिश्तेदारों से बात करने के बाद बाद करेंगे। अंग्रेजी अखबार मेल टुडे को रियाज के एक रिश्तेदार ने बताया कि यह सच है कि रियाज ने उन्हें माफ करने का फैसला किया है। यह बहुत ही दर्दनाक है हाालंकि आखिरी फैसला उन्हें ही लेना है।

देना होता है ब्लड मनी

हालांकि इस पूरे मामले में एक और शख्स का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण है। वो है समाजिक कार्यकर्ता और दुबई में होटलों के मालिक एसपी सिंह ओबरॉय। ओबरॉय एक गैर लाभकारी संगठन चलाते हैं जो मौत की सजा से लोगों को बचाता है। उनके लंबे प्रयास के बाद मृतक का परिवार ब्लड मनी लेने को राजी हुआ है। सूत्रों का कहना है कि उनके एनजीओ ने ही ब्लड मनी का इंतजाम किया है लेकिन उसकी कुल राशि कितनी है , इसकी जानकारी नहीं है।

दुबई के कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे की मौत या चोट के लिए गलती से या जानबूझकर जिम्मेदार है, तो उसे ब्लड मनी देना होता है। ब्लड मनी, पीड़ित के परिवार को बतौर मुआवजा दिया जाता है। यह राशि, शरिया के मुताबिक दी जाती है।

ये हैं वो 10 भारतीय आरोपी

बता दें कि जिन 10 युवकों की जान बची है वो सभी पंजाब के हैं। इनमें हरप्रीत सिंह, चंद्र शेखर, टोनी, सतमिंदर सिंह, अजय कुमार, धर्मवीर सिंह, कुलविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, जगजीत सिंह शामिल हैं इस मामले में दुबई की अदालत अगली सुनवाई 12 अप्रैल को करेगी।

गौरतलब है कि ओबरॉय अब तक ऐसे 17 लोगों को फांसी की सजा पाने से बचा चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि जो लोग मामले में आरोपी है सभी गरीब परिवार से हैं और यहां इलेक्ट्रिशियन और प्लंबर का काम करते हैं।

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