पाकिस्तान: आर्मी चीफ जनरल बाजवा के लिए PM इमरान ने बुलाई संसद
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए पीएम इमरान खान ने शुक्रवार को संसद का एक विशेष सत्र बुलाया है। इससे पहले कार्यकाल बढ़ाने वाले एक बिल को प्रधानमंत्री इमरान खान की कैबिनेट की तरफ से मंजूरी भी दे दी गई है। अब आपको बता दें कि पाकिस्तान में पिछले वर्ष इमरान ने आर्मी चीफ का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ा दिया था मगर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इसे छह माह तक ही रखा है।

बाजवा के लिए कानून भी तोड़ा
इमरान की कैबिनेट ने जो ड्राफ्ट को मंजूरी दी है उसमें जनरल का कार्यकाल तीन साल तक बढ़ाने की मंजूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान सरकार को चेतावनी दी थी। सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है। सत्र में उनकी सरकार की तरफ से आर्मी एक्ट संशोधन विधेयक पेश किया। पाकिस्तान के अखबार डॉन की ओर से यह जानकारी दी गई है। संसद के इस विशेष सत्र को बुलाने से सिर्फ 24 घंटे पहले ही नोटिफिकेशन जारी किया गया है। जबकि आम तौर पर 48 घंटे पहले सूचना दी जाती है। हालत यह है कि कई सांसद इस विशेष सत्र के लिए इस्लामाबाद पहुंच ही नहीं पाए हैं। निचले सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक उच्च सदन में पेश किया जाएगा। इस पर निचले सदन में गुरुवार को बहस होने की संभावना जताई गई है। नवंबर में पाक सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट इमरान सरकार के सामने दो शर्तें रखी थीं । कोर्ट ने कहा था कि सरकार और संसद को नए आर्मी चीफ के नाम पर विचार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी इमरान को फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया था जिसमें जनरल बाजवा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया था। जनरल बाजवा 29 नवंबर 2019 को रिटायर होने वाले थे। इमरान खान सरकार ने 19 अगस्त को बाजवा का कार्यकाल तीन साल के लिए बढ़ा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन छह महीनों के दौरान सेना प्रमुख के कार्यकाल विस्तार के लिए संसद कानून बनाए। यह फैसला पाकिस्तान के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की सरकार को चेतावनी भी दी थी कि अगर छह महीनों के अंदर कानून पारित नहीं किया गया तो सेना प्रमुख की नियुक्ति अवैध हो जाएगी। यह फैसला पाकिस्तान के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने सुनाया था।












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