Operation Sindoor की पहले से PAK को सूचना थी? एस जयशंकर ने दिया ऐसा जवाब, कांग्रेस के दावे चकनाचूर!
Operation Sindoor: 7 मई 2025, एक तारीख जो अब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के इतिहास में दर्ज हो चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद तीन बड़े आतंकी शिविरों को निशाना बनाया। और इसके असर इतने गहरे रहे कि खुद पाकिस्तान अपने ही खड़े किए गए ढांचे की हिफाजत नहीं कर सका।
सरकार ने सोमवार, 26 मई को संसद की विदेश मामलों की सलाहकार समिति को बताया कि यह हमला सिर्फ एक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक दृढ़ता और आतंकी संगठनों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा था।

क्या था इस ऑपरेशन का असर?
सरकार के मुताबिक, पाकिस्तान इन शिविरों की रक्षा नहीं कर पाया, जिससे उसकी सेना का मनोबल गिरा और पूरी दुनिया के सामने उसकी रणनीतिक कमजोरी उजागर हो गई। 100 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल जैसे संगठनों के लड़ाके शामिल थे।
दुनिया का रुख कैसा रहा?
सरकार ने बताया कि इस ऑपरेशन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत का खुलकर समर्थन किया। सिर्फ तीन देशों-चीन, तुर्की और अजरबैजान-ने विरोध जताया, जबकि बाकी सभी राष्ट्रों ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार की सराहना की। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने यहां तक कहा कि भारत को आतंकवाद से खुद की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
क्या पाकिस्तान को पहले से जानकारी दी गई थी?
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सवाल उठाए कि क्या सरकार ने पाकिस्तान को सतर्क किया था? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ किया कि कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। सिर्फ हमले के बाद DGMO स्तर पर संपर्क हुआ, जो एक प्रोफेशनल सैन्य परंपरा है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को 'बेईमानी' और 'तथ्यों की गलत व्याख्या' बताया।
सिंधु जल संधि पर क्या निर्णय हुआ?
सांसदों ने पूछा कि क्या सिंधु जल संधि सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से निलंबित है या इसका कोई ठोस असर पड़ेगा। इस पर सरकार ने कहा कि संधि फिलहाल स्थगित है और आने वाले समय में इसके भविष्य पर स्पष्ट निर्णय लिया जाएगा।
भारत की रणनीति: सिर्फ हमला नहीं, पूरी तैयारी
इस बैठक में सरकार ने बताया कि हमला सिर्फ एक 'रिएक्शन' नहीं था, बल्कि एक पूर्व नियोजित रणनीति थी, जिसमें उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को पहचानकर उन्हें समय से पहले खत्म करने की योजना बनाई गई थी। इससे न सिर्फ आतंकी ढांचा कमज़ोर हुआ, बल्कि पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर भी असर पड़ा।
कूटनीतिक स्तर पर भी फुल एक्शन मोड में भारत
भारत ने सात बहुपक्षीय प्रतिनिधिमंडलों को दुनिया भर के देशों में भेजा है, ताकि उन्हें पाकिस्तान की भूमिका और भारत की कार्रवाई के बारे में तथ्यात्मक जानकारी दी जा सके। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि ये सिर्फ हमला नहीं था, ये एक संदेश था-कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा।
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