Pahalgam Terror Attack: पहले भड़काऊ भाषण फिर पहलगाम अटैक! क्या पाक आर्मी चीफ का है हमले से कनेक्शन?
Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने न सिर्फ इंसानी जानें लीं, बल्कि देश की उस पीड़ा को भी फिर से जगा दिया, जो 25 साल पहले चित्तसिंहपुरा नरसंहार के वक्त महसूस हुई थी। हैरानी की बात ये है कि तब भी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर थे और अब फिर अमेरिका की उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस भारत में मौजूद हैं।
आतंकी संगठन एक बार फिर इसी मौके पर हमला करके कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में लाने की साजिश रचते नजर आए। पिछले कुछ सालों में घाटी में हालात सुधरते दिखाई दे रहे थे - टूरिज्म बढ़ा, G20 बैठक हुई, और शांति की उम्मीदें मजबूत हुईं। लेकिन अब इस खूबसूरत वादी को एक बार फिर खून से रंगने की कोशिश की गई है।

हमले के पीछे TRF का हाथ
कश्मीर से मिली रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह हमला पहलगाम के बैसारन इलाके में हुआ, जिसमें करीब 16 लोगों की जान चली गई। जानकारों का मानना है कि इस हमले में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
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पाकिस्तानी आर्मी चीफ का भड़काऊ बयान
हमले से कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने कश्मीर को "पाकिस्तान की शिरा" (The Jugular Vein of Pakistan) बताया था। उन्होंने कहा था, "यह हमारी शिरा था, है और रहेगा। हम अपने कश्मीरी भाइयों का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।" भारत सरकार ने इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया था।
पाकिस्तान की घरेलू चुनौतियां भी जिम्मेदार?
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के अंदर इस समय सेना पर काफी दबाव है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों ने सेना की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में हमला कर के पाकिस्तान की सेना देश के भीतर से हटकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान कश्मीर की ओर खींचना चाहती है।
शांति और टूरिज्म को टारगेट किया गया
हाल के सालों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में गिरावट देखी गई थी और टूरिज्म में उछाल आया था। पिछले साल श्रीनगर में G20 टूरिज़्म मीटिंग भी इसी का संकेत था। लेकिन अब एक बार फिर पर्यटकों को निशाना बनाकर माहौल को खराब करने की कोशिश की गई है।
2023 में भी हुआ था हमला
पर्यटकों पर इस तरह के हमले अब कम ही होते हैं। पिछला बड़ा हमला जून 2023 में हुआ था जब एक बस पर आतंकी हमले के बाद वह खाई में गिर गई थी और 9 लोगों की मौत हो गई थी।
भारत की ओर से कड़ा संदेश
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसे हमलों से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं। कश्मीर में शांति भंग करने की किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
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