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Pahalgam Terror Attack: हमले के लिए कैसे हुआ था आतंकियों का सिलेक्शन? जानिए बड़ा अपडेट

Pahalgam Terror Attack: पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर ने आतंकवाद की कई दर्दनाक कहानियां देखी हैं, लेकिन 22 अप्रैल को पहलगाम के बाइसारन घाटी में जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। एक खूबसूरत पर्यटन स्थल उस दिन खून से लाल हो गया, जब आतंकियों ने धर्म पूछकर निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर दी। अब इस भीषण हमले से जुड़ी जो जानकारी सामने आई है, वह और भी चौंकाने वाली है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के निर्देश पर अंजाम दिया गया था। खास बात यह है कि साजिश इतनी गुप्त रखी गई कि किसी भी कश्मीरी आतंकी को इसमें शामिल नहीं किया गया। यह हमला 26/11 मुंबई हमले जैसी बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।

Pahalgam Terror Attack

धर्म पूछकर की गई थी हत्या

इस हमले में 26 आम लोगों को सिर्फ उनके धर्म के आधार पर चुन-चुनकर मारा गया। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले की पूरी साजिश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने मिलकर रची थी।
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केवल पाकिस्तानी आतंकियों को दी गई जिम्मेदारी

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खतरनाक हमले में किसी भी कश्मीरी आतंकी को शामिल नहीं किया गया। ISI ने लश्कर कमांडर साजिद जट्ट को खास निर्देश दिए थे कि वह इस ऑपरेशन में सिर्फ विदेशी यानी पाकिस्तानी आतंकियों को शामिल करे, ताकि साजिश गुप्त बनी रहे।

हमले की अगुवाई पाकिस्तानी कमांडो ने की

हमले का नेतृत्व 'सुलेमान' नाम के एक आतंकी ने किया, जो पाकिस्तानी स्पेशल फोर्सेज का पूर्व कमांडो माना जा रहा है। वह लश्कर के मुख्य ठिकाने मुरिदके (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) में आतंकी प्रशिक्षण में भी शामिल रहा है। जानकारी के अनुसार, वह 2022 में जम्मू क्षेत्र से सीमा पार करके भारत में घुसा था।

हमले से पहले एक हफ्ते तक इलाके में रहा सक्रिय

सैटेलाइट फोन की जांच से पता चला है कि हमला होने से ठीक एक हफ्ते पहले, 15 अप्रैल को सुलेमान त्राल के जंगलों में मौजूद था। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि वह कई दिनों से बाइसारन इलाके में घात लगाकर बैठा था।

पिछले हमले में भी था शामिल

सुलेमान को इससे पहले अप्रैल 2023 में पुंछ में भारतीय सेना के ट्रक पर हमले में भी शामिल माना जा रहा है, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। हमले के बाद वह दो साल तक छिपा रहा।

स्थानीय आतंकियों की भूमिका संदिग्ध

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले पाकिस्तानी आतंकियों हाशिम मूसा और अली भाई के शामिल होने की आशंका जताई थी, लेकिन अब तक जांच में केवल सुलेमान की भूमिका ही पक्की हुई है। स्थानीय आतंकी आदिल हुसैन ठोकर की संलिप्तता की भी पुष्टि नहीं हो पाई है।

स्थानीय लोगों की सीमित भूमिका

NIA ने इस मामले में पहलगाम के ही रहने वाले परवेज अहमद जौथर और बशीर अहमद जौथर को गिरफ्तार किया है। इन दोनों ने आतंकियों को खाना, ठहरने की जगह और जरूरी सामान उपलब्ध कराया था। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें आतंकी साजिश की जानकारी नहीं थी और वे केवल थोड़े पैसों के लालच में मदद कर बैठे।

ऑपरेशन सिंदूर में 100 से ज्यादा आतंकी ढेर

पहालगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया। यह अभियान 10 मई तक चला, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया। इस दौरान सेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को भी निशाना बनाया।
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