Pahalgam Attack: एक महीने बाद भी पहलगाम हमलावरों का सुराग नहीं, क्या-क्या हुआ रिपोर्ट में पढ़ें
Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक महीना बीत चुका है, जहां 22 अप्रैल को आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी थी। इस दुखद घटना में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे। मरने वालों में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक था। भारतीय एजेंसियों ने इस हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता की पहचान की, जिसके बाद भारत ने आतंकवाद को पनाह देने के लिए जाने जाने वाले अपने पड़ोसी के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाकर बड़ी कार्रवाई की।
हमले के बाद क्या-क्या हुआ था?
हमले के जवाब में गृह मंत्री अमित शाह घटना के तुरंत बाद श्रीनगर पहुंचे। उन्होंने पहलगाम में पीड़ितों से मुलाकात की और बाद में सेना, CRPF और पुलिस के सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की । इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब की अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर स्वदेश लौट आए। एयरपोर्ट पर उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।

पाक के खिलाफ लिए बड़े फैसले
स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बैठक की। कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) ने पाकिस्तान को प्रभावित करने वाले चार महत्वपूर्ण फैसले लिए
1. सिंधु जल संधि को निलंबित करना
2. अटारी-वाघा सीमा को तुरंत बंद करना
3. पाकिस्तान के लिए SAARC वीज़ा योजना को रोकना
4. पाकिस्तान के उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या कम करना
बदला: ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय सेना ने PoK और पाकिस्तान के में बसे नौ आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया। जिनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के ठिकानों को निशाना बनाया। मरने वाले आतंकियों में 10 से ज्यादा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के घर के लोग थे। इस हमले में पहलगाम हमले के लिए ज़िम्मेदार समूहों से जुड़े बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी गईं थी।
विपक्ष को भी लिया साथ
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद 8 मई को सुबह 11 बजे सर्वदलीय बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेताओं को ऑपरेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सभी विपक्षी दलों ने भी खुले तौर पर सरकार और सेना के साथ इस ऑपरेशन में एकजुटता दिखाई।
हमले के एक महीने बाद भी नहीं हाथ लगे आतंकी
पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादी जिनकी संख्या तीन और कुछ जगहों पर पांच बताई जा रही है वो ना तो अभी पकड़े गए, ना मारे गए और ना ही उनका कोई सुराग हाथ लगा है। पाकिस्तानी आतंकियों में आसिफ फौजी उर्फ मूसा, सुलेमान शाह उर्फ युनुस और अब्दुल तल्हा उर्फ आसिफ शामिल हैं, अभी तक सिर्फ ये जानकारी और उनकी तस्वीरें हाथ लगी हैं। सभी आतंकियों पर 20 लाख रुपए का इनाम रखने और सौ से ज्यादा लोगों से बातचीत करने के बाद भी एजेंसियों के हाथ अभी भी खाली हैं। वहीं, एक अन्य जानकारी बताती है कि आतंकी अब भी पहलगाम और इसके आसपास के घने जंगलों में बार-बार अपनी लोकेशन बदलकर ठिकानों में छिपे हुए हैं। हालांकि, सेना का कहना है कि आतंकियों की तलाश में सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
युद्ध और सीजफायर
भारत द्वारा सिंधु नदी में पानी का बहाव रोकने के बाद पाकिस्तान ने शिमला समझौते को रद्द करके जवाब दिया। पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने धमकी दी कि अगर नदी में पानी नहीं बहेगा तो खून-खराबा हो सकता है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने कई भारतीय शहरों पर ड्रोन हमले किए; हालांकि, भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें हवा में ही रोक दिया। भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत में ड्रोन भेजने के लिए जिम्मेदार एक पाकिस्तानी चौकी और आतंकवादी लॉन्च पैड को नष्ट कर दिया। जब पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की, तो भारत की एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें नाकाम कर दिया और लाहौर में पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ 11 एयरबेस को भी पर मिसाइलों से हमले कर उन्हें बर्बाद कर दिया। इन हमलों में पाकिस्तानी सेना के 50 के करीब अधिकारी मारे गए
न्यूक्लियर युद्ध की धमकी
बढ़ते तनाव के बीच, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जैसे पाकिस्तानी नेताओं ने न्यूक्लियर की धमकी दी, जबकि प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की आपातकालीन बैठक बुलाई। अंततः भारत की ओर से और अधिक तनाव बढ़ने के डर से पाकिस्तान ने वैश्विक स्तर पर सीजफायर की मांग की, लेकिन भारत ने सीजफायर पर सहमति जताने से पहले दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सीधे संवाद पर जोर दिया, जिसे पाक सेना द्वारा शुरू किए गए संपर्क के बाद 10 मई 2025 को स्थापित किया गया।
नहीं हो सकती पाक से दोस्ती!
इस हमले के बाद की घटनाएं भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है। पाकिस्तान की तरफ से बार-बार हो रहे आतंकी हमलों की वजह से उसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी नीचा देखना पड़ रहा है। साथ ही पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिाकरियों की मौजूदगी में आतंकियों का राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना बताता है कि वह अभी भी आतंकवादियों के साथ खुलकर खड़ा है और उनकी पूरी की मदद कर रहा है। अगर पाकिस्तान इसी तरह आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा तो उससे कभी दोस्ताना संबंध नहीं हो सकते।
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